नहाय खाय से शुरू हुआ छठ पूजा (Chhath Puja), जानिए पूरी तिथि और कथा
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नहाय खाय से शुरू हुआ छठ पूजा (Chhath Puja), जानिए पूरी तिथि और कथा

वैदिक पंचांग के अनुसार, छठ पूजा (Chhath Puja) 2025 की शुरुआत 25 अक्टूबर से नहाय खाय के साथ हो चुकी है। यह पर्व चार दिनों तक चलता है और 36 घंटे का निर्जला व्रत सबसे कठिन माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि छठ मैया की पूजा से संतान सुख, पारिवारिक शांति और समृद्धि प्राप्त होती है। मार्कण्डेय पुराण के अनुसार, छठी मैया प्रकृति के छठे अंश से उत्पन्न हुई थीं। पौराणिक कथा के अनुसार, राजा प्रियंवद और रानी मालिनी की संतानहीनता के बाद देवी षष्ठी की आराधना से पुत्र की प्राप्ति हुई। तभी से छठ पूजा परंपरा शुरू हुई। छठ पूजा 2025 की शुरुआत: नहाय खाय के साथ आरंभ हुआ लोक आस्था का महापर्व वैदिक पंचांग के अनुसार, छठ पूजा 2025 (Chhath Puja 2025) की शुरुआत 25 अक्टूबर से नहाय खाय के साथ हो चुकी है। यह महापर्व सूर्य उपासना और शुद्ध आस्था का प्रतीक माना जाता है। अगले चार दिनों तक चलने वाले इस पर्व में महिलाएं और पुरुष 36 घंटे का निर्जला व्रत रखकर सूर्यदेव और छठ मैया की पूजा करते हैं। छठ मैया की उत्पत्ति और धार्मिक महत्व मार्कण्डेय पुराण के अनुसार, ब्रह्मा जी द्वारा सृष्टि निर्माण के बाद देवी प्रकृति ने स्वयं को छह भागों में विभाजित किया। छठा अंश देवी षष्ठी या छठी मैया के रूप में जाना गया। इन्हें मानस पुत्री कहा जाता है और संतान की रक्षा व दीर्घायु के लिए पूजित किया जाता है। हिंदू परंपरा में बालक के जन्म के छठे दिन इनकी पूजा का विधान है। छठ पूजा की पौराणिक कथा पौराणिक कथा के अनुसार, राजा प्रियंवद और रानी मालिनी संतान न होने से दुखी थे। ऋषि कश्यप की सलाह पर उन्होंने यज्ञ किया, जिसके फलस्वरूप मृत पुत्र की प्राप्ति हुई। दुखी राजा ने प्राण त्यागने का निर्णय लिया, तभी कन्या देवसेना प्रकट हुईं। उन्होंने कहा कि वे प्रकृति के छठे अंश से उत्पन्न हैं और षष्ठी कहलाती हैं। राजा ने उनकी पूजा की और जीवित पुत्र प्राप्त किया। तभी से छठ पूजा की परंपरा प्रारंभ हुई। कब है खरना और अर्घ्य का समय इस वर्ष 26 अक्टूबर 2025 को खरना (Kharna 2025) होगा, जब व्रती गुड़-चावल का प्रसाद ग्रहण करते हैं। 27 अक्टूबर को डूबते सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा और 28 अक्टूबर को उगते सूर्य को अर्घ्य देकर छठ पूजा का समापन होगा। आस्था और लोक संस्कृति का संगम उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और दिल्ली समेत देशभर में छठ पूजा का विशेष महत्व है। यह पर्व न केवल धार्मिक आस्था से जुड़ा है, बल्कि लोक संस्कृति, शुद्धता और आत्मसंयम का अद्भुत प्रतीक भी है।

क्या FSSAI ने ORSL को बेचने की अनुमति दी? जानिए सच
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क्या FSSAI ने ORSL को बेचने की अनुमति दी? जानिए सच

भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) और ORSL ड्रिंक को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। 14 अक्टूबर को FSSAI ने सभी गैर-मानक ORS ड्रिंक्स पर बैन लगाया था, लेकिन दिल्ली हाईकोर्ट ने इस आदेश पर अस्थायी रोक लगा दी। इसी बीच बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. शिवरंजनी संतोष ने आरोप लगाया कि FSSAI ने ORSL कंपनी को पुराने हाई-शुगर स्टॉक बेचने की इजाजत दी है। हालांकि, FSSAI ने इसे “गलत दावा” बताते हुए खंडन किया और कहा कि कोर्ट के आदेश के कारण ही उत्पाद बाजार में बिक रहे हैं। असली ORS केवल WHO फॉर्मूले के अनुसार बनता है, जबकि कई ड्रिंक इससे भिन्न हैं। FSSAI और ORSL विवाद: सोशल मीडिया पर गलत दावों की पड़ताल सोशल मीडिया पर इस समय FSSAI और ORSL नामक ड्रिंक को लेकर गहरी बहस जारी है। कई पोस्ट्स में दावा किया गया कि भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने ORSL को बाजार में बेचने की अनुमति दे दी है। लेकिन, प्राधिकरण ने इस दावे का सख्त खंडन करते हुए इसे “Misrepresentation of Facts” बताया है। 14 अक्टूबर के आदेश और हाईकोर्ट की रोक 14 अक्टूबर 2025 को FSSAI ने स्पष्ट आदेश जारी किया था कि जो भी पेय विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के असली ORS फॉर्मूले पर आधारित नहीं हैं, वे अपने लेबल या नाम में “ORS” शब्द का इस्तेमाल नहीं कर सकते। यह फैसला इसलिए लिया गया था ताकि ग्राहक भ्रमित न हों और दस्त से पीड़ित बच्चों को असली ORS की जगह गलत उत्पाद न मिलें।हालांकि, जॉनसन एंड जॉनसन की यूनिट JNTL (जो ORSL बनाती है) ने दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर की। कोर्ट ने सुनवाई के बाद FSSAI के आदेश पर अंतरिम रोक (Stay Order) लगा दी, जिसके चलते ORSL जैसे उत्पाद अभी बाजार में बिक रहे हैं। डॉ. शिवरंजनी संतोष का आरोप और FSSAI का जवाब हैदराबाद की बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. शिवरंजनी संतोष ने सोशल मीडिया पर आरोप लगाया कि FSSAI ने ORSL बनाने वाली कंपनी को अपने पुराने हाई-शुगर स्टॉक को बेचने की “सहमति” दी है। उन्होंने इसे “राष्ट्रीय शर्म” बताते हुए कहा कि बच्चों के लिए यह उत्पाद खतरनाक है।FSSAI ने अपने आधिकारिक पोस्ट में स्पष्ट किया कि उसने किसी भी कंपनी को ऐसा कोई अनुमति पत्र या सहमति नहीं दी है। प्राधिकरण ने कहा कि यह मामला फिलहाल कोर्ट में विचाराधीन है, और किसी को गलत जानकारी नहीं फैलानी चाहिए। असली ORS और नकली ड्रिंक्स में फर्क FSSAI और डॉक्टरों के अनुसार, असली ORS (Oral Rehydration Solution) WHO के फार्मूले के तहत तैयार किया जाता है, जिसमें नमक, सोडियम, पोटेशियम और सीमित मात्रा में डेक्सट्रोज़ होता है। यह शरीर में तरल पदार्थ की कमी को पूरा करता है।जबकि ORSL जैसे कई ड्रिंक्स में 10 गुना तक अधिक शुगर होती है और जरूरी इलेक्ट्रोलाइट्स बहुत कम होते हैं, जिससे दस्त से पीड़ित बच्चों को नुकसान पहुंच सकता है। भारत में पांच साल से कम उम्र के बच्चों की मौत का एक प्रमुख कारण डायरिया है, इसलिए यह विवाद केवल कानूनी नहीं बल्कि स्वास्थ्य सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मुद्दा है। आगे क्या? FSSAI ने कहा है कि वह ORSL जैसे सभी गैर-मानक उत्पादों को बाजार से हटाने के लिए प्रतिबद्ध है। कोर्ट के अंतिम आदेश के बाद ही तय होगा कि इन ड्रिंक्स का भविष्य क्या होगा। फिलहाल उपभोक्ताओं को सलाह दी गई है कि वे असली ORS और समान नाम वाले उत्पादों में फर्क समझें और डॉक्टर की सलाह से ही इस्तेमाल करें।

