निजी स्कूल प्रबंधक ने 12 वर्षीय छात्रा से किया दुष्कर्म, POCSO एक्ट के तहत हुआ गिरफ्तार
उत्तर प्रदेश, देश

निजी स्कूल प्रबंधक ने 12 वर्षीय छात्रा से किया दुष्कर्म, POCSO एक्ट के तहत हुआ गिरफ्तार

उत्तर प्रदेश के देवरिया में शिक्षा के मंदिर को कलंकित करने वाला शर्मनाक मामला सामने आया है। सदर कोतवाली क्षेत्र के सिंधी मिल कॉलोनी स्थित एक निजी स्कूल (किड्स वैली स्कूल) के प्रबंधक देवेंद्र कुशवाहा पर कक्षा आठ की 12 वर्षीय छात्रा से कई बार दुष्कर्म करने का आरोप लगा है। छात्रा के पिता की तहरीर के अनुसार, प्रबंधक पिछले डेढ़ साल से परीक्षा में फेल करने और जान से मारने की धमकी देकर उसे डराता था। वह स्कूल के कार्यालय से जुड़े शौचालय में छात्रा के साथ हैवानियत करता था। लगातार गुमसुम रहने पर परिजनों को पता चला, जिसके बाद उन्होंने तत्काल कोतवाली पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने POCSO Act के तहत मुकदमा दर्ज कर आरोपी प्रबंधक को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस अब अन्य छात्राओं की सुरक्षा के संबंध में भी जांच कर रही है। स्कूल प्रबंधक ने 12 वर्षीय छात्रा से डेढ़ साल तक किया दुष्कर्म, POCSO एक्ट के तहत गिरफ्तार उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले में गुरु-शिष्या के पवित्र रिश्ते को तार-तार करने वाली एक शर्मनाक घटना सामने आई है। सदर कोतवाली थाना क्षेत्र के सिंधी मिल कॉलोनी स्थित किड्स वैली स्कूल के प्रबंधक देवेंद्र कुशवाहा पर इसी विद्यालय की कक्षा आठ में पढ़ने वाली 12 वर्षीय छात्रा से डेढ़ साल तक लगातार दुष्कर्म करने का गंभीर आरोप लगा है। इस घटना ने एक बार फिर स्कूल परिसरों में बच्चों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।प्रबंधक डराता रहा, छात्रा डेढ़ साल तक चुप रहीपीड़ित छात्रा के पिता ने कोतवाली पुलिस को दी गई तहरीर में बताया कि उनकी बेटी से स्कूल प्रबंधक देवेंद्र कुशवाहा अपनी शक्ति का दुरुपयोग करते हुए लगातार हैवानियत करता रहा। आरोपी प्रबंधक छात्रा को परीक्षा में फेल करने और पूरे परिवार को जान से मारने की धमकी देता था, जिसके कारण मासूम छात्रा डर के मारे करीब डेढ़ साल तक इस घिनौनी करतूत को अपने परिवार से छुपाती रही। गुमसुम बेटी ने खोला राज, परिजनों ने दर्ज कराई FIR हाल ही में, छात्रा लगातार डरी-सहमी और गुमसुम रहने लगी थी। बेटी की स्थिति देखकर परिजनों को चिंता हुई और बहुत पूछने पर उसने हिम्मत जुटाकर आपबीती सुनाई। यह सुनकर परिजनों के पैरों तले जमीन खिसक गई और पूरे परिवार में हड़कंप मच गया। छात्रा के पिता ने तत्काल कोतवाली पुलिस से संपर्क किया और आरोपी प्रबंधक के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग करते हुए नामजद लिखित तहरीर दी। पुलिस ने तत्काल की कार्रवाई, आरोपी गिरफ्तार मामले की गंभीरता को देखते हुए कोतवाली पुलिस ने तत्काल कार्रवाई की। सीओ सिटी संजय कुमार रेड्डी ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि आरोपी प्रबंधक देवेंद्र कुशवाहा के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) की संबंधित धाराओं, दुष्कर्म (धारा 376) और पॉक्सो अधिनियम (POCSO Act) के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। पुलिस ने आरोपी प्रबंधक को तुरंत गिरफ्तार कर लिया है और उससे गहन पूछताछ जारी है। छात्रा को मेडिकल परीक्षण के लिए भेजा गया है जांच के दायरे में अन्य छात्राएं और स्कूल प्रशासन पुलिस और प्रशासन अब इस बात की भी गहनता से जांच कर रहा है कि क्या आरोपी प्रबंधक ने इसी तरह की दरिंदगी किसी अन्य छात्र या छात्रा के साथ भी की है या नहीं। इस घटना ने स्कूल प्रशासन की जवाबदेही पर उंगली उठाई है कि आखिर एक संवेदनशील परिसर में इतनी बड़ी घटना डेढ़ साल तक कैसे चलती रही। परिजनों और स्थानीय नागरिकों में गहरा आक्रोश है और वे स्कूल की मान्यता रद्द करने की मांग कर रहे हैं।

