यूपी में शीतलहर के बीच स्कूलों की छुट्टियां बढ़ीं, सरकार का हुआ आदेश
उत्तर प्रदेश

यूपी में शीतलहर के बीच स्कूलों की छुट्टियां बढ़ीं, सरकार का हुआ आदेश

उत्तर प्रदेश में भीषण शीतलहर और घने कोहरे के बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राज्यभर के स्कूलों को लेकर निर्देश जारी किए हैं। आदेश के अनुसार, सभी बोर्डों के कक्षा 9 से 12 तक के विद्यालय 5 जनवरी 2026 तक बंद रहेंगे। छोटे बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए बेसिक शिक्षा विभाग ने नर्सरी से कक्षा 8 तक की छुट्टियां बढ़ाई हैं। निर्णय से ठंड के मौजूदा हालात में छात्रों के स्वास्थ्य पर पड़ने वाले जोखिम को कम करने की कोशिश की गई है। भीषण शीतलहर में स्कूलों पर सरकार का फैसला उत्तर प्रदेश में लगातार बढ़ती ठंड और घने कोहरे के कारण जनजीवन प्रभावित है। इन्हीं हालातों के बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने छात्रों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए स्कूलों की छुट्टियां बढ़ाने के निर्देश जारी किए। 9वीं से 12वीं तक 5 जनवरी तक अवकाश राज्य सरकार के आदेश के अनुसार, सीबीएसई, आईसीएसई और यूपी बोर्ड सहित सभी बोर्डों के कक्षा 9 से 12 तक के विद्यालय 5 जनवरी 2026 तक बंद रहेंगे। यह निर्णय प्रदेशभर के सरकारी और निजी दोनों स्कूलों पर लागू होगा। नर्सरी से कक्षा 8 तक लंबी राहत बेसिक शिक्षा विभाग ने छोटे बच्चों के लिए छुट्टियों का दायरा और बढ़ाया है। विभागीय कैलेंडर के अनुसार नर्सरी से कक्षा 8 तक के सभी स्कूल 14 जनवरी 2026 तक बंद रहेंगे, ताकि ठंड के दौरान बच्चों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर न पड़े। आदेश का सख्त पालन अनिवार्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि निर्देशों का उल्लंघन करने वाले स्कूलों के खिलाफ नियमों के तहत कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन स्तर पर स्थिति पर नजर रखी जा रही है और मौसम के हालात के अनुसार आगे के निर्णय लिए जा सकते हैं।

ईरान में आर्थिक संकट पर भड़का जनआंदोलन, हालात लगातार तनावपूर्ण
देश

ईरान में आर्थिक संकट पर भड़का जनआंदोलन, हालात लगातार तनावपूर्ण

ईरान में आर्थिक संकट के बीच शुरू हुआ जनआक्रोश अब सत्ता और सड़कों के सीधे टकराव में बदलता दिख रहा है। लगातार छठे दिन जारी प्रदर्शनों ने देश के कई हिस्सों में सामान्य जनजीवन को प्रभावित किया है, जबकि सुरक्षा बलों के साथ झड़पों की घटनाएं सामने आई हैं। बाजार बंद होने से शुरू हुआ यह आंदोलन अब दर्जनों शहरों और प्रांतों तक फैल चुका है। कमजोर होती मुद्रा, बढ़ती महंगाई और बेरोज़गारी ने लोगों की नाराज़गी को हवा दी है। स्थिति तब और संवेदनशील हो गई जब शीर्ष नेतृत्व ने प्रदर्शनकारियों के प्रति सख्त रुख के संकेत दिए और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इस संकट पर प्रतिक्रियाएं आने लगीं। आर्थिक संकट से भड़का जनआक्रोश ईरान में मौजूदा विरोध प्रदर्शनों की जड़ देश की कमजोर अर्थव्यवस्था मानी जा रही है। रियाल के तेज़ी से गिरते मूल्य ने आम नागरिकों की क्रयशक्ति को प्रभावित किया है। कई शहरों में कारोबारियों ने बाजार बंद कर विरोध दर्ज कराया, जिसके बाद आंदोलन ने व्यापक रूप ले लिया। कई शहरों में झड़पें और गिरफ्तारियां प्रदर्शन अब दर्जनों शहरों तक फैल चुके हैं। कुछ इलाकों में हिंसक झड़पों, तोड़फोड़ और बल प्रयोग की खबरें हैं। मानवाधिकार संगठनों और स्थानीय एजेंसियों के अनुसार, अब तक कई लोगों की मौत हुई है और बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी हिरासत में लिए गए हैं। मृतकों की संख्या को लेकर अलग-अलग आंकड़े सामने आ रहे हैं। शीर्ष नेतृत्व का सख्त संदेश देश के सर्वोच्च नेता ने सार्वजनिक रूप से कहा है कि अधिकारियों को शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों से संवाद करना चाहिए, लेकिन हिंसा करने वालों के खिलाफ सख्ती जरूरी है। इस बयान को सुरक्षा एजेंसियों को अधिक कठोर कदम उठाने की छूट के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रियाएं तेज ईरान की स्थिति पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी प्रतिक्रिया हुई है। अमेरिका से चेतावनी भरे बयान सामने आए हैं, जिनमें प्रदर्शनकारियों को निशाना बनाए जाने पर दखल की बात कही गई है। वहीं, ईरान के पूर्व शाही परिवार से जुड़े लोगों ने भी आंदोलन के समर्थन में बयान दिए हैं। आगे क्या? विशेषज्ञों का मानना है कि अगर आर्थिक हालात में तत्काल सुधार के संकेत नहीं मिले और संवाद की प्रक्रिया ठोस रूप नहीं ले पाई, तो यह संकट और गहराने की आशंका है। आने वाले दिनों में सरकार का रुख और सुरक्षा बलों की रणनीति तय करेगी कि हालात शांत होते हैं या टकराव और बढ़ता है।

यूपी शीतकालीन अवकाश 31 दिसंबर से, छात्रों को ठंड में मिलेंगी बड़ी राहत
उत्तर प्रदेश

यूपी शीतकालीन अवकाश 31 दिसंबर से, छात्रों को ठंड में मिलेंगी बड़ी राहत

उत्तर प्रदेश में शीतलहर के कारण बेसिक शिक्षा विभाग ने परिषदीय विद्यालयों के लिए 15 दिनों के शीतकालीन अवकाश की तैयारी की है। कक्षा एक से आठ तक के सभी स्कूल 31 दिसंबर 2025 से 14 जनवरी 2026 तक बंद रहेंगे और 15 जनवरी को खुलेंगे। शिक्षकों को निर्देश है कि वे 30 दिसंबर तक डीबीटी सत्यापन, आधार ऑथेंटिकेशन और अन्य प्रशासनिक कार्य पूरे कर रिपोर्ट दें। घने कोहरे और गिरते तापमान के बीच शिक्षक संगठनों ने 29 और 30 दिसंबर को भी स्थानीय अवकाश की मांग की है, ताकि छोटे बच्चों को ठंड से राहत मिल सके। यूपी में शीतकालीन अवकाश की तैयारी, बच्चों को मिलेगी ठंड से राहत उत्तर प्रदेश में लगातार गिरते तापमान और शीतलहर के बीच बेसिक शिक्षा विभाग ने परिषदीय विद्यालयों के लिए शीतकालीन अवकाश की प्रक्रिया तेज कर दी है। विभागीय तैयारी के अनुसार कक्षा 1 से 8 तक के सभी स्कूल 31 दिसंबर 2025 से 14 जनवरी 2026 तक बंद रहेंगे। इस फैसले से प्रदेश के लाखों बच्चों और उनके अभिभावकों को राहत मिलने की उम्मीद है। 15 जनवरी से दोबारा खुलेंगे स्कूल विभागीय कैलेंडर के मुताबिक मकर संक्रांति तक छुट्टियां रहेंगी और 15 जनवरी 2026 से स्कूल अपने निर्धारित समय पर दोबारा खुलेंगे। अधिकारियों का कहना है कि ठंड के मौजूदा हालात को देखते हुए बच्चों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। शिक्षकों को 30 दिसंबर तक सभी काम निपटाने के निर्देश छुट्टियों से पहले शिक्षकों को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि वे 30 दिसंबर तक अपने सभी लंबित विभागीय कार्य पूरे करें। इसमें डीबीटी के जरिए बच्चों के खातों में भेजी जाने वाली धनराशि का सत्यापन, आधार ऑथेंटिकेशन और जरूरी प्रशासनिक रिपोर्ट शामिल हैं। सभी शिक्षकों को यह रिपोर्ट अपने संबंधित खंड शिक्षा अधिकारी को सौंपनी होगी। शीतलहर के बीच जल्द अवकाश की मांग प्रदेश के कई जिलों में घना कोहरा और तेज ठंड पड़ रही है। ऐसे में शिक्षक संगठनों ने मांग उठाई है कि 29 और 30 दिसंबर को भी स्थानीय स्तर पर अवकाश घोषित किया जाए। उनका कहना है कि छोटे बच्चों को सुबह-शाम स्कूल आने में परेशानी हो रही है और ठंड से स्वास्थ्य पर असर पड़ सकता है। स्कूल परिसरों की सुरक्षा भी अहम विभाग ने साफ किया है कि छुट्टियों के दौरान स्कूल परिसर बंद रहेंगे। इसलिए 30 दिसंबर की शाम तक सभी जरूरी दस्तावेजी और सुरक्षा संबंधी व्यवस्थाएं पूरी कर ली जाएं, ताकि अवकाश के दौरान किसी तरह की दिक्कत न हो। क्यों अहम है यह फैसला उत्तर प्रदेश में परिषदीय स्कूलों में पढ़ने वाले अधिकांश छात्र ग्रामीण और दूरदराज इलाकों से आते हैं। ठंड और कोहरे में सफर करना उनके लिए जोखिम भरा होता है। ऐसे में समय पर शीतकालीन अवकाश का फैसला बच्चों की सेहत और उपस्थिति दोनों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आगे क्या अब नजर इस बात पर है कि जिलों के बेसिक शिक्षा अधिकारी स्थानीय मौसम को देखते हुए 29 और 30 दिसंबर को लेकर क्या निर्णय लेते हैं। फिलहाल विभागीय कैलेंडर के अनुसार 31 दिसंबर से अवकाश तय है, लेकिन हालात बिगड़ने पर स्थानीय आदेश से बदलाव संभव है।

यूपी पुलिस को मिला यक्ष ऐप, अपराध पर तकनीक से होगा कड़ा प्रहार
उत्तर प्रदेश

यूपी पुलिस को मिला यक्ष ऐप, अपराध पर तकनीक से होगा कड़ा प्रहार

लखनऊ में शनिवार को हुए वरिष्ठ पुलिस अधिकारी सम्मेलन से उत्तर प्रदेश की पुलिसिंग को नई तकनीकी ताकत मिली, जब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अत्याधुनिक यक्ष ऐप का शुभारंभ किया। एआई और बिग डेटा पर आधारित यह प्लेटफॉर्म अपराध नियंत्रण, त्वरित कार्रवाई और बीट पुलिसिंग को स्मार्ट बनाने का लक्ष्य रखता है। ऐप के जरिए माफिया, हिस्ट्रीशीटर और गैंग नेटवर्क की जानकारी एक क्लिक में मिलेगी। संवेदनशील इलाकों का डेटा, रियल टाइम अलर्ट और फेस रिकग्निशन जैसे फीचर फील्ड में तैनात पुलिस को पहले से सतर्क करेंगे। सरकार का दावा है कि इससे रिस्पॉन्स टाइम घटेगा और व्यवस्था मजबूत होगी। लखनऊ से नई शुरुआत: पुलिसिंग को मिला डिजिटल हथियार उत्तर प्रदेश की पुलिस व्यवस्था ने शनिवार को एक बड़ा तकनीकी कदम आगे बढ़ाया। लखनऊ में आयोजित वरिष्ठ पुलिस अधिकारी सम्मेलन के मंच से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ‘यक्ष (YAKSH) ऐप’ का औपचारिक शुभारंभ किया। एआई और बिग डेटा पर आधारित यह प्लेटफॉर्म अपराध नियंत्रण को तेज, सटीक और समन्वित बनाने के उद्देश्य से तैयार किया गया है। क्या है यक्ष ऐप और क्यों है अहम यक्ष ऐप को पुलिस के लिए एक एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म के रूप में विकसित किया गया है, जहां माफिया, हिस्ट्रीशीटर, गैंग और संगठित अपराध नेटवर्क से जुड़ी जानकारियां एक क्लिक में उपलब्ध होंगी। मुख्यमंत्री ने इसे अपराधियों के खिलाफ “निरंतर तैयारी का डिजिटल हथियार” बताते हुए कहा कि यह पुलिस के काम करने के तरीके को नई दिशा देगा। संवेदनशील इलाकों पर रहेगी पहले से नजर ऐप में प्रदेश के संवेदनशील क्षेत्रों का डेटा पहले से फीड किया गया है। ऐसे इलाके जहां पत्थरबाजी, सामूहिक हिंसा या अन्य आपराधिक घटनाओं की आशंका रहती है, वहां से जुड़े अलर्ट पुलिस तक तुरंत पहुंचेंगे। इससे मौके पर तैनाती और कार्रवाई पहले से संभव हो सकेगी। AI फीचर्स से तेज और सटीक कार्रवाई यक्ष ऐप में रियल टाइम अलर्ट, AI आधारित फेस रिकग्निशन, वॉइस सर्च, CrimeGPT और गैंग एनालिसिस जैसे फीचर्स शामिल हैं। इनकी मदद से किसी संदिग्ध की पहचान, उसके नेटवर्क और गतिविधियों का त्वरित विश्लेषण किया जा सकेगा, जिससे फील्ड में निर्णय लेने की प्रक्रिया तेज होगी। बीट पुलिसिंग को मिलेगा नया आधार सम्मेलन में डिजिटल बीट-बुक और यक्ष ऐप के उपयोग पर प्रस्तुतीकरण भी दिया गया। इसमें बताया गया कि कैसे यह प्लेटफॉर्म बीट कर्मियों के दैनिक काम को सरल, व्यवस्थित और प्रभावी बनाएगा। जमीनी स्तर पर तैनात पुलिसकर्मियों को अब सूचनाओं के लिए अलग-अलग स्रोतों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। रिस्पॉन्स टाइम घटाने पर फोकस मुख्यमंत्री ने कहा कि यक्ष ऐप से पुलिस का रिस्पॉन्स टाइम कम होगा और अपराध पर निगरानी मजबूत बनेगी। तेज सूचना और विश्लेषण के जरिए घटनास्थल तक पहुंच और कार्रवाई में देरी घटेगी, जिसका सीधा असर आम लोगों की सुरक्षा पर पड़ेगा। जनता के लिए क्या बदलेगा इस तकनीकी पहल का मकसद सिर्फ पुलिसिंग को आधुनिक बनाना नहीं, बल्कि आम नागरिकों को सुरक्षित माहौल देना है। बेहतर निगरानी और तेज कार्रवाई से अपराधियों पर दबाव बढ़ेगा और भरोसा मजबूत होगा कि पुलिस किसी भी स्थिति से निपटने के लिए तैयार है। आगे क्या सरकार का संकेत है कि आने वाले समय में यक्ष ऐप को और मॉड्यूल्स से जोड़ा जाएगा, ताकि डेटा अपडेट, ट्रेनिंग और इंटर-डिपार्टमेंट समन्वय भी इसी प्लेटफॉर्म पर हो सके। यह पहल प्रदेश में स्मार्ट और टेक्नोलॉजी-ड्रिवन पुलिसिंग की दिशा में नई आधारशिला मानी जा रही है।

अरावली पहाड़ी की नई परिभाषा क्यों बनी विवाद की वजह ?
देश

अरावली पहाड़ी की नई परिभाषा क्यों बनी विवाद की वजह ?

सुप्रीम कोर्ट की नई परिभाषा पर aravali hills news: देशभर में बहस तेज सुप्रीम कोर्ट ने अरावली पहाड़ियों के लिए एक समान परिभाषा को मंजूरी देते हुए स्पष्ट किया है कि आसपास की जमीन से 100 मीटर या उससे अधिक ऊंची भू-आकृति ही अरावली पहाड़ी मानी जाएगी। साथ ही, 500 मीटर के दायरे में मौजूद दो या अधिक पहाड़ियां मिलकर अरावली रेंज कहलाएंगी। यह परिभाषा केंद्र सरकार की समिति की सिफारिशों पर आधारित है। क्या बदला है नई परिभाषा में अदालत के फैसले के बाद पहली बार पूरे क्षेत्र में एक वस्तुनिष्ठ मानक लागू होगा। सरकार का कहना है कि इससे नियमों में एकरूपता आएगी और खनन नियंत्रण मजबूत होगा। पर्यावरण मंत्रालय ने साफ किया है कि संरक्षित वन, पर्यावरण संवेदनशील क्षेत्र और आर्द्रभूमि जैसे ‘अभेद्य’ इलाकों में खनन पर पूरी तरह रोक रहेगी। पर्यावरणविदों की चिंता: संरक्षण से बाहर होंगी छोटी पहाड़ियां पर्यावरण विशेषज्ञों का तर्क है कि ऊंचाई आधारित मानक से कई छोटी, झाड़ियों से ढंकी पहाड़ियां संरक्षण से बाहर हो सकती हैं, जो पारिस्थितिकी के लिए जरूरी हैं। उनका कहना है कि अरावली सिर्फ चट्टानों की ऊंचाई नहीं, बल्कि भूजल रीचार्ज, जैव विविधता और जलवायु संतुलन की रीढ़ है। सरकार का पक्ष: सुरक्षा घटेगी नहीं, नियम होंगे सख्त केंद्र सरकार ने आशंकाओं को खारिज करते हुए कहा है कि नई व्यवस्था का उद्देश्य सुरक्षा कम करना नहीं, बल्कि वैज्ञानिक और स्पष्ट परिभाषा के साथ निगरानी को मजबूत करना है। पर्यावरण मंत्री ने बताया कि लगभग 1.47 लाख वर्ग किलोमीटर में फैली अरावली शृंखला का केवल सीमित हिस्सा ही सख्त अध्ययन और अनुमति के बाद किसी गतिविधि के लिए खुल सकता है। विपक्ष और जनआंदोलन की प्रतिक्रिया विपक्षी दलों ने फैसले पर चिंता जताते हुए इसे पर्यावरण के लिए जोखिम बताया है। कई राज्यों में प्रदर्शन शुरू हो गए हैं और #SaveAravalli अभियान फिर तेज हो गया है। राजनीतिक नेताओं ने अरावली को दिल्ली-एनसीआर और उत्तर भारत की जीवनरेखा बताते हुए व्यापक संरक्षण की मांग की है। अरावली का महत्व: थार से लेकर दिल्ली तक प्रभाव अरावली भारत की सबसे प्राचीन पर्वत शृंखलाओं में से एक है, जो थार रेगिस्तान के फैलाव को रोकने, धूल के कणों को बाधित करने और उत्तर भारत की जलवायु को संतुलित रखने में अहम भूमिका निभाती है। विशेषज्ञों के अनुसार aravali hills और aravali hills news से जुड़ी यह बहस सिर्फ राजस्थान, हरियाणा या दिल्ली तक सीमित नहीं, बल्कि पूरे उत्तर भारत के पर्यावरण संतुलन से जुड़ी है। आगे क्या: कानूनी और नीतिगत राह प्रदर्शन कर रहे समूहों ने अदालत में कानूनी विकल्प तलाशने के संकेत दिए हैं। वहीं सरकार का कहना है कि किसी भी नए खनन पट्टे पर मौजूदा कानूनों के तहत कड़ी जांच होगी। आने वाले दिनों में यह तय होगा कि नई परिभाषा संरक्षण और विकास के बीच संतुलन कैसे बनाती है। aravali hills news पर देश की नजर बनी हुई है।

MGNREGA का नया नाम लागू, ग्रामीण रोजगार में 125 दिन की गारंटी
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MGNREGA का नया नाम लागू, ग्रामीण रोजगार में 125 दिन की गारंटी

MGNREGA का नया नाम: राष्ट्रपति की मंजूरी से लागू हुआ VB-G-RAM-G कानून ग्रामीण रोजगार व्यवस्था में बड़ा बदलाव करते हुए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने रविवार को ‘विकसित भारत–रोजगार और आजीविका गारंटी मिशन (ग्रामीण) विधेयक, 2025’ को मंजूरी दे दी। इसके साथ ही दो दशक से लागू महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम की जगह अब MGNREGA का नया नाम औपचारिक रूप से कानून बन गया है। नया अधिनियम VB-G-RAM-G के नाम से जाना जाएगा और इसे विकसित भारत 2047 के लक्ष्य से जोड़ा गया है। 125 दिन की वैधानिक रोजगार गारंटी VB-G-RAM-G कानून के तहत ग्रामीण परिवारों को प्रति वित्तीय वर्ष 125 दिन का मजदूरी रोजगार देने की वैधानिक गारंटी होगी, जो पहले के 100 दिनों से 25 दिन अधिक है। सरकार का कहना है कि इससे आय सुरक्षा मजबूत होगी और ग्रामीण श्रमिकों को अधिक निरंतर काम मिलेगा। मजदूरी भुगतान में सख्ती, देरी पर मुआवजा नए कानून में मजदूरी भुगतान को साप्ताहिक आधार पर या किसी भी स्थिति में कार्य समाप्ति के अधिकतम 15 दिनों के भीतर अनिवार्य किया गया है। देरी होने पर श्रमिकों को मुआवजा देने का प्रावधान रखा गया है, ताकि भुगतान में पारदर्शिता और भरोसा बढ़े। चार प्राथमिक क्षेत्र तय अधिनियम के तहत होने वाले कार्यों को चार प्रमुख क्षेत्रों तक केंद्रित किया गया है — जल सुरक्षा और जल से जुड़े कार्य, मुख्य ग्रामीण अवसंरचना, आजीविका से संबंधित अवसंरचना और प्रतिकूल मौसमी घटनाओं से निपटने वाले उपाय। सरकार का मानना है कि इससे रोजगार के साथ टिकाऊ परिसंपत्तियों का निर्माण होगा। कृषि सीजन में 60 दिन की विराम अवधि कृषि बुवाई और कटाई के चरम समय में श्रम उपलब्धता बनाए रखने के लिए राज्यों को एक वित्तीय वर्ष में 60 दिनों की विराम अवधि अधिसूचित करने का अधिकार दिया गया है, जिससे किसान और कृषि मजदूर दोनों को संतुलन मिल सके। पंचायतों की भूमिका और ग्रामीणों की सहमति काम तय करने का अधिकार पंचायतों को दिया गया है। ग्राम सभाओं के माध्यम से गांव की जरूरत के अनुसार कार्यों का चयन होगा, जिससे स्थानीय प्राथमिकताओं को सीधे योजना से जोड़ा जा सके। वित्तीय ढांचा: केंद्र–राज्य साझेदारी वित्तीय व्यवस्था के तहत केंद्र और राज्यों के बीच 60:40 का अनुपात तय किया गया है, जबकि पूर्वोत्तर और हिमालयी राज्यों के लिए यह 90:10 रहेगा। प्रशासनिक व्यय की सीमा बढ़ाकर 9 प्रतिशत कर दी गई है। संसद में विरोध, सरकार का जवाब यह विधेयक शीतकालीन सत्र में विपक्ष के भारी विरोध के बीच पारित हुआ था। विपक्ष ने महात्मा गांधी के नाम हटाने और राज्यों पर संभावित वित्तीय बोझ को लेकर सवाल उठाए। सरकार ने स्पष्ट किया है कि MGNREGA का नया नाम रोजगार के अधिकार को कमजोर नहीं, बल्कि अधिक उत्पादक और विकासोन्मुख बनाएगा। क्यों महत्वपूर्ण है यह बदलाव ग्रामीण भारत में काम की निरंतरता, समय पर भुगतान और परिसंपत्ति निर्माण लंबे समय से प्रमुख चुनौतियां रही हैं। VB-G-RAM-G के जरिए सरकार इन मोर्चों पर व्यवस्था मजबूत करने का दावा कर रही है, जिससे पलायन घटाने और स्थानीय अर्थव्यवस्था को गति मिलने की उम्मीद है। आगे क्या राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद केंद्र सरकार अधिनियम को अधिसूचित करेगी और राज्यों के साथ मिलकर नए दिशा-निर्देश जारी होंगे। आने वाले महीनों में VB-G-RAM-G के तहत पहली परियोजनाएं जमीन पर उतरेंगी, जो MGNREGA का नया नाम बनकर ग्रामीण रोजगार की नई दिशा तय करेंगी।

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रणवीर सिंह की धुरंधर ने बदला 2025 का बॉक्स ऑफिस खेल

कड़कती ठंड के बीच सिनेमाघरों में उमड़ी भीड़ ने साबित कर दिया है कि रणवीर सिंह की धुरंधर इस वक्त देश की सबसे बड़ी फिल्म बन चुकी है। 5 दिसंबर को रिलीज हुई आदित्य धर निर्देशित यह फिल्म तीसरे शनिवार को रिकॉर्ड तोड़ कमाई के साथ चर्चा में है। 16 दिनों में 535 करोड़ से ज्यादा नेट कलेक्शन कर फिल्म ने कई ऐतिहासिक आंकड़े पार किए। कहानी सच्ची घटनाओं से प्रेरित है और दमदार स्टारकास्ट दर्शकों को खींच रही है। बढ़ते शो और हाउसफुल बोर्ड बॉक्स ऑफिस पर धुरंधर की पकड़ दिखाते हैं। आने वाले दिन और बड़े संकेत देंगे कड़ाके की ठंड में भी सिनेमाघरों में गर्मी दिसंबर की सर्द रातों में भी सिनेमाघरों के बाहर लगी कतारें साफ बता रही हैं कि ‘धुरंधर’ दर्शकों की पहली पसंद बन चुकी है। रिलीज के तीसरे वीकेंड में फिल्म ने जिस तरह से रफ्तार पकड़ी, उसने इस साल के बॉक्स ऑफिस ट्रेंड को ही बदल दिया। 5 दिसंबर रिलीज, 16 दिन में ऐतिहासिक कमाई आदित्य धर के निर्देशन में बनी इस फिल्म ने महज 15 दिनों में 500 करोड़ का आंकड़ा पार कर लिया। 16वें दिन तक भारत में इसका नेट कलेक्शन 535 करोड़ से ऊपर पहुंच चुका है, जो इसे सबसे तेज 500 करोड़ कमाने वाली फिल्मों में शामिल करता है। तीसरे शनिवार को 33 करोड़, टूटा पुराना रिकॉर्ड ट्रेड अनुमानों के मुताबिक तीसरे शनिवार को करीब 33 करोड़ की कमाई हुई, जो किसी भी हिंदी फिल्म के लिए इस दिन का अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा माना जा रहा है। इससे पहले यह रिकॉर्ड 22 करोड़ के आसपास था, जिसे ‘धुरंधर’ ने बड़े अंतर से पीछे छोड़ दिया। स्टारकास्ट और कहानी बनी बड़ी ताकत फिल्म की कहानी सच्ची घटनाओं से प्रेरित बताई जा रही है। रणवीर सिंह के साथ अक्षय खन्ना, आर माधवन, संजय दत्त, अर्जुन रामपाल और सारा अर्जुन जैसे कलाकारों की मौजूदगी ने फिल्म को मजबूत आधार दिया है। दमदार अभिनय और बड़े स्केल का ट्रीटमेंट दर्शकों को सिनेमाघरों तक खींच रहा है। वर्ल्डवाइड कारोबार ने बढ़ाया दबदबा भारत के साथ-साथ विदेशों में भी फिल्म को शानदार रिस्पॉन्स मिल रहा है। वर्ल्डवाइड कलेक्शन करीब 805 करोड़ रुपये के आसपास पहुंचने का अनुमान है, जिससे यह साल 2025 की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्मों में शामिल हो चुकी है। छुट्टियों में और उछाल की उम्मीद क्रिसमस और न्यू ईयर की छुट्टियों को देखते हुए ट्रेड से जुड़े जानकार मान रहे हैं कि फिल्म की कमाई में अभी और तेजी आ सकती है। नौकरीपेशा दर्शकों की छुट्टियां और फेस्टिव माहौल ‘धुरंधर’ के लिए बड़ा सहारा बन सकता है। आगे क्या, 600 से 800 करोड़ तक नजरें मौजूदा रुझान को देखते हुए अनुमान है कि आने वाले दिनों में फिल्म 600 करोड़ का आंकड़ा पार कर सकती है। अगर यही रफ्तार बनी रही तो 700 और यहां तक कि 800 करोड़ क्लब में पहुंचने की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता। क्यों मायने रखती है ‘धुरंधर’ की सफलता ‘धुरंधर’ की कामयाबी सिर्फ एक फिल्म की जीत नहीं है, बल्कि यह दिखाती है कि मजबूत कंटेंट, बड़े कलाकार और दर्शकों का भरोसा मिलकर बॉक्स ऑफिस पर नया इतिहास रच सकते हैं। यह आने वाली फिल्मों के लिए भी उम्मीद की नई लकीर खींच रही है।

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