दिवाली की रात दहेज की बलि चढ़ी नवविवाहिता, बस्ती के बडौगी गांव में हड़कंप
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दिवाली की रात दहेज की बलि चढ़ी नवविवाहिता, बस्ती के बडौगी गांव में हड़कंप

बस्ती जिले के सोनहा थाना क्षेत्र के बडौगी गांव में दिवाली की रात नवविवाहिता आलिया खातून की संदिग्ध मौत ने गांव को दहला दिया। शादी के 11 महीने बाद ही उसका शव फांसी के फंदे पर लटका मिला। मायके पक्ष ने पति मजहर अली व ससुरालवालों पर दहेज हत्या का आरोप लगाते हुए कहा कि नकद व बाइक की मांग पूरी न होने पर उसे प्रताड़ित किया जाता था। पुलिस ने पहले आत्महत्या मानने की कोशिश की, पर FIR दर्ज होने के बाद 304B, 498A व 34 धाराओं में मुकदमा दर्ज हुआ। दिवाली की रात दहेज की भेंट चढ़ी नवविवाहिता, बस्ती के बडौगी गांव में मातम बस्ती। जब देश दीपों की रौशनी में जश्न मना रहा था, तब बस्ती जिले के सोनहा थाना क्षेत्र के बडौगी गांव में एक परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। नवविवाहिता आलिया खातून (पत्नी मजहर अली) का शव दिवाली की रात फांसी के फंदे पर लटका मिला। शादी के 11 महीने बाद संदिग्ध मौत आलिया का निकाह पिछले वर्ष नवंबर में मजहर अली से हुआ था। मायके पक्ष के अनुसार, विवाह के कुछ ही महीनों बाद ससुराल वालों ने नकद राशि, बाइक और अन्य सामान की मांग शुरू कर दी थी। मांग पूरी न होने पर आलिया को मानसिक व शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया जाता था। मायके पक्ष का आरोप: हत्या को आत्महत्या बताया गया मृतका के भाई वसीम ने पुलिस को बताया, “बहन को मारकर फंदे पर लटका दिया गया।” उन्होंने पति मजहर अली सहित चार लोगों पर दहेज हत्या का आरोप लगाते हुए सोनहा थाने में एफआईआर दर्ज कराई। पुलिस ने आईपीसी की धारा 304B, 498A और 34 के तहत मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की है। पुलिस की भूमिका पर उठे सवाल ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि पुलिस ने पहले मामले को आत्महत्या बताकर लीपापोती की कोशिश की। हंगामे के बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया। थाना प्रभारी ने कहा कि “आरोपी की तलाश जारी है, निष्पक्ष जांच होगी।” गांव में शोक और विरोध प्रदर्शन आलिया की मौत से पूरे गांव में मातम और आक्रोश फैल गया। ग्रामीण महिलाओं ने दहेज प्रथा के खिलाफ नारे लगाए और न्याय की मांग की। मृतका के परिवार ने कहा कि जब तक आरोपी गिरफ्तार नहीं होंगे, वे अंतिम संस्कार नहीं करेंगे। दहेज हत्या के बढ़ते मामले चिंता का विषय एनसीआरबी के आंकड़ों के अनुसार, उत्तर प्रदेश में हर साल सैकड़ों महिलाएं दहेज की बलि चढ़ती हैं। ग्रामीण इलाकों जैसे बस्ती में यह समस्या और गंभीर रूप ले रही है। आलिया की मौत एक बार फिर समाज के उस काले सच को उजागर करती है कि रोशनी के त्योहार में भी अंधेरा अब भी कायम है।