यूपी में फिर झमाझम बारिश, कई जिलों में ऑरेंज अलर्ट जारी
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यूपी में फिर झमाझम बारिश, कई जिलों में ऑरेंज अलर्ट जारी

उत्तर प्रदेश में मानसूनी बारिश का दौर एक बार फिर तेज हो गया है। राजधानी लखनऊ समेत कानपुर, वाराणसी, गोरखपुर, देवरिया, बलिया, कुशीनगर और बरेली सहित कई जिलों में शुक्रवार रात से झमाझम वर्षा जारी है। मौसम विभाग ने पूर्वी यूपी के अधिकतर जिलों में 5 अक्टूबर तक ऑरेंज अलर्ट और पश्चिमी यूपी में 6–7 अक्टूबर तक भारी बारिश व ओलावृष्टि की चेतावनी दी है। गोरखपुर, आजमगढ़, मऊ, सिद्धार्थनगर, वाराणसी और बरेली में 40–50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने की संभावना है। विभाग ने लोगों को सतर्क रहने और अनावश्यक यात्रा से बचने की सलाह दी है। यूपी में फिर लौटी बारिश, कई जिलों में ऑरेंज अलर्ट उत्तर प्रदेश में एक बार फिर बारिश का सिलसिला तेज हो गया है। शुक्रवार रात से लखनऊ, वाराणसी, कानपुर, गोरखपुर, बरेली, देवरिया, बलिया और कुशीनगर सहित कई जिलों में लगातार वर्षा जारी है। इससे तापमान में गिरावट आई है और मौसम सुहावना हो गया है। पूर्वी यूपी में भारी बारिश, पश्चिमी यूपी में ओलावृष्टि का अलर्ट भारतीय मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, 3 से 5 अक्टूबर के बीच पूर्वी उत्तर प्रदेश में भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना है। जबकि 6 और 7 अक्टूबर को पश्चिमी यूपी के कई इलाकों में पश्चिमी विक्षोभ के असर से ओलावृष्टि और तेज हवाओं की चेतावनी जारी की गई है। हवाओं की रफ्तार 40–50 किमी प्रति घंटा तक मौसम विभाग ने बताया कि गाजीपुर, आजमगढ़, मऊ, बलिया, देवरिया, वाराणसी, गोरखपुर, सिद्धार्थनगर और बरेली में 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं। गरज-चमक के साथ बिजली गिरने का भी अनुमान है। राहत और सतर्कता दोनों जरूरी बारिश से तापमान में गिरावट और उमस से राहत मिली है, लेकिन तेज हवाओं और बिजली गिरने के खतरे को देखते हुए विभाग ने लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। किसानों को खेतों में सावधानी बरतने और खुले स्थानों पर जाने से बचने की हिदायत दी गई है। अगले सप्ताह तक बदलता रहेगा मौसम मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि पश्चिमी विक्षोभ की सक्रियता के चलते बारिश का यह दौर 7 अक्टूबर तक जारी रहेगा। इसके बाद प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में बारिश की तीव्रता में कमी आने की संभावना है।

सुप्रीम कोर्ट में सोनम वांगचुक की गिरफ्तारी पर चुनौती
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सुप्रीम कोर्ट में सोनम वांगचुक की गिरफ्तारी पर चुनौती

लद्दाख हिंसा मामले में गिरफ्तार सामाजिक कार्यकर्ता और शिक्षा सुधारक सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि आंगमो ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। उन्होंने गिरफ्तारी को असंवैधानिक बताते हुए तत्काल रिहाई की मांग की। गीतांजलि का कहना है कि अभी तक उन्हें हिरासत आदेश की प्रति नहीं दी गई है, जो नियमों का उल्लंघन है। उन्होंने यह भी कहा कि गिरफ्तारी के बाद से उनका पति से कोई संपर्क नहीं हो पाया है। वांगचुक को एनएसए (राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम) के तहत हिरासत में लेकर राजस्थान की जोधपुर जेल में रखा गया है। सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई जल्द हो सकती है। सुप्रीम कोर्ट पहुंची सोनम वांगचुक की पत्नी लद्दाख में हाल ही में हुए विरोध प्रदर्शनों और झड़पों के बाद शिक्षा सुधारक और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को 26 सितंबर को राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) के तहत गिरफ्तार किया गया था। वर्तमान में उन्हें राजस्थान की जोधपुर सेंट्रल जेल में रखा गया है। अब उनकी पत्नी गीतांजलि आंगमो ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर गिरफ्तारी को चुनौती दी है। याचिका में क्या कहा गया? गीतांजलि आंगमो ने संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दाखिल की है। उन्होंने कहा कि गिरफ्तारी का कोई वैध आधार नहीं है और अब तक उन्हें हिरासत आदेश की प्रति नहीं दी गई है, जो कानूनी प्रावधानों का उल्लंघन है। उनका कहना है कि वांगचुक से संपर्क न हो पाना गंभीर चिंता का विषय है। NSA पर सवाल गीतांजलि ने वांगचुक पर NSA लगाने को गलत ठहराया है। उनका कहना है कि वांगचुक ने कभी हिंसा को बढ़ावा नहीं दिया, बल्कि झड़पों के दौरान उन्होंने उपवास तोड़कर हिंसा रोकने की अपील की थी। मृतक परिवारों ने भी कहा कि इन घटनाओं में वांगचुक की कोई गलती नहीं थी। सुप्रीम कोर्ट में अगली सुनवाई सूत्रों के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट दशहरा अवकाश के बाद 6 अक्टूबर को इस मामले पर तत्काल सुनवाई कर सकता है। वांगचुक एक रेमन मैग्सेसे पुरस्कार विजेता और पर्यावरण कार्यकर्ता हैं, जो लद्दाख में शिक्षा और सामाजिक सुधारों के लिए जाने जाते हैं।

डोनाल्ड ट्रंप ने फार्मा आयात पर लगाया 100% टैरिफ, भारत पर पड़ेगा असर
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डोनाल्ड ट्रंप ने फार्मा आयात पर लगाया 100% टैरिफ, भारत पर पड़ेगा असर

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गुरुवार को घोषणा की कि 1 अक्टूबर 2025 से फार्मा प्रोडक्ट पर 100% टैरिफ लगाया जाएगा। यह कदम विशेषकर ब्रांडेड और पेटेंटेड दवाओं पर लागू होगा, जिससे भारतीय दवा कंपनियों पर बड़ा असर पड़ सकता है। ट्रंप ने सोशल मीडिया पर कहा कि जो कंपनियां अमेरिका में मैन्युफैक्चरिंग यूनिट नहीं लगातीं, उन्हें छूट नहीं मिलेगी। ट्रंप ने किचन कैबिनेट, फर्नीचर और बड़े ट्रकों पर भी 25–50% तक टैरिफ की घोषणा की। विशेषज्ञों के अनुसार, यह निर्णय भारतीय फार्मा निर्यात और अमेरिका की जेनेरिक दवा सप्लाई को प्रभावित कर सकता है। ट्रंप का बड़ा फैसला: 1 अक्टूबर से फार्मा प्रोडक्ट पर 100% टैरिफ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गुरुवार को एक बड़ा आर्थिक फैसला लेते हुए घोषणा की कि 1 अक्टूबर 2025 से अमेरिका में आयात होने वाले फार्मा प्रोडक्ट पर 100% टैरिफ लगाया जाएगा। यह नियम मुख्य रूप से ब्रांडेड और पेटेंटेड दवाओं पर लागू होगा। ट्रंप का कहना है कि केवल वही विदेशी कंपनियां छूट पाएंगी, जो अमेरिका में अपनी उत्पादन इकाइयां स्थापित करेंगी। भारतीय कंपनियों पर असर भारत अमेरिका को जेनेरिक दवाओं का सबसे बड़ा सप्लायर है। 2024 में भारत ने अमेरिका को करीब 31,624 करोड़ रुपये की दवाओं का निर्यात किया था, जबकि 2025 की पहली छमाही में यह आंकड़ा 32,505 करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है। डॉ. रेड्डीज, सन फार्मा, ल्यूपिन और अरबिंदो जैसी दिग्गज कंपनियां इस बाजार से भारी राजस्व अर्जित करती हैं। ऐसे में Trump Tariff on Indian Pharma से भारतीय कंपनियों को बड़ा झटका लग सकता है। दवाओं के अलावा अन्य उत्पादों पर भी असर ट्रंप ने सिर्फ दवा उद्योग ही नहीं, बल्कि कई अन्य आयातित उत्पादों पर भी नए शुल्क लगाए हैं। किचन कैबिनेट और बाथरूम वैनिटी पर 50% असबाबवाला फर्नीचर पर 30% भारी ट्रकों पर 25% ट्रंप का दावा है कि यह निर्णय राष्ट्रीय सुरक्षा और घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए लिया गया है। आलोचना और आशंकाएं विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम अमेरिकी दवा कंपनियों को फायदा पहुंचा सकता है, लेकिन इसके साथ ही मुद्रास्फीति और आर्थिक विकास में बाधा का खतरा भी बढ़ सकता है। पहले से ही पुराने टैरिफ का बोझ झेल रहे व्यवसायों के लिए यह नई घोषणा अतिरिक्त लागत और अनिश्चितता ला सकती है।

हाईकोर्ट के आदेश पर यूपी में जाति उल्लेख पर पूर्ण रोक, चुनावों पर दिखेंगे असर
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हाईकोर्ट के आदेश पर यूपी में जाति उल्लेख पर पूर्ण रोक, चुनावों पर दिखेंगे असर

इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश पर उत्तर प्रदेश सरकार ने जातिगत भेदभाव खत्म करने के लिए बड़ा कदम उठाया है। कार्यवाहक मुख्य सचिव दीपक कुमार ने सभी जिलाधिकारियों, पुलिस अधिकारियों और विभागों को निर्देश जारी कर दिए हैं कि अब से एफआईआर, गिरफ्तारी मेमो, पुलिस रिकॉर्ड, नोटिस बोर्ड, वाहनों और साइनबोर्ड्स पर जाति का उल्लेख नहीं होगा। पहचान के लिए माता-पिता का नाम लिखा जाएगा। जाति आधारित रैलियां, नारे और सोशल मीडिया कंटेंट पर भी रोक रहेगी। हालांकि, एससी/एसटी एक्ट जैसे मामलों में छूट मिलेगी। सरकार इसे सामाजिक समरसता और समानता बढ़ाने की दिशा में मील का पत्थर मान रही है। यूपी में जाति उल्लेख पर रोक, हाईकोर्ट के आदेश के बाद बड़ा फैसला इलाहाबाद हाईकोर्ट के निर्देशों के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने जातिगत भेदभाव खत्म करने की दिशा में अहम कदम उठाया है। कार्यवाहक मुख्य सचिव दीपक कुमार ने आदेश जारी कर कहा कि अब राज्य में किसी भी पुलिस दस्तावेज, सरकारी रिकॉर्ड या सार्वजनिक स्थल पर जाति का उल्लेख नहीं होगा। FIR और पुलिस रिकॉर्ड से हटेगा जाति उल्लेख निर्देशों के अनुसार, एफआईआर, गिरफ्तारी मेमो और अन्य पुलिस रिकॉर्ड्स में अब आरोपित या गवाह की जाति नहीं लिखी जाएगी। इसके स्थान पर माता-पिता के नाम लिखे जाएंगे। पुलिस नियमावली और मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) में संशोधन कर इस नियम को लागू किया जाएगा। वाहनों और सार्वजनिक स्थलों से हटेंगे जातीय संकेत थानों के नोटिस बोर्ड, पुलिस वाहनों और साइनबोर्ड्स पर लगे जातीय नारे या संकेत तुरंत हटाए जाएंगे। “यादव”, “जाट”, “गुर्जर” या किसी समुदाय विशेष से जुड़े नारों पर भी प्रतिबंध रहेगा। साथ ही राज्य में जाति आधारित रैलियों और प्रदर्शनों पर पूर्ण रोक लगा दी गई है। सोशल मीडिया पर भी निगरानी सरकार ने इंटरनेट मीडिया पर जाति आधारित कंटेंट पर सख्त निगरानी की घोषणा की है। उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई होगी। सभी जिलाधिकारियों और पुलिस अधीक्षकों को निगरानी समितियां गठित करने के निर्देश दिए गए हैं। SC/ST एक्ट में मिलेगी छूट हालांकि, एससी/एसटी एक्ट जैसे विशेष मामलों में आरोपितों या पीड़ितों की जाति का उल्लेख किया जा सकेगा ताकि कानूनी प्रक्रिया प्रभावित न हो। राजनीतिक असर और विशेषज्ञों की राय यह फैसला ऐसे समय आया है जब यूपी में पंचायत चुनाव की तैयारियां और विधानसभा चुनाव की रणनीतियां बन रही हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि इससे सामाजिक समरसता बढ़ेगी, हालांकि ग्रामीण क्षेत्रों में इसे प्रभावी बनाने के लिए अतिरिक्त जागरूकता जरूरी होगी।सपा और बसपा जैसे दलों पर इसका सीधा असर पड़ सकता है, क्योंकि उनकी राजनीति का बड़ा आधार जातिगत समीकरणों पर टिका है।

एलन मस्क ने H-1B विवाद पर दिसंबर में दी थी चेतावनी– “मैं ऐसी जंग छेड़ दूंगा ….”
दुनिया

एलन मस्क ने H-1B विवाद पर दिसंबर में दी थी चेतावनी– “मैं ऐसी जंग छेड़ दूंगा ….”

अमेरिकी टेक दिग्गज एलन मस्क ने H-1B वीजा विवाद पर दिसंबर में कड़ा रुख अपनाते हुए इसे अमेरिका की टेक इंडस्ट्री और अपनी कंपनियों के लिए बेहद अहम बताया। मस्क ने दिसंबर 2024 में कहा था कि “मैं इस मुद्दे पर ऐसी जंग छेड़ दूंगा जिसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती।” उन्होंने याद दिलाया था कि वे खुद H-1B वीजा पर अमेरिका आए थे और टेस्ला, स्पेसएक्स जैसी कंपनियां खड़ी कीं। मस्क का कहना था कि विदेशी प्रतिभा के बिना अमेरिका की टेक्नोलॉजी प्रगति संभव नहीं। हालांकि ट्रंप प्रशासन द्वारा भारी फीस लगाने से भारतीय कामगार सबसे ज्यादा प्रभावित हो सकते हैं। एलन मस्क ने H-1B वीजा विवाद पर जताई थी कड़ी नाराज़गी अमेरिकी टेक दिग्गज एलन मस्क ने H-1B वीजा सिस्टम को लेकर कड़ा रुख अपनाया था। दिसंबर 2024 में दिए बयान में मस्क ने कहा था कि “मैं इस मुद्दे पर ऐसी जंग छेड़ दूंगा जिसकी कल्पना भी नहीं कर सकते।” उन्होंने स्पष्ट किया कि H-1B वीजा न केवल टेस्ला और स्पेसएक्स जैसी उनकी कंपनियों के लिए जरूरी है, बल्कि पूरी अमेरिकी टेक इंडस्ट्री की रीढ़ है। मस्क का व्यक्तिगत अनुभव और समर्थन मस्क ने याद दिलाया था कि वे खुद H-1B वीजा पर अमेरिका आए थे और आगे चलकर टेस्ला, स्पेसएक्स और सैकड़ों इनोवेटिव कंपनियों की नींव रखी। उनका कहना है कि विदेशी टैलेंट ने अमेरिका को टेक्नोलॉजी और इनोवेशन के क्षेत्र में मजबूत बनाया। यही कारण है कि वे इस प्रोग्राम का प्रबल समर्थन करते हैं। भारतीय कामगारों पर असर हाल ही में ट्रंप प्रशासन द्वारा H-1B वीजा पर भारी फीस लगाए जाने से विवाद गहराया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इसका सबसे ज्यादा असर भारतीय पेशेवरों पर पड़ेगा, क्योंकि बड़ी संख्या में भारतीय आईटी और टेक प्रोफेशनल्स H-1B वीजा के जरिए अमेरिका में काम कर रहे हैं। सिस्टम में सुधार की जरूरत मस्क ने यह भी माना था कि H-1B सिस्टम “broken” है और इसमें सुधार की आवश्यकता है। उन्होंने सुझाव दिया था कि न्यूनतम वेतन बढ़ाया जाए और वीजा बनाए रखने के लिए वार्षिक शुल्क लगाया जाए, ताकि अमेरिकी श्रमिकों की भर्ती को प्राथमिकता मिले। टेक इंडस्ट्री की निर्भरता अमेजन, कॉग्निजेंट और इंफोसिस जैसी बड़ी कंपनियां भी H-1B वीजा प्रोग्राम के जरिए विदेशी कुशल कामगारों को अपनी टीम में शामिल करती हैं। नेशनल फाउंडेशन फॉर अमेरिकन पॉलिसी की एक रिपोर्ट के अनुसार, 2024 में टेस्ला H-1B वीजा देने वाली कंपनियों की लिस्ट में 16वें स्थान पर थी।

लखनऊ से लॉन्च हुआ ‘लेखपाल डैशबोर्ड’, अब तहसील कार्य होंगे ऑनलाइन
उत्तर प्रदेश

लखनऊ से लॉन्च हुआ ‘लेखपाल डैशबोर्ड’, अब तहसील कार्य होंगे ऑनलाइन

लखनऊ के सरोजनीनगर तहसील से गुरुवार को राजस्व परिषद अध्यक्ष अनिल कुमार ने ‘लेखपाल डैशबोर्ड’ का शुभारंभ किया। इस डैशबोर्ड के जरिए प्रदेश के 22 हजार लेखपाल अब आय, जाति, निवास प्रमाण पत्र, वरासत, दाखिल-खारिज व भूमि अभिलेख संशोधन जैसे कार्य ऑनलाइन कर सकेंगे। इससे लोगों को बार-बार तहसील के चक्कर लगाने से राहत मिलेगी और काम तय समय में निस्तारित होंगे। कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार, दूसरे चरण में गरीब सवर्ण प्रमाण पत्र, अविवादित वरासत, नक्शे व स्वामित्व परिवर्तन जैसी सेवाएं भी जोड़ी जाएंगी। यह पहल पारदर्शिता, तेजी और नागरिक सुविधा की दिशा में बड़ा कदम है। लखनऊ में शुरू हुआ ‘लेखपाल डैशबोर्ड’, नागरिकों को तहसील कार्यों में मिलेगी राहत लखