Four Stars of Destiny विवाद: जनरल नरवणे की पहली प्रतिक्रिया सामने आई
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Four Stars of Destiny विवाद: जनरल नरवणे की पहली प्रतिक्रिया सामने आई

भारत के पूर्व थलसेनाध्यक्ष जनरल मनोज मुकुंद नरवणे की आत्मकथा ‘फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी’ को लेकर संसद के बजट सत्र के दौरान नया विवाद सामने आया है। इस मामले में पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया ने आधिकारिक स्पष्टीकरण जारी किया है। किताब के कथित उद्धरणों और उपलब्धता को लेकर राजनीतिक बहस तेज हुई है। जनरल नरवणे ने भी सोशल मीडिया मंच एक्स पर प्रकाशक का नोट साझा करते हुए लिखा है, “किताब की यही स्थिति है।” संसद में ‘फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी’ को लेकर विवाद कैसे बढ़ा बजट सत्र के दौरान पूर्व थलसेनाध्यक्ष जनरल मनोज मुकुंद नरवणे की प्रस्तावित आत्मकथा ‘फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी’ चर्चा के केंद्र में आ गई है। संसद में इस पुस्तक के कथित उद्धरणों को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखी गई।रक्षा मंत्री ने नियमों का हवाला देते हुए कहा कि अप्रकाशित पुस्तक को संसद में पढ़ा नहीं जा सकता। इसके बाद नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने इस मुद्दे पर सवाल उठाए। पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया का आधिकारिक बयान विवाद बढ़ने के बाद प्रकाशक पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि उसके पास जनरल नरवणे के संस्मरण के एक्सक्लूसिव पब्लिशिंग राइट्स हैं।प्रकाशक ने साफ किया कि यह पुस्तक अब तक न तो मुद्रित रूप में और न डिजिटल स्वरूप में प्रकाशित, वितरित या बिक्री के लिए उपलब्ध कराई गई है।साथ ही चेतावनी दी गई कि यदि पुस्तक की कोई भी प्रति—पूर्ण या आंशिक—किसी भी मंच पर प्रचलन में पाई जाती है, तो वह कॉपीराइट उल्लंघन के दायरे में आएगी और कानूनी उपाय अपनाए जाएंगे। 24 घंटे में दूसरा स्पष्टीकरण क्यों आया पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया ने मंगलवार को 24 घंटे के भीतर दूसरा स्पष्टीकरण जारी किया। इसमें कहा गया कि किसी पुस्तक को तब तक “प्रकाशित” नहीं माना जा सकता जब तक वह सभी खुदरा माध्यमों पर बिक्री के लिए उपलब्ध न हो।प्रकाशक ने बताया कि घोषित शीर्षक, प्री-ऑर्डर लिस्टिंग और वास्तविक प्रकाशन अलग-अलग चरण होते हैं। केवल प्री-ऑर्डर लिंक होने का अर्थ यह नहीं कि पुस्तक प्रकाशित हो चुकी है। जनरल नरवणे की पहली प्रतिक्रिया राजनीतिक विवाद के बीच जनरल नरवणे ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर प्रकाशक का नोट साझा किया और लिखा, “किताब की यही स्थिति है।”उनकी यह प्रतिक्रिया इस बात को रेखांकित करती है कि आत्मकथा अब तक औपचारिक रूप से सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है। राहुल गांधी के सवाल और पुराना पोस्ट राहुल गांधी ने प्रकाशक के रुख पर सवाल उठाते हुए जनरल नरवणे के वर्ष 2023 के एक सोशल मीडिया पोस्ट का हवाला दिया था, जिसमें लिखा था-“हैलो फ्रेंड्स, मेरी किताब अब उपलब्ध है। लिंक फॉलो करें। हैप्पी रीडिंग। जय हिंद।”राहुल गांधी का कहना है कि इससे पुस्तक के उपलब्ध होने का संकेत मिलता है। उन्होंने दावा किया कि या तो जनरल नरवणे या फिर पेंगुइन “सच नहीं बोल रहा।” दिल्ली पुलिस ने FIR दर्ज कर जांच शुरू की इस बीच यह सवाल भी उठा कि यदि पुस्तक प्रकाशित नहीं हुई तो राहुल गांधी के पास यह किताब कैसे पहुंची। इसी पहलू की जांच के लिए दिल्ली पुलिस ने FIR दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। आगे क्या फिलहाल प्रकाशक के दोहराए गए स्पष्टीकरण के बाद रिकॉर्ड पर यह दर्ज हो गया है कि ‘फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी’ अभी औपचारिक रूप से प्रकाशित नहीं हुई है। विवाद से जुड़े तथ्यों की पुष्टि और जांच प्रक्रिया जारी है।

गाजियाबाद केस में कोरियन एप या गेम न मिलने पर जांच का आया नया मोड़
उत्तर प्रदेश

गाजियाबाद केस में कोरियन एप या गेम न मिलने पर जांच का आया नया मोड़

दिल्ली से सटे गाजियाबाद (उत्तर प्रदेश) की भारत सिटी सोसाइटी में तीन नाबालिग बहनों की आत्महत्या के मामले में पुलिस की जांच आगे बढ़ रही है। अधिकारियों के अनुसार, घटनास्थल से मिले सुसाइड नोट, डायरी और डिजिटल गतिविधियों की गहन पड़ताल की जा रही है। जांच में सोशल मीडिया पहचान, पारिवारिक आर्थिक तंगी और मोबाइल फोन से जुड़े पहलू सामने आए हैं। पुलिस की साइबर और फॉरेंसिक टीमें अब बेचे गए मोबाइल फोन रिकवर कर पूरे घटनाक्रम की कड़ियां जोड़ने में जुटी हैं। गाजियाबाद केस में डिजिटल पहचान और आर्थिक दबाव की जांच तेज भारत सिटी सोसाइटी में तीन बहनों की आत्महत्या के बाद पुलिस का फोकस अब उनके डिजिटल व्यवहार और पारिवारिक परिस्थितियों पर है। पुलिस सूत्रों के अनुसार, किशोरियां सोशल मीडिया पर अलग पहचान बना चुकी थीं और उन्होंने अपने असली नाम छोड़कर कोरियन नाम रख लिए थे। पुलिस को डायरी और सुसाइड नोट में लिखा मिला— “हम कोरियन से प्यार करते हैं… जितना उन्हें चाहते थे, उतना घरवालों को भी नहीं. इंडियन आदमी से शादी कभी नहीं. कोरियन हमारी जान थी.” मोबाइल फोन, सोशल मीडिया अकाउंट और सदमे की कड़ी सूत्रों के मुताबिक, बहनों का एक सीक्रेट सोशल मीडिया अकाउंट था, जिसके फॉलोअर्स काफी ज्यादा थे। करीब 10 दिन पहले पिता चेतन कुमार को इसकी जानकारी हुई तो उन्होंने अकाउंट डिलीट कर दिया और फोन भी छीन लिया। इसके बाद तीनों बहनें गहरे सदमे में चली गईं।पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि सोशल मीडिया प्रोफाइल पिक्चर (DP) हटने पर वे खाना तक नहीं खाती थीं। आर्थिक तंगी और पिता चेतन कुमार पर कर्ज पिता चेतन कुमार की आर्थिक स्थिति बेहद खराब बताई गई है। शेयर ट्रेडिंग में नुकसान के बाद उन पर करीब 2 करोड़ रुपये का कर्ज था। घर का बिजली बिल (प्रीपेड रिचार्ज) भरने के लिए उन्होंने बेटियों का मोबाइल फोन तक बेच दिया था।सूत्रों के अनुसार, एक मोबाइल फोन तीन माह पहले और दूसरा 10 दिन पहले बेटियों से छीनकर बेचा गया था। पुलिस की साइबर और फॉरेंसिक जांच फॉरेंसिक टीम को उस कमरे से मां का मोबाइल फोन मिला, जहां से बहनों ने छलांग लगाई थी। शुरुआती जांच में पुलिस की साइबर टीम को मोबाइल में कोई कोरियन एप या गेम नहीं मिला है।अधिकारियों का कहना है कि बेचे गए दोनों मोबाइल फोन का आईएमईआई नंबर सर्विलांस टीम ट्रेस कर रही है। साथ ही, मौके पर मिले मोबाइल फोन को फॉरेंसिक जांच के लिए लैब भेजा जाएगा। पिता का बयान और टास्क गेम का दावा पत्रकारों से बातचीत में चेतन कुमार ने कहा कि बेटियां तीन साल से टास्क गेम खेल रही थीं और कोरिया जाने की जिद करती थीं। हालांकि, पुलिस की शुरुआती जांच में ऑनलाइन टास्क गेम की पुष्टि सामने नहीं आई है। आगे क्या कार्रवाई पुलिस का कहना है कि डिजिटल कनेक्शन और कोरियन दोस्तों से संपर्क के सवालों के जवाब मोबाइल रिकवरी के बाद स्पष्ट हो सकते हैं। जांच जारी है और सभी पहलुओं की पुष्टि की जा रही है।

राहुल गांधी के भाषण पर राजनाथ सिंह और अमित शाह ने जताई आपत्ति
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राहुल गांधी के भाषण पर राजनाथ सिंह और अमित शाह ने जताई आपत्ति

लोकसभा में बजट सत्र के दौरान सोमवार को नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के भाषण का एक हिस्सा कार्यवाही से हटा दिया गया। यह घटनाक्रम राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव के दौरान संसद भवन, नई दिल्ली में हुआ, जब लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सदन के नियमों का हवाला दिया। विवाद अप्रकाशित सामग्री के उल्लेख और उसके प्रामाणिक होने को लेकर उठा, जिस पर सत्ता पक्ष ने कड़ी आपत्ति दर्ज की। इसके बाद सदन में हंगामा हुआ और कार्यवाही को दिन भर के लिए स्थगित करना पड़ा। पूरे घटनाक्रम में नियम, संसदीय मर्यादा और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े प्रश्न सामने आए। सदन की कार्यवाही आगे बढ़ते ही विवाद का दायरा व्यापक होता चला गया। नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने स्पष्ट किया कि वह किसी अप्रकाशित पुस्तक को सीधे उद्धृत नहीं कर रहे, बल्कि एक पत्रिका में प्रकाशित लेख के अंश पढ़ रहे हैं। उनका कहना था कि यह लेख पूर्व सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे के संस्मरण से संबंधित है और इसमें भारत-चीन सीमा से जुड़े संदर्भ मौजूद हैं। सत्ता पक्ष की आपत्ति और नियमों का हवाला रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सदन में कहा, “राहुल गांधी पहले ये बताएं कि वो किताब प्रकाशित हुई है या नहीं हुई है, अगर हुई है तो वो तब इसका उल्लेख करें, अगर नहीं हुई है तो उसका उल्लेख करने का कोई औचित्य नहीं है।” गृह मंत्री अमित शाह ने भी कहा कि यदि यह पत्रिका का लेख है तो उसे पुस्तक के रूप में प्रस्तुत नहीं किया जाना चाहिए और सदन को गुमराह नहीं किया जाना चाहिए। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने हस्तक्षेप करते हुए कहा कि सदन में कही जाने वाली हर बात प्रामाणिक होनी चाहिए ताकि संसद की मर्यादा बनी रहे। उन्होंने नियम 349(i) का उल्लेख करते हुए अप्रकाशित सामग्री, पुस्तकों या अख़बारों की कटिंग पढ़ने पर आपत्ति जताई। विपक्ष का विरोध और कार्यवाही स्थगन इन आपत्तियों के बीच विपक्षी सांसदों ने विरोध शुरू कर दिया। हंगामे के कारण दोपहर डेढ़ बजे से शुरू हुई कार्यवाही लगभग 45 मिनट तक बाधित रही और बाद में इसे पहले 3 बजे, फिर 4 बजे तक के लिए स्थगित किया गया। अंततः लोकसभा की कार्यवाही मंगलवार तक के लिए स्थगित कर दी गई। सदन के बाहर बयान कार्यवाही स्थगित होने के बाद राहुल गांधी ने संसद परिसर के बाहर कहा, “मैं ये नहीं कह रहा हूं कि ये मैंने लिखा है. पूर्व आर्मी चीफ नरवणे ने ये किताब लिखी है… मैं उसी आर्टिकल को कोट कर रहा हूं, लेकिन मुझे बोलने नहीं दिया जा रहा है।”उन्होंने यह भी कहा, “यह 100 फ़ीसदी प्रामाणिक है।” वहीं, भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने नियमों और संविधान के अनुच्छेद 19 का हवाला देते हुए राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर सावधानी बरतने की बात कही। केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि एक बार अध्यक्ष की रूलिंग आने के बाद उसी विषय पर बार-बार बोलना सदन के संचालन में बाधा पैदा करता है। पूरे घटनाक्रम ने संसद में नियम, अभिव्यक्ति की सीमा और संसदीय परंपराओं को लेकर एक बार फिर बहस को केंद्र में ला दिया है।

मदर प्राइड स्कूल में सांस्कृतिक कार्यक्रम हुआ आयोजित, बच्चों की प्रस्तुति ने जीता दिल
उत्तर प्रदेश

मदर प्राइड स्कूल में सांस्कृतिक कार्यक्रम हुआ आयोजित, बच्चों की प्रस्तुति ने जीता दिल

महराजगंज जिले में 77वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर सोमवार को विभिन्न स्कूलों में सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। इस दौरान मदर प्राइड स्कूल में नौनिहालों ने देशभक्ति से ओतप्रोत प्रस्तुतियां दीं, जो देर शाम तक चलीं। कार्यक्रम के माध्यम से बच्चों को शिक्षा के साथ सांस्कृतिक मूल्यों से जोड़ने का संदेश दिया गया। स्थानीय स्तर पर यह आयोजन विद्यार्थियों की रचनात्मक प्रतिभा और राष्ट्रभक्ति भाव को मंच देने का माध्यम बना। सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने बांधा समां कार्यक्रम के दौरान नौनिहालों की भावपूर्ण प्रस्तुतियों ने उपस्थित लोगों का ध्यान आकर्षित किया। बच्चों ने गीत, नृत्य और अन्य सांस्कृतिक गतिविधियों के माध्यम से राष्ट्रभक्ति का संदेश दिया। प्रस्तुतियों में यह स्पष्ट दिखाई दिया कि विद्यार्थी देश की एकता और अखंडता के प्रति जागरूक हैं। सर्वज्ञा दुबे की प्रस्तुति को मिली विशेष सराहना विद्यालय की छात्रा सर्वज्ञा दुबे ने फिल्म भुज द प्राइड ऑफ इंडिया का गीत “ओ देश मेरे तेरी शान पर जिंदा” प्रस्तुत किया, जिसे दर्शकों ने सराहा। उनके अलावा आश्वी, अदरिजा, आर्यन, आदर्श और अविश्का ने भी अपनी प्रस्तुतियों से प्रशंसा प्राप्त की। मुख्य अतिथि ने स्कूल की भूमिका को सराहा कार्यक्रम के मुख्य अतिथि नील इंटरप्राइजेज के प्रोपराइटर अनिल कुमार प्रजापति ने कहा कि बच्चों की प्रस्तुतियों से यह स्पष्ट होता है कि मदर प्राइड स्कूल अन्य विद्यालयों से अलग पहचान बना रहा है। उन्होंने स्कूल परिवार को बच्चों को शिक्षा के साथ सांस्कृतिक मूल्यों से जोड़ने के लिए बधाई दी। प्रधानाचार्य ने निरंतरता बनाए रखने की बात कही कार्यक्रम के समापन पर प्रधानाचार्य उपेंद्र कुमार ने कहा कि मदर प्राइड स्कूल केवल शैक्षणिक शिक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि बच्चों में सांस्कृतिक दक्षता भी विकसित कर रहा है। उन्होंने बताया कि स्कूल के विद्यार्थी क्विज, प्रश्नोत्तरी और पेंटिंग जैसी गतिविधियों में भी अपनी प्रतिभा दिखा रहे हैं और इस प्रयास की निरंतरता बनी रहेगी। कार्यक्रम में शिक्षिकाएं मोनिका, आंचल, रोशनी और सबीहा सहित स्कूल परिवार के अन्य सदस्य उपस्थित रहे।

कथक नृत्य से महराजगंज की बालिका को मिली राज्यस्तरीय पहचान
उत्तर प्रदेश

कथक नृत्य से महराजगंज की बालिका को मिली राज्यस्तरीय पहचान

महराजगंज जनपद की 10 वर्षीय कलाकार सांची अग्रवाल ने 20 जनवरी को प्रयागराज में आयोजित माघ मेला 2026 के दौरान संस्कृति विभाग के कला संगम कार्यक्रम में कथक प्रस्तुति दी। कार्यक्रम का आयोजन उत्तर प्रदेश संस्कृति विभाग की ओर से सेक्टर तीन में किया गया, जिसमें प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से कलाकार शामिल हुए। कम उम्र में शास्त्रीय नृत्य की प्रस्तुति ने महराजगंज जिले की सांस्कृतिक पहचान को राज्यस्तरीय मंच पर पहुंचाया। बाल कलाकार की प्रस्तुति को दर्शकों और अतिथियों से व्यापक सराहना मिली। माघ मेला 2026 में कथक के माध्यम से रावण की शिवभक्ति का चित्रण प्रयागराज में माघ मेला 2026 के तहत आयोजित कला संगम कार्यक्रम में महराजगंज जनपद की सांची अग्रवाल ने कथक नृत्य के माध्यम से रावण की शिवभक्ति को मंच पर प्रस्तुत किया। यह प्रस्तुति त्रेता युग की उस धार्मिक अवधारणा पर केंद्रित रही, जिसमें रावण को एक महान शिवभक्त के रूप में देखा जाता है। उत्तर प्रदेश संस्कृति विभाग का आयोजन कार्यक्रम का आयोजन उत्तर प्रदेश संस्कृति विभाग द्वारा 20 जनवरी को मेला क्षेत्र के सेक्टर तीन में किया गया था। इसमें प्रदेश के विभिन्न अंचलों से आए कलाकारों ने पारंपरिक कला और संस्कृति से जुड़ी प्रस्तुतियां दीं। सांची इस मंच पर सबसे कम उम्र की प्रतिभागी रहीं। एकल और समूह दोनों प्रस्तुतियों में सहभागिता सांची ने लखनऊ संस्कृति विभाग की टीम के साथ मिलकर अवधी नृत्य प्रस्तुत किया। इसके बाद उन्होंने अकेले मंच संभालते हुए शिव तांडव पर आधारित कथक नृत्य किया, जिसे दर्शकों ने गंभीरता और भावनात्मक जुड़ाव के साथ देखा। सिसवां बाजार की बालिका की बहुआयामी प्रतिभा महराजगंज जिले के सिसवां बाजार नगर निकाय क्षेत्र की निवासी सांची अग्रवाल, इंजीनियर स्तुति अग्रवाल की पुत्री हैं। उन्हें संस्कृत मंत्रों का अच्छा ज्ञान है और वे सैकड़ों मंत्र कंठस्थ कर चुकी हैं। इसके साथ ही वह ताइक्वांडो में ब्लैक बेल्ट धारक हैं और मुक्केबाजी में भी सक्रिय हैं। राष्ट्रीय स्तर पर पहचान सांची को उनकी बहुआयामी प्रतिभा के लिए वर्ष 2025 का राष्ट्रीय बाल पुरस्कार नई दिल्ली में प्रदान किया जा चुका है। वह देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र दामोदर दास मोदी से भी मुलाकात कर चुकी हैं। प्रतिभा संरक्षण के लिए पारिवारिक निर्णय सांची की कला साधना को मजबूत आधार देने के लिए उनकी मां स्तुति अग्रवाल ने इंजीनियरिंग की नौकरी से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ली। उनका कहना है कि बालिका की परवरिश और उसकी क्षमताओं के पूर्ण विकास के लिए यह निर्णय लिया गया।

फिल्म इंडस्ट्री पर टिप्पणी के बाद एआर. रहमान विवाद में, सिनेमा जगत में बहस तेज
मनोरंजन

फिल्म इंडस्ट्री पर टिप्पणी के बाद एआर. रहमान विवाद में, सिनेमा जगत में बहस तेज

एआर. रहमान के बयान से जुड़ा विवाद, बेटे अमीन का समर्थन, अनूप जलोटा की प्रतिक्रिया और संगीतकार की सफाई—पूरी रिपोर्ट।

कोझिकोड बस छेड़छाड़ वीडियो : महिला पर दर्ज हुआ आत्महत्या के लिए उकसाने का F.I.R
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कोझिकोड बस छेड़छाड़ वीडियो : महिला पर दर्ज हुआ आत्महत्या के लिए उकसाने का F.I.R

केरल के कोझिकोड में एक बस यात्रा के दौरान सामने आए छेड़छाड़ के आरोप और उससे जुड़े वायरल वीडियो के बाद एक व्यक्ति की आत्महत्या का मामला सामने आया है। घटना के बाद पुलिस ने पीड़ित परिवार की शिकायत पर आत्महत्या के लिए उकसाने का केस दर्ज किया है। यह मामला सोशल मीडिया पर आरोपों की त्वरित सुनवाई और उसके परिणामों को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। पुलिस, साइबर इकाई और राज्य मानवाधिकार आयोग की भूमिका के बीच आगे की जांच पर सबकी निगाहें टिकी हैं। वायरल वीडियो से शुरू हुआ मामला कोझिकोड में हुई इस घटना की शुरुआत एक बस यात्रा के दौरान बने 29 सेकेंड के वीडियो से हुई, जिसमें एक महिला ने सहयात्री दीपक पर छेड़छाड़ का आरोप लगाया। वीडियो इंटरनेट मीडिया पर साझा होते ही तेजी से फैल गया और दीपक की तस्वीर कथित आरोपित के रूप में विभिन्न प्लेटफॉर्म पर प्रसारित होने लगी। ऑनलाइन बदनामी और पारिवारिक पक्ष परिजनों और मित्रों के अनुसार, वीडियो वायरल होने के बाद दीपक को लगातार ऑनलाइन टिप्पणियों, सवालों और तानों का सामना करना पड़ा। परिवार का कहना है कि इस डिजिटल दबाव ने उसे मानसिक रूप से तोड़ दिया, जिसके बाद उसने आत्मघाती कदम उठा लिया। पुलिस कार्रवाई और जांच की दिशा दीपक की मां की शिकायत पर पुलिस ने आत्महत्या के लिए उकसाने का मामला दर्ज किया है। शुरुआती स्तर पर मामले को अप्राकृतिक मृत्यु के रूप में दर्ज किए जाने को लेकर भी सवाल उठे हैं। जांच एजेंसियों का कहना है कि जिस मोबाइल फोन से वीडियो बनाया गया था, उसकी बरामदगी के प्रयास जारी हैं। मानवाधिकार आयोग और साइबर जांच राज्य मानवाधिकार आयोग ने घटना की जांच के आदेश दिए हैं। साथ ही, साइबर पुलिस को इंटरनेट मीडिया से हटाए गए डेटा की पड़ताल में शामिल किया गया है, ताकि वीडियो के प्रसार और उससे जुड़े डिजिटल ट्रेल की पूरी तस्वीर सामने आ सके। आगे क्या आरोप लगाने वाली महिला फिलहाल फरार बताई जा रही है। पुलिस का कहना है कि गिरफ्तारी के बाद ही मामले से जुड़े सभी तथ्यों की पुष्टि हो सकेगी। जांच पूरी होने तक सभी आरोपों की सत्यता की पुष्टि की जा रही है।

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