शिक्षकों की गैरहाजिरी पर हाईकोर्ट सख्त, यूपी सरकार को दिए बड़े निर्देश
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शिक्षकों की गैरहाजिरी पर हाईकोर्ट सख्त, यूपी सरकार को दिए बड़े निर्देश

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश के प्राइमरी स्कूलों में शिक्षकों की उपस्थिति को लेकर सख्ती दिखाई है। न्यायमूर्ति पी.के. गिरी की पीठ ने बांदा की अध्यापिका इंदिरा देवी की याचिका पर सुनवाई करते हुए प्रदेश के मुख्य सचिव, एसीएस बेसिक व अन्य अधिकारियों को स्कूलों में अध्यापकों की उपस्थिति सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। कोर्ट ने कहा कि बच्चों के मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा कानून 2009 के तहत शिक्षा पाने के मौलिक अधिकारों का हनन नहीं होना चाहिए। कोर्ट ने डिजिटल अटेंडेंस और जिला-स्तरीय टास्क फोर्स की व्यवस्था लागू करने को कहा है। अगली सुनवाई 30 अक्टूबर को होगी। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दिखाई सख्ती: यूपी के प्राइमरी स्कूलों में शिक्षकों की उपस्थिति होगी डिजिटल इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश के प्राइमरी स्कूलों में शिक्षकों की अनुपस्थिति पर कड़ा रुख अपनाया है। न्यायमूर्ति पी.के. गिरी की पीठ ने बांदा जनपद की शिक्षिका इंदिरा देवी की याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को निर्देश दिया कि शिक्षकों की उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए डिजिटल अटेंडेंस सिस्टम लागू किया जाए। बच्चों के मौलिक अधिकारों के हनन पर चिंता कोर्ट ने कहा कि बच्चों के लिए शिक्षा पाना उनका मौलिक अधिकार है, और अध्यापकों की गैरहाजिरी इस अधिकार का उल्लंघन है। अदालत ने टिप्पणी की— “गुरु ब्रह्मा, गुरु विष्णु, गुरु देवो महेश्वरः, गुरु साक्षात् परब्रह्म तस्मै श्रीगुरुवे नमः।”कोर्ट ने यह उद्धरण देते हुए कहा कि शिक्षक समाज के निर्माणकर्ता हैं, उनकी अनुपस्थिति बच्चों के भविष्य को प्रभावित करती है। डिजिटल अटेंडेंस और टास्क फोर्स के आदेश हाईकोर्ट ने प्रदेश के मुख्य सचिव, एसीएस बेसिक और संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि प्राइमरी स्कूलों में शिक्षकों की डिजिटल अटेंडेंस की व्यवस्था करें। साथ ही, जिला और ब्लॉक स्तर पर टास्क फोर्स गठित की जाए ताकि उपस्थिति की निगरानी की जा सके। बांदा से जुड़ा मामला मामले में याची शिक्षिका इंदिरा देवी कंपोजिट स्कूल तिंदवारी, बांदा में तैनात हैं। आरोप है कि 30 अगस्त 2025 को डीएम के निरीक्षण के दौरान वह स्कूल में अनुपस्थित थीं। बीएसए बांदा ने इस पर कार्रवाई की थी, जिसे शिक्षिका ने कोर्ट में चुनौती दी। सरकार की तैयारी और चुनौतियाँ यूपी सरकार ने पहले भी बेसिक स्कूलों में डिजिटल अटेंडेंस शुरू करने की योजना बनाई थी, लेकिन शिक्षक संघों के विरोध के चलते इसे रोक दिया गया था। अब हाईकोर्ट के निर्देश के बाद यह प्रक्रिया दोबारा शुरू हो सकती है। हालांकि, शिक्षकों के सामने पहले से ही टीईटी अनिवार्यता जैसी चुनौतियाँ हैं, जिनके बीच डिजिटल अटेंडेंस एक नई जिम्मेदारी के रूप में जुड़ सकती है। शिक्षा की गुणवत्ता पर प्रभाव कोर्ट ने कहा कि शिक्षकों की गैरमौजूदगी से बच्चों की उपस्थिति और सीखने की गुणवत्ता दोनों पर नकारात्मक असर पड़ता है। गरीब बच्चे निजी ट्यूशन का खर्च नहीं उठा सकते, इसलिए सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की उपस्थिति अनिवार्य है। हाईकोर्ट इस मामले की अगली सुनवाई 30 अक्टूबर को करेगी।

‘कर्ण’ का किरदार निभाने वाले पंकज धीर का कैंसर से हुआ निधन
मनोरंजन, देश

‘कर्ण’ का किरदार निभाने वाले पंकज धीर का कैंसर से हुआ निधन

Pankaj Dheer News : सिनेमा और टीवी जगत से बेहद दुखद खबर सामने आई है। मशहूर अभिनेता पंकज धीर का 15 अक्टूबर 2025 को मुंबई में निधन हो गया। 68 वर्ष की उम्र में उन्होंने लंबी बीमारी, कैंसर, से जूझने के बाद अंतिम सांस ली। रिपोर्ट्स के अनुसार, पंकज धीर बीआर चोपड़ा की ‘महाभारत’ में कर्ण की भूमिका से प्रसिद्ध हुए थे। उनके निधन से बॉलीवुड और टीवी इंडस्ट्री में शोक की लहर है। दोस्त और अभिनेता फिरोज खान व अमित बहल ने उनके निधन की पुष्टि की। पंकज धीर का अंतिम संस्कार विले पार्ले (मुंबई) में शाम 4:30 बजे किया गया। बॉलीवुड और टीवी जगत में शोक की लहर — पंकज धीर नहीं रहे ‘महाभारत’ में कर्ण का किरदार निभाकर घर-घर पहचान बनाने वाले अभिनेता पंकज धीर का 15 अक्टूबर को मुंबई में निधन हो गया। वे 68 वर्ष के थे और लंबे समय से कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे। इलाज के बावजूद उनकी तबीयत में सुधार नहीं हुआ और उन्होंने अंतिम सांस ली। इस दुखद खबर ने टीवी और फिल्म इंडस्ट्री दोनों को गमगीन कर दिया है। दोस्तों और सेलेब्स ने जताया दुख पंकज धीर के दोस्त और अभिनेता फिरोज खान (जिन्होंने ‘महाभारत’ में अर्जुन का रोल निभाया था) ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर अपने मित्र के निधन की पुष्टि की। उन्होंने लिखा – “अलविदा मेरे दोस्त, हम तुम्हें हमेशा याद करेंगे।”वहीं, अभिनेता अमित बहल ने भी मीडिया से बातचीत में इस खबर की पुष्टि की। CINTAA (सिने एंड टीवी आर्टिस्ट्स एसोसिएशन) ने बयान जारी कर कहा कि “पंकज धीर इंडस्ट्री के सच्चे मार्गदर्शक और प्रेरणास्रोत थे।” पंकज धीर का करियर और योगदान पंकज धीर ने टीवी और फिल्मों दोनों में शानदार अभिनय किया। उन्होंने ‘महाभारत’, ‘चंद्रकांता’, ‘द ग्रेट मराठा’ जैसे धारावाहिकों में अहम भूमिकाएँ निभाईं। फिल्मों में उन्होंने ‘सड़क’, ‘बादशाह’, और ‘सोल्जर’ जैसी हिट फिल्मों में काम किया।हालांकि ‘महाभारत’ में उनका कर्ण का किरदार आज भी अमर है। रोचक बात यह है कि उन्होंने पहले अर्जुन की भूमिका के लिए ऑडिशन दिया था, लेकिन बाद में बीआर चोपड़ा ने उन्हें कर्ण के रूप में कास्ट किया — और वही रोल उनके करियर की पहचान बन गया। परिवार और निजी जीवन पंकज धीर अपने पीछे पत्नी अनीता धीर, बेटे निकितिन धीर, और बहू कृतिका सेंगर को छोड़ गए हैं। निकितिन भी जाने-माने एक्टर हैं और ‘चेन्नई एक्सप्रेस’ में थंगाबली की भूमिका के लिए मशहूर हैं। उन्होंने भी अपने पिता की तरह कई माइथोलॉजिकल शोज़ में काम किया है, जिनमें ‘श्रीमद रामायण’ में रावण का किरदार विशेष रूप से सराहा गया। अंतिम विदाई और श्रद्धांजलि पंकज धीर का अंतिम संस्कार विले पार्ले (मुंबई) में शाम 4:30 बजे किया गया। उनके निधन पर सोशल मीडिया पर फैंस और सेलेब्स ने श्रद्धांजलि दी। लोग लिख रहे हैं — “कर्ण चला गया, पर उसकी पहचान हमेशा जिंदा रहेगी।”फिल्म और टीवी इंडस्ट्री दोनों के लिए यह एक अपूर्णीय क्षति है। पंकज धीर news आज हर प्लेटफॉर्म पर ट्रेंड कर रही है, और उनके योगदान को याद किया जा रहा है।

उत्तर प्रदेश: योगी सरकार ने बीएड अभ्यर्थियों के लिए खोला प्राइमरी टीचिंग का रास्ता
उत्तर प्रदेश, देश

उत्तर प्रदेश: योगी सरकार ने बीएड अभ्यर्थियों के लिए खोला प्राइमरी टीचिंग का रास्ता

उत्तर प्रदेश सरकार ने दीपावली से पहले बीएड डिग्री धारकों को बड़ा तोहफा दिया है। राज्य के शिक्षा विभाग ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के पालन में Professional Development Programme for Elementary Teachers (PDPET) ब्रिज कोर्स को मंजूरी दे दी है। यह छह महीने का कोर्स NIOS द्वारा संचालित किया जाएगा, जिसकी आवेदन प्रक्रिया 1 नवंबर से शुरू होगी। इस कोर्स को पूरा करने के बाद बीएड डिग्रीधारी अब बीटीसी/डीएलएड के समकक्ष माने जाएंगे और कक्षा 1 से 5 तक पढ़ाने के पात्र होंगे। प्रशिक्षण दिसंबर 2025 से मई 2026 तक चलेगा। योगी सरकार का बड़ा फैसला: बीएड डिग्रीधारकों के लिए शुरू होगा PDEPT ब्रिज कोर्स उत्तर प्रदेश सरकार ने दीपावली से पहले बीएड डिग्रीधारकों को राहत देने वाला बड़ा निर्णय लिया है। राज्य के शिक्षा विभाग ने Professional Development Programme for Elementary Teachers (PDPET) यानी छह महीने के ब्रिज कोर्स को मंजूरी दे दी है। यह निर्णय लंबे समय से चल रहे विवाद को समाप्त करेगा और हजारों अभ्यर्थियों के लिए रोजगार के नए अवसर खोलेगा। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद तैयार हुआ ब्रिज कोर्स पिछले वर्ष सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया था कि बीएड डिग्रीधारी प्राथमिक कक्षाओं (कक्षा 1 से 5) में पढ़ाने के पात्र नहीं होंगे। केवल बीटीसी या डीएलएड धारक ही ऐसा कर सकेंगे। इस फैसले से बीएड उम्मीदवार अपात्र हो गए थे, जिससे प्रदेश में व्यापक असंतोष था। अब योगी सरकार के इस निर्णय से उन्हें फिर से पात्रता का अवसर मिलेगा। आवेदन प्रक्रिया और अवधि NIOS (नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ ओपन स्कूलिंग) इस ब्रिज कोर्स का संचालन करेगा। PDEPT कोर्स के लिए आवेदन प्रक्रिया 1 नवंबर 2025 से शुरू होगी। इच्छुक उम्मीदवार dledbr.nios.ac.in वेबसाइट पर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। छह महीने के इस ऑनलाइन कोर्स की ट्रेनिंग दिसंबर 2025 से मई 2026 तक चलेगी। क्या सिखाया जाएगा कोर्स में यह कोर्स प्राथमिक शिक्षा से संबंधित टीचिंग मैथड, कक्षा प्रबंधन, बाल मनोविज्ञान और शिक्षण कौशल पर आधारित है। इसे पूरा करने के बाद बीएड डिग्रीधारी उम्मीदवारों को बीटीसी/डीएलएड के बराबर मान्यता मिलेगी। अभ्यर्थियों में उत्साह सरकार के इस कदम से बीएड अभ्यर्थियों में खुशी की लहर है। कई वर्षों से लंबित यह मामला अब हल हो गया है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह निर्णय न केवल रोजगार के अवसर बढ़ाएगा बल्कि प्राथमिक शिक्षा की गुणवत्ता में भी सुधार लाएगा।

अदालत में जूता कांड पर अखिलेश यादव बोले : ‘भाजपाई सत्ता के अंतिम दौर में हैं’
उत्तर प्रदेश, देश

अदालत में जूता कांड पर अखिलेश यादव बोले : ‘भाजपाई सत्ता के अंतिम दौर में हैं’

देश के सर्वोच्च न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश बी.आर. गवई पर अदालत में एक वकील द्वारा जूता फेंकने की कोशिश की गई, जिससे वहां हंगामा मच गया। इस घटना पर समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, “कुछ लोगों के हाथों में जाकर तो जूता भी खुद को अपमानित महसूस करता है।” अखिलेश ने इस घटना को प्रभुत्ववादी सोच और नफरत से प्रेरित बताया। उन्होंने कहा कि पीडीए समाज अब और अपमान नहीं सहेगा। भाजपा पर निशाना साधते हुए बोले, “भाजपाई सत्ता के अंतिम दौर में हैं, क्योंकि उनकी भ्रष्ट चुनावी साज़िश बेनकाब हो चुकी है।” अदालत में हंगामा: CJI बी.आर. गवई पर वकील ने फेंका जूता देश की न्यायपालिका में एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है। सर्वोच्च न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश बी.आर. गवई पर एक वकील ने कथित तौर पर जूता फेंकने की कोशिश की। अदालत में हुए इस घटनाक्रम से वहां मौजूद लोग हैरान रह गए और कुछ देर तक अफरा-तफरी का माहौल बना रहा। अन्य वकीलों ने इस कृत्य की पुष्टि करते हुए इसे निंदनीय बताया है। अखिलेश यादव की प्रतिक्रिया – “जूता भी अपमानित महसूस करता है” इस घटना पर समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने ट्वीट कर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, “कुछ लोगों के हाथों में जाकर तो जूता भी खुद को अपमानित महसूस करता है।”अखिलेश ने इसे पीडीए समाज (पीड़ित, दुखी, अपमानित) के अपमान से जोड़ा और कहा कि प्रभुत्ववादी सोच नफरत को जन्म देती है, जो देश के सर्वोच्च न्यायिक पद से लेकर समाज के सबसे कमजोर व्यक्ति तक फैली है। “पीडीए अब और नहीं सहेगा” – सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने आगे कहा कि पीडीए समाज की उदारता 5000 सालों से ऐसे लोगों को माफ करती आई है, लेकिन अब यह अपमान और नहीं सहेगा। उन्होंने भाजपा पर सीधा हमला करते हुए लिखा कि “भाजपा और उसके सहयोगी सत्ता के अंतिम दौर में हैं क्योंकि उनकी भ्रष्ट चुनावी साजिश उजागर हो चुकी है।” “90% जनता जाग चुकी है” – अखिलेश का दावा उन्होंने कहा कि जब देश की 90% आबादी अपने हक और अधिकारों के लिए जाग चुकी है, तब 10% का गुरूर अब नहीं टिकेगा।अखिलेश ने इसे “अपमान बनाम सम्मान” का संघर्ष बताया और विश्वास जताया कि पीडीए अपने स्वाभिमान की यह निर्णायक लड़ाई जीतकर रहेगा।

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