BMW–TVS साझेदारी का जिक्र, भारत की इंजीनियरिंग पर क्या कहा राहुल गांधी ने ?
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BMW–TVS साझेदारी का जिक्र, भारत की इंजीनियरिंग पर क्या कहा राहुल गांधी ने ?

लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी Germany दौरे पर म्यूनिख पहुंचे, जहां उन्होंने BMW वेल्ट और प्लांट का निरीक्षण किया। राहुल गांधी ने कहा कि मजबूत अर्थव्यवस्थाओं की रीढ़ मैन्युफैक्चरिंग है और भारत में इसके सुदृढ़ीकरण की जरूरत है। उन्होंने BMW–TVS साझेदारी से बनी 450 सीसी मोटरसाइकिल को भारतीय इंजीनियरिंग का उदाहरण बताया। जर्मनी में राहुल गांधी BMW गतिविधियों पर प्रतिक्रिया देते हुए भाजपा ने आपत्ति जताई। भाजपा सांसद संबित पात्रा ने कहा कि संसद सत्र के दौरान विदेश यात्रा और टिप्पणियों में जिम्मेदारी अपेक्षित है। Rahul Gandhi Germany दौरा: म्यूनिख में BMW प्लांट और विनिर्माण पर संदेश कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी Germany यात्रा के दौरान म्यूनिख स्थित BMW वेल्ट और BMW प्लांट पहुंचे। दौरे का उद्देश्य वैश्विक विनिर्माण मॉडल को समझना और भारत की औद्योगिक दिशा पर सार्वजनिक विमर्श रखना रहा। BMW संयंत्र में भारतीय साझेदारी का उल्लेख राहुल गांधी ने BMW–TVS साझेदारी से विकसित 450 सीसी मोटरसाइकिल को भारतीय इंजीनियरिंग की क्षमता का उदाहरण बताया। उन्होंने BMW वेल्ट में विश्वस्तरीय मैन्युफैक्चरिंग प्रक्रियाओं को देखा और उत्पादन-आधारित विकास पर जोर दिया। Rahul Gandhi BMW संदर्भ में यह संदेश रोजगार सृजन और गुणवत्ता उत्पादन से जोड़ा गया। विनिर्माण, रोजगार और नीति पर फोकस राहुल गांधी ने कहा कि मजबूत अर्थव्यवस्थाओं की बुनियाद मैन्युफैक्चरिंग होती है। विकास की रफ्तार बढ़ाने के लिए व्यापक मैन्युफैक्चरिंग ईकोसिस्टम और बड़े पैमाने पर गुणवत्तापूर्ण नौकरियां जरूरी हैं। इस संदर्भ में Rahul Gandhi Germany दौरा नीति बहस को फिर सक्रिय करता है। भाजपा की प्रतिक्रिया और संसदीय संदर्भ भाजपा सांसद संबित पात्रा ने संसद सत्र के दौरान विदेश यात्रा और बयानों में जिम्मेदारी का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि विपक्ष के नेता की भूमिका विशेष सावधानी की अपेक्षा करती है। राहुल गांधी की बार-बार विदेश यात्राएं और विदेशी धरती से भारत का अपमान करना यह दिखाता है कि राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी के मन में भारत के लिए क्या भावनाएं हैं।राहुल और ज़िम्मेदारी कभी साथ नहीं चल सकते। जब भी वह विदेश जाते हैं, वह संसद और भारत का अपमान करते हैं। क्यों अहम है यह खबर यह यात्रा भारत के विनिर्माण, वैश्विक साझेदारियों और रोजगार नीति पर सार्वजनिक चर्चा को तेज करती है। Rahul Gandhi Germany दौरा उद्योग, नीति और राजनीतिक जिम्मेदारी—तीनों आयामों पर असर डालता है।

ठंड और कोहरे में योगी आदित्यनाथ एक्शन मोड में, फील्ड में उतरा प्रशासन
उत्तर प्रदेश

ठंड और कोहरे में योगी आदित्यनाथ एक्शन मोड में, फील्ड में उतरा प्रशासन

उत्तर प्रदेश में घने कोहरे और कड़ाके की ठंड के बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रशासन को अलर्ट मोड में रखा है। समीक्षा बैठक में सीएम ने मंडलायुक्तों, जिलाधिकारियों, पुलिस और नगर निकायों को निर्देश दिया कि कोई भी व्यक्ति खुले में सोता न मिले। निराश्रितों को रैन बसेरों तक पहुंचाकर हीटर, अलाव और कंबल की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। सड़कों, हाईवे और एक्सप्रेस-वे पर प्रकाश, रिफ्लेक्टर, पेट्रोलिंग, क्रेन और एंबुलेंस 24 घंटे उपलब्ध रहें। घने कोहरे में ओवरस्पीडिंग पर सख्त कार्रवाई, ब्लैक स्पॉट पर तैनाती और सुरक्षित यात्रा गाइडलाइन के पालन के निर्देश दिए गए। ठंड और कोहरे को लेकर योगी आदित्यनाथ का सख्त प्रशासनिक अलर्ट प्रदेश में शीतलहर और घने कोहरे के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शासन-प्रशासन को पूरी तरह सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं। स्पष्ट किया गया है कि जनसुरक्षा, यातायात और निराश्रितों की देखभाल में किसी भी स्तर की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। खुले में सोने पर रोक, रैन बसेरों की नियमित निगरानी सीएम योगी ने निर्देश दिया कि प्रदेश में कोई भी व्यक्ति खुले में सोता न मिले। निराश्रितों और जरूरतमंदों को चिन्हित कर उन्हें रैन बसेरों तक पहुंचाया जाए। सभी रैन बसेरों में हीटर, अलाव और कंबल की पर्याप्त व्यवस्था के साथ नियमित निरीक्षण सुनिश्चित करने को कहा गया है। लापरवाही मिलने पर कड़ी कार्रवाई तय की गई है। सड़कों और एक्सप्रेस-वे पर सुरक्षा व्यवस्था सख्त मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हाईवे और एक्सप्रेस-वे पर यातायात सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के निर्देश दिए। सभी डार्क स्पॉट चिन्हित कर वहां अतिरिक्त प्रकाश, रिफ्लेक्टर और चेतावनी संकेत लगाए जाएंगे। एक्सप्रेस-वे पर पेट्रोलिंग बढ़ाने, हर ब्लैक स्पॉट पर टीम तैनात करने और 24×7 क्रेन व एंबुलेंस उपलब्ध रखने को कहा गया है। ओवरस्पीडिंग पर कार्रवाई, ट्रैफिक प्रबंधन मजबूत घने कोहरे में ओवरस्पीडिंग को दुर्घटनाओं का बड़ा कारण बताते हुए सीएम ने सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। टोल प्लाजा पर लाउडस्पीकर से चालकों को कोहरे की स्थिति की जानकारी देने और खराब विजिबिलिटी में ट्रैफिक प्रबंधन सुनिश्चित करने को कहा गया है। गोशालाओं और गोवंश सुरक्षा पर भी निर्देश ठंड के असर को देखते हुए गोशालाओं में गोवंश को सुरक्षित रखने के लिए अलाव और आवश्यक इंतजाम सुनिश्चित करने के निर्देश भी जारी किए गए हैं। जनता के लिए सुरक्षित यात्रा की अपील सरकार ने वाहन चालकों से अपील की है कि कोहरे में निर्धारित गति से कम रफ्तार रखें, फॉग लाइट का प्रयोग करें, लेन बदलने और ओवरटेकिंग से बचें। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि सतर्कता ही ठंड और कोहरे में सबसे बड़ा बचाव है।

कब जागेगा प्रशासन? बराहपुर गांव आज भी बुनियादी सुविधाओं से वंचित क्यों !
सिद्धार्थनगर

कब जागेगा प्रशासन? बराहपुर गांव आज भी बुनियादी सुविधाओं से वंचित क्यों !

सिद्धार्थनगर जिले के मिठवल ब्लॉक की ग्राम पंचायत बराहपुर में बुनियादी सुविधाओं के अभाव को लेकर ग्रामीणों का आक्रोश सामने आया है। आज़ादी के दशकों बाद भी गांव में पक्की सड़क, नाली और जलनिकासी नहीं है। बारिश में घुटनों तक पानी भर जाता है, जिससे स्कूली बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों को भारी परेशानी होती है। ग्रामीणों ने कई बार शिकायत की, पर सुनवाई नहीं हुई।खंड विकास अधिकारी ने जांच का आश्वासन दिया है। बराहपुर गांव में विकास के दावों की खुली पोल सिद्धार्थनगर जनपद के मिठवल ब्लॉक अंतर्गत ग्राम पंचायत बराहपुर में बुनियादी सुविधाओं के अभाव ने सरकारी विकास दावों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। आज़ादी के कई दशक बीतने के बावजूद गांव अब भी सड़क, नाली और जलनिकासी जैसी मूलभूत सुविधाओं से वंचित है। बारिश में बिगड़ते हालात, जनजीवन प्रभावित ग्रामीण महेंद्र पांडे, रामेश्वरम, धर्मेंद्र आदि के अनुसार बरसात के दिनों में गांव की गलियों में घुटनों तक पानी भर जाता है। इससे स्कूली बच्चों का विद्यालय जाना कठिन हो जाता है, जबकि बुजुर्गों और महिलाओं को इलाज व दैनिक जरूरतों के लिए बाहर निकलने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। शिकायतों के बावजूद नहीं हुई सुनवाई ग्रामीणों ने बताया कि उन्होंने कई बार संबंधित अधिकारियों और ग्राम प्रधान से समस्या के समाधान की मांग की, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। ग्राम प्रधान पर धमकी देने का आरोप ग्रामीणों का आरोप है कि विकास कार्यों की मांग करने पर ग्राम प्रधान कथित तौर पर धमकी देते हैं और राजनीतिक टिप्पणी कर काम न कराने की बात कहते हैं, जिससे गांव में भय का माहौल बना हुआ है। बीडीओ ने जांच का दिया आश्वासन खंड विकास अधिकारी मिठवल सौरभ पांडे ने बताया कि यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन से कार्रवाई की उम्मीद फिलहाल बराहपुर के ग्रामीण प्रशासन की ओर टकटकी लगाए बैठे हैं और सड़क, नाली व जलनिकासी जैसी बुनियादी सुविधाओं की शीघ्र बहाली की मांग कर रहे हैं।

पत्रकार हितों की रक्षा के लिए आगे आया ग्रामीण पत्रकार एसोसिएशन
सिद्धार्थनगर

पत्रकार हितों की रक्षा के लिए आगे आया ग्रामीण पत्रकार एसोसिएशन

ग्रामीण पत्रकार एसोसिएशन, तहसील इकाई डुमरियागंज के पदाधिकारियों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को संबोधित सात सूत्रीय ज्ञापन विधायक सैय्यदा खातून को सौंपा। यह ज्ञापन तहसील अध्यक्ष राजेश पाण्डेय के नेतृत्व में दिया गया। ज्ञापन में ग्रामीण पत्रकारों को मान्यता, आयुष्मान कार्ड, परिवहन में निःशुल्क सुविधा, स्थाई समितियों का गठन, आयोग निर्माण और एफआईआर से पहले जांच की मांग उठी। संगठन ने बताया कि पत्रकार कठिन परिस्थितियों में कार्य कर रहे हैं। विधायक ने ज्ञापन शीघ्र मुख्यमंत्री तक भेजने का आश्वासन दिया। इस दौरान कई वरिष्ठ पत्रकार उपस्थित रहे। डुमरियागंज में पत्रकारों की मांगों को लेकर ज्ञापन ग्रामीण पत्रकार एसोसिएशन उत्तर प्रदेश के आह्वान पर डुमरियागंज तहसील इकाई ने पत्रकार हितों को लेकर मुख्यमंत्री को संबोधित सात सूत्रीय ज्ञापन स्थानीय विधायक सैय्यदा खातून को सौंपा। यह कार्यक्रम तहसील अध्यक्ष राजेश पाण्डेय के नेतृत्व में आयोजित हुआ। ग्रामीण पत्रकारों को मान्यता और सुविधाओं की मांग ज्ञापन में तहसील स्तर पर सभी दैनिक समाचार पत्रों के संवाददाताओं को मान्यता देने, आयुष्मान भारत योजना से जोड़ने तथा उत्तर प्रदेश परिवहन निगम की बसों में निःशुल्क यात्रा सुविधा प्रदान करने की मांग की गई। स्थाई समिति और पत्रकार आयोग की आवश्यकता पदाधिकारियों ने जिला, मंडल और तहसील स्तर पर स्थाई पत्रकार समितियों के गठन, ग्रामीण पत्रकार आयोग की स्थापना और पत्रकारों पर एफआईआर से पहले सक्षम अधिकारी द्वारा जांच अनिवार्य करने की मांग उठाई। विधायक का आश्वासन विधायक सैय्यदा खातून ने ज्ञापन को शीघ्र मुख्यमंत्री तक प्रेषित करने का भरोसा दिया। उपस्थिति इस दौरान वरिष्ठ पत्रकार रवीन्द्र कुमार गुप्ता, मनोज शुक्ला, आफताब आलम, हेमंत मिश्रा, काजी रहमतुल्लाह, तौकीर असलम, सूरज श्रीवास्तव आदि मौजूद रहे।

जब संकट में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने विपक्ष को भी कर दिया था एकजुट
उत्तर प्रदेश, लेटेस्ट न्यूज़

जब संकट में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने विपक्ष को भी कर दिया था एकजुट

भारतीय जनता पार्टी ने सात बार सांसद पंकज चौधरी को उत्तर प्रदेश का नया प्रदेश अध्यक्ष बनाया है। 14 दिसंबर को उनके नाम की आधिकारिक घोषणा हुई।सिद्धार्थनगर के पूर्व भाजपा जिलाध्यक्ष नरेंद्र मणि त्रिपाठी ने पंकज चौधरी की सांगठनिक क्षमता का उदाहरण साझा किया। उन्होंने बताया कि 2010 में जिला पंचायत अध्यक्ष चुनाव के दौरान पंकज चौधरी ने लोकतांत्रिक प्रक्रिया के उल्लंघन के विरोध में धुर विरोधी नेताओं को एक मंच पर खड़ा कर दिया था। उस विरोध सभा में सूर्य प्रताप शाही और माता प्रसाद पांडेय शामिल हुए थे। पंकज चौधरी बने यूपी भाजपा के नए प्रदेश अध्यक्ष भारतीय जनता पार्टी ने संगठन को नई दिशा देने के उद्देश्य से सात बार के सांसद पंकज चौधरी को उत्तर प्रदेश भाजपा का नया प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किया है। 14 दिसंबर को उनके नाम की औपचारिक घोषणा के साथ ही यह स्पष्ट हो गया कि पार्टी नेतृत्व ने संगठनात्मक अनुभव और नेतृत्व क्षमता को प्राथमिकता दी है। निर्विरोध चयन से पहले ही तय हो गई थी तस्वीर शनिवार को प्रदेश अध्यक्ष पद के लिए पंकज चौधरी ने पांच सेट में नामांकन दाखिल किया। किसी अन्य दावेदार के सामने न आने से उनका चयन उसी समय लगभग तय माना जा रहा था। यह फैसला पार्टी के भीतर उनके मजबूत संगठनात्मक प्रभाव को दर्शाता है। सिद्धार्थनगर से जुड़ा पुराना संगठनात्मक उदाहरण सिद्धार्थनगर के पूर्व भाजपा जिलाध्यक्ष नरेंद्र मणि त्रिपाठी ने बताया कि, पंकज चौधरी की असली पहचान केवल चुनावी जीत नहीं, बल्कि संकट के समय संगठन को एकजुट करने की क्षमता रही है। उन्होंने 2010 की एक घटना का उल्लेख करते हुए बताया कि जिला पंचायत अध्यक्ष चुनाव के दौरान लोकतांत्रिक प्रक्रिया के उल्लंघन का मामला सामने आया था। उस समय वह पार्टी के जिलाध्यक्ष का पद संभाल रहे थे उस समय प्रदेश अध्यक्ष सूर्यप्रताप शाही थे। यह वह समय था जब संतकबीरनगर से आकर पूर्व सांसद स्व. भालचंद्र यादव अपने दोनों बेटों के लिए बुद्ध की धरती पर राजनीतिक जमीन तैयार करने के लिए डेरा डाले बैठे थे। बड़े बेटे प्रमोद यादव को जिला पंचायत अध्यक्ष तो छोटे सुबोध को विधानसभा चुनाव में उतारने की मंशा थी। उस समय प्रदेश में बसपा की सरकार थी और भालचंद्र बसपा के कद्दावर नेताओं में गिने जाते थे। पर्चा दाखिले से पहले अगवा किया प्रस्तावक समर्थक नरेंद्र मणि बताते हैं कि 2010 के जिला पंचायत अध्यक्ष पद के लिए सईद भ्रमर के बाद सिद्धार्थनगर की दूसरी जिला पंचायत अध्यक्ष भाजपा की तरफ से साधना चौधरी फिर मैदान में थीं। उन्होंने बताया कि जिला पंचायत के गठन उपरांत सिद्धार्थनगर के पहले जिला पंचायत अध्यक्ष 1995 में सईद भ्रमर तो दूसरी साधना चौधरी थीं जिनका निर्वाचन 2000 में हुआ था। 2010 में पार्टी ने फिर साधना को मौका दिया था, लेकिन वह नामांकन जमा करती कि उससे पहले लग्जरी वाहनों के जरिये साधना के प्रस्तावक समर्थक अगवा कर लिए गये। आरोप भालचंद्र पर लगा, लेकिन बसपा की सरकार थी तो कोई कार्रवाई नहीं हुई। पर्चा दाखिल न कर पाने के कारण भालचंद्र के बड़े बेटे प्रमोद निर्विरोध निर्वाचित हो गये। जब विरोधी दल भी एक मंच पर आए सिद्धार्थनगर के ब्यूरो प्रमुख रहे वरिष्ठ पत्रकार यशोदा श्रीवास्तव बताते हैं कि साधना चौधरी पंकज चौधरी की बड़ी बहन हैं। जब बहन के प्रस्तावक व समर्थक के अगवा हो जाने की खबर पंकज चौधरी को मिली वह अकेले सिद्धार्थनगर पहुंच गये। 2010 में वह सांसद नहीं थे, लेकिन पहले सांसद रह चुके थे। 2009 में उन्हें स्व. हर्षवर्धन से हार जाना पड़ा था। पंकज चौधरी के सिद्धार्थनगर पहुंचते ही महराजगंज से बड़ी तादाद में उनके समर्थक पहुंच गए। लोकतांत्रिक प्रक्रिया के विपरीत समर्थक व प्रस्तावक के अगवा होने की सूचना उन्होंने तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष सूर्य प्रताप शाही को दी और खुद जिले में रहकर विपक्षी नेताओं से हालात पर चर्चा कर सभी को अपने पक्ष में एक जुट कर लिया। दूसरे दिन मुख्यालय के सांड़ी तिराहे पर वृहद विरोध सभा हुई जिसमें मौजूदा कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही व मौजूदा समय में नेता प्रतिपक्ष व सपा के कद्दावर नेता माता प्रसाद पांडेय एक साथ विरोध मंच पर खड़े हुए। दो धुर विरोधियों को एक मंच पर खड़ा कर पंकज चौधरी ने उसी समय अपनी क्षमता प्रमाणित कर दी थी। विरोध मंच के साथ बसपा को छोड़ सभी राजनीतिक दलों के नेता शामिल हुए और प्रदर्शन के बाद कलेक्टर को संयुक्त ज्ञापन दिया गया। पार्टी के दबाव में प्रशासन ने एक तरफा रवैया अपनाए रखा। लेकिन पंकज चौधरी ने समूचे विपक्ष को एक साथ खड़ा कर अपनी चौधराहट दिखाई थी। हालांकि 2012 में अविश्वास लाकर प्रमोद यादव से जिला पंचायत की कुर्सी छीन ली गई और पांव जमाने के लिए अथक प्रयास कर रहे भालचंद्र को दोनों बेटों के साथ बुद्ध की धरा से वापस जाना पड़ा। संगठन के लिए क्यों अहम है यह नियुक्ति राजनीतिक जानकारों के अनुसार, ऐसे अनुभवों के कारण ही पार्टी ने पंकज चौधरी को प्रदेश अध्यक्ष जैसी बड़ी जिम्मेदारी सौंपी है। यह नियुक्ति आगामी राजनीतिक रणनीतियों और संगठनात्मक मजबूती के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। (लेखन संकलन के लिए विशेष आभार वरिष्ठ पत्रकार नीलोत्पल दुबे)

कौन हैं नितिन नबीन ? जिन्हें भाजपा ने बनाया राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष
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कौन हैं नितिन नबीन ? जिन्हें भाजपा ने बनाया राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष

बिहार सरकार के मंत्री नितिन नबीन को भारतीय जनता पार्टी का राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। नियुक्ति आदेश जारी होते ही वे सोमवार को पटना से दिल्ली रवाना हुए। प्रस्थान से पहले उन्होंने महावीर मंदिर में पूजा की और राजवंशी नगर में अपने पिता को श्रद्धांजलि दी। दिल्ली में पार्टी मुख्यालय पहुंचकर शीर्ष नेतृत्व और कार्यकर्ताओं से मुलाकात का कार्यक्रम है। भाजपा संसदीय बोर्ड ने तत्काल प्रभाव से यह जिम्मेदारी सौंपी। नितिन नबीन बांकीपुर से पांच बार विधायक और वर्तमान में पथ निर्माण मंत्री हैं। यह नियुक्ति संगठन में युवा नेतृत्व को बढ़ाने दर्शाती है। नितिन नबीन को भाजपा राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष की जिम्मेदारी भारतीय जनता पार्टी ने संगठनात्मक स्तर पर बड़ा फैसला लेते हुए बिहार सरकार के मंत्री नितिन नबीन को पार्टी का राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त किया है। यह आदेश भाजपा के संसदीय बोर्ड की ओर से जारी किया गया, जो तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है। दिल्ली रवाना होने से पहले धार्मिक और पारिवारिक कार्यक्रम नियुक्ति के बाद नितिन नबीन ने पटना में महावीर मंदिर जाकर पूजा-अर्चना की। इसके बाद उन्होंने राजवंशी नगर स्थित अपने पिता की प्रतिमा पर श्रद्धांजलि अर्पित की। सोमवार सुबह वे दिल्ली के लिए रवाना हुए, जहां भाजपा के केंद्रीय कार्यालय में उनके स्वागत की तैयारी की गई है। शीर्ष नेतृत्व से मुलाकात और संगठनात्मक संवाद दिल्ली पहुंचने पर नितिन नबीन की भाजपा के वरिष्ठ नेताओं और कार्यकर्ताओं से मुलाकात प्रस्तावित है। पार्टी सूत्रों के अनुसार, यह दौरा संगठनात्मक जिम्मेदारियों को लेकर संवाद और आगामी रणनीतियों पर चर्चा के लिहाज से अहम माना जा रहा है। बिहार से राष्ट्रीय स्तर तक राजनीतिक सफर नितिन नबीन पटना के बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र से लगातार पांच बार विधायक चुने जा चुके हैं। वर्ष 2006 में पहली बार विधानसभा पहुंचने वाले नबीन वर्तमान में बिहार सरकार में पथ निर्माण मंत्री हैं। संगठन और सरकार दोनों स्तरों पर उनका अनुभव पार्टी के लिए उपयोगी माना जाता है। पूर्वी भारत और युवा नेतृत्व को मिला प्रतिनिधित्व भाजपा में BJP President स्तर की राष्ट्रीय जिम्मेदारी में नितिन नबीन की नियुक्ति को पूर्वी भारत के मजबूत प्रतिनिधित्व और युवा नेतृत्व को आगे बढ़ाने के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। 45 वर्ष की उम्र में यह दायित्व संभालना पार्टी के दीर्घकालिक संगठनात्मक दृष्टिकोण को दर्शाता है। संगठनात्मक बदलाव के लिहाज से क्यों अहम है यह नियुक्ति पार्टी के भीतर यह फैसला ऐसे समय पर आया है, जब भाजपा संगठनात्मक मजबूती और क्षेत्रीय संतुलन पर विशेष ध्यान दे रही है। नितिन नबीन का अनुभव, संगठनात्मक पृष्ठभूमि और प्रशासनिक जिम्मेदारियां इस भूमिका को प्रभावी बनाने में महत्वपूर्ण मानी जा रही हैं।

ओवररेटिंग पर जिलाधिकारी का एक्शन, खाद दुकानें सील
सिद्धार्थनगर

ओवररेटिंग पर जिलाधिकारी का एक्शन, खाद दुकानें सील

जिलाधिकारी शिवशरणप्पा जी एन ने काज़ी रूधौली क्षेत्र में मिश्रा बिल्डिंग मैटेरियल और शुक्ला सीमेंट खाद दुकानों का निरीक्षण किया। निरीक्षण में खाद स्टॉक और वितरण रजिस्टर की जांच हुई। किसानों से फोन पर बातचीत में ओवररेटिंग की शिकायत सामने आई। रजिस्टर में किसानों के गलत मोबाइल नंबर दर्ज थे और खरीदी गई उर्वरक मात्रा अधिक दिखाई गई थी। गंभीर अनियमितताओं पर जिलाधिकारी ने कड़ी नाराजगी जताते हुए दोनों दुकानों का लाइसेंस निरस्त कर सील करने का निर्देश दिया। जिला कृषि अधिकारी मु. मुज्जामिल ने मौके पर कार्रवाई कर दुकानों को सील कराया, जिससे किसानों का हित सुरक्षित हुआ तत्काल। काज़ी रूधौली में खाद दुकानों पर प्रशासन की सख्त कार्रवाई जनपद में किसानों को समय पर और उचित दर पर उर्वरक उपलब्ध कराने के उद्देश्य से जिलाधिकारी शिवशरणप्पा जी एन ने काज़ी रूधौली स्थित मिश्रा बिल्डिंग मैटेरियल और शुक्ला सीमेंट खाद विक्रेता की औचक जांच की। निरीक्षण में उजागर हुईं गंभीर अनियमितताएं निरीक्षण के दौरान खाद का भौतिक स्टॉक और वितरण रजिस्टर मिलान में गड़बड़ी पाई गई। रजिस्टर में कई किसानों के मोबाइल नंबर गलत दर्ज थे, वहीं वास्तविक खरीद से अधिक उर्वरक की एंट्री की गई थी। किसानों ने की ओवररेटिंग की शिकायत जिलाधिकारी ने किसानों से सीधे फोन पर बातचीत की, जिसमें ओवररेटिंग और अनियमित बिक्री की पुष्टि हुई। इससे स्पष्ट हुआ कि दुकानदार सरकारी नियमों का उल्लंघन कर रहे थे। लाइसेंस निरस्त, दुकानें सील मामले की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी ने दोनों दुकानों का लाइसेंस तत्काल निरस्त करने और दुकान सील करने के निर्देश दिए। जिला कृषि अधिकारी मु. मुज्जामिल ने मौके पर कार्रवाई सुनिश्चित की। किसानों के हित में कड़ा संदेश इस कार्रवाई से उर्वरक कालाबाजारी पर रोक लगेगी और किसानों में प्रशासन के प्रति विश्वास मजबूत होगा। प्रशासन ने स्पष्ट किया कि भविष्य में ऐसी लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

पूर्वांचल के नेता पंकज चौधरी ने भरा नामांकन, यूपी बीजेपी अध्यक्ष बनना हुआ तय
उत्तर प्रदेश

पूर्वांचल के नेता पंकज चौधरी ने भरा नामांकन, यूपी बीजेपी अध्यक्ष बनना हुआ तय

उत्तर प्रदेश में यूपी बीजेपी अध्यक्ष पद को लेकर तस्वीर साफ होती दिख रही है। केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने शनिवार को नामांकन दाखिल किया, जिसे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने प्रस्तावित किया। पार्टी सूत्रों के अनुसार, उनके निर्विरोध चुने जाने की प्रबल संभावना है और औपचारिक घोषणा रविवार को हो सकती है। महराजगंज से सात बार सांसद रहे पंकज चौधरी ओबीसी और कुर्मी समुदाय के प्रभावी नेता माने जाते हैं। लखनऊ में वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी में नामांकन हुआ, जिससे संगठन और सरकार के संतुलन का संदेश गया है। कार्यकर्ताओं में उत्साह दिखा। यूपी बीजेपी अध्यक्ष पद की दौड़ में पंकज चौधरी सबसे आगे उत्तर प्रदेश भाजपा को जल्द नया नेतृत्व मिलने जा रहा है। यूपी बीजेपी अध्यक्ष पद के लिए केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने शनिवार को अपना नामांकन दाखिल कर दिया। नामांकन के समय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य, बृजेश पाठक, राष्ट्रीय महासचिव विनोद तावड़े, महेंद्र नाथ पांडे और स्मृति ईरानी मौजूद रहीं। निर्विरोध चुने जाने की प्रबल संभावना पार्टी सूत्रों के मुताबिक, अब तक किसी अन्य नेता ने नामांकन दाखिल नहीं किया है। ऐसे में पंकज चौधरी का यूपी बीजेपी अध्यक्ष बनना लगभग तय माना जा रहा है। रविवार को औपचारिक घोषणा हो सकती है। ओबीसी और कुर्मी समीकरण पर सियासी दांव महराजगंज से सात बार सांसद रहे पंकज चौधरी को ओबीसी राजनीति का मजबूत चेहरा माना जाता है। वे कुर्मी समाज से आने वाले बड़े नेताओं में गिने जाते हैं। यदि वे अध्यक्ष बनते हैं तो वे कुर्मी समाज से आने वाले चौथे प्रदेश अध्यक्ष होंगे। पार्षद से केंद्रीय मंत्री तक का सफर पंकज चौधरी ने 1989 में गोरखपुर नगर निगम के पार्षद के रूप में राजनीति शुरू की। 1991 में पहली बार सांसद बने। 1999 और 2009 को छोड़ दें तो उन्होंने लगातार लोकसभा चुनाव जीते। वर्तमान में वे मोदी सरकार में वित्त राज्य मंत्री हैं। संगठन और सरकार के बीच संतुलन का संकेत पार्टी के भीतर माना जा रहा है कि यूपी बीजेपी अध्यक्ष के रूप में पंकज चौधरी का चयन संगठनात्मक अनुभव, जमीनी पकड़ और पूर्वांचल में प्रभाव को देखते हुए किया गया है। कार्यकर्ताओं में इसे लेकर खासा उत्साह देखा जा रहा है।

मनरेगा का नाम बदला: अब ‘पूज्य बापू ग्रामीण रोजगार योजना’, 125 दिन का मिलेगा काम
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मनरेगा का नाम बदला: अब ‘पूज्य बापू ग्रामीण रोजगार योजना’, 125 दिन का मिलेगा काम

केंद्र सरकार ने ग्रामीण रोजगार से जुड़ी प्रमुख योजना मनरेगा (MGNREGA) का नाम बदलकर ‘पूज्य बापू ग्रामीण रोजगार योजना’ करने वाला बिल मंजूर कर लिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में नाम बदलने के साथ काम के दिनों को 100 से बढ़ाकर 125 करने का फैसला भी लिया गया। सरकार का कहना है कि यह बदलाव ग्रामीण रोजगार बढ़ाने और महात्मा गांधी की ग्राम स्वराज अवधारणा को मजबूत करने के उद्देश्य से किया गया है। बिल को अब संसद में पेश किया जाएगा। विशेषज्ञों के अनुसार, काम के दिनों में वृद्धि से आय बढ़ेगी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था में सकारात्मक प्रभाव दिखेगा। मनरेगा (MGNREGA) का नाम बदलने का फैसला, सरकार ने काम के दिन बढ़ाए केंद्र सरकार ने देश की सबसे बड़ी ग्रामीण रोजगार योजना मनरेगा (MGNREGA) को नया रूप देने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में शुक्रवार को हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल बैठक में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम का नाम बदलकर ‘पूज्य बापू ग्रामीण रोजगार योजना’ करने वाला बिल मंजूर किया गया। यह कदम लंबे समय से चल रही चर्चाओं के बाद सामने आया है, जिसमें सरकार ग्रामीण विकास मॉडल को महात्मा गांधी की विचारधारा से जोड़ना चाहती है। सरकार ने क्यों किया बदला मनरेगा का नाम ? सूत्रों के अनुसार, योजना का नया नाम गांधी के ग्राम स्वराज और ग्रामीण स्वावलंबन की अवधारणा को दर्शाता है। हालांकि योजना की संरचना, फंडिंग और कार्यप्रणाली ज्यादातर पूर्ववत ही रहेंगी। बदलाव केवल नाम बदलने और काम के दिनों की संख्या बढ़ाने के रूप में लागू होंगे। 125 दिन की रोजगार गारंटी: ग्रामीण परिवारों के लिए बड़ी राहत कैबिनेट ने MGNREGA के तहत काम के दिन 100 से बढ़ाकर 125 करने का फैसला लिया है। महंगाई, बेरोजगारी और ग्रामीण आय में गिरावट को देखते हुए यह बड़ा कदम माना जा रहा है। सरकार का मानना है कि अतिरिक्त 25 दिन का रोजगार परिवारों को आर्थिक मजबूती देगा और ग्रामीण पलायन में भी कमी आएगी। योजना का इतिहास और वर्तमान स्थिति मनरेगा वर्ष 2005 में यूपीए-1 सरकार के दौरान लागू की गई थी। शुरुआत में इसका नाम नेशनल रूरल एम्प्लॉयमेंट गारंटी एक्ट था, जिसे 2009 में महात्मा गांधी के नाम पर रखा गया। आज इस स्कीम के तहत 15 करोड़ से अधिक लोग काम कर रहे हैं, जिनमें लगभग एक-तिहाई महिलाएँ शामिल हैं। ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर संभावित असर विशेषज्ञों का कहना है कि काम के दिनों की बढ़ोतरी से ग्रामीण क्षेत्रों में नकदी प्रवाह बढ़ेगा, जिससे स्थानीय बाजार, मजदूरी चक्र और छोटे व्यवसायों को सीधा लाभ होगा। योजना के नए रूप, नए नाम और नई रोजगार अवधि से ग्रामीण अर्थव्यवस्था में सकारात्मक परिवर्तन की उम्मीद की जा रही है। अंत में, सरकार का मानना है कि मनरेगा (MGNREGA) में बदलाव ग्रामीण रोजगार को नई दिशा देगा और महात्मा गांधी की ग्रामीण विकास दृष्टि को मजबूत करेगा।

Census 2027 के लिए 11,718 करोड़ मंजूर, पहली बार होगी Digital Census
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Census 2027 के लिए 11,718 करोड़ मंजूर, पहली बार होगी Digital Census

केंद्र सरकार ने Census 2027 के लिए 11,718 करोड़ रुपये के बजट को मंजूरी दे दी है। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि यह देश की पहली Digital Census होगी, जिसे दो चरणों में आयोजित किया जाएगा। अप्रैल से सितंबर 2026 के बीच हाउस लिस्टिंग की जाएगी, जबकि फरवरी 2027 से जनगणना शुरू होगी। इस प्रक्रिया में जाति आधारित आंकड़े (Jati Census) भी शामिल होंगे। कैबिनेट बैठक में यह फैसला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में लिया गया। सरकार के अनुसार, डिजिटल डिजाइन डेटा संरक्षण को ध्यान में रखकर बनाया गया है और जनगणना में करीब 30 लाख कर्मियों को लगाया जाएगा। Census 2027 पर बड़ी घोषणा: पहली बार देश में होगी Digital Census केंद्र सरकार ने आगामी Census 2027 के लिए 11,718 करोड़ रुपये के विशाल बजट को मंजूरी दे दी है। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में यह ऐतिहासिक निर्णय लिया गया। यह देश की पहली Digital Census होगी, जिसमें डेटा सुरक्षा और पारदर्शिता को प्राथमिकता दी गई है। Digital Census का पूरा प्लान क्या है? अश्विनी वैष्णव ने बताया कि Census 2027 दो चरणों में पूरी की जाएगी। सरकार इस प्रक्रिया में 30 लाख कर्मियों को तैनात करेगी। डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार कर लिया गया है और डेटा सुरक्षा को शीर्ष प्राथमिकता दी गई है। Census 2027 में शामिल होंगे जातिगत आंकड़े इस बार Jati Census भी जनगणना का हिस्सा होगा। सरकार ने लोकसभा में पुष्टि की थी कि 2027 की जनगणना में निवास अवधि और प्रवास के कारणों से जुड़े प्रश्न भी शामिल किए जाएंगे। इससे सामाजिक-आर्थिक नीतियों को अधिक सटीक आधार मिलेगा। भारत की Census प्रक्रिया क्यों महत्वपूर्ण है? भारत की जनगणना देश की जनसांख्यिकी, संसाधन वितरण और कल्याणकारी योजनाओं के लिए मूल आधार तैयार करती है। Census 2027 का डिजिटलीकरण इसे और अधिक पारदर्शी व सटीक बनाने की दिशा में बड़ा कदम है। नवीनतम निर्णयों के साथ सरकार इसे ऐतिहासिक सर्वेक्षण बनाने की तैयारी में है। यही कारण है कि Digital Census और Census 2027 को प्रशासनिक सुधार का महत्वपूर्ण चरण माना जा रहा है।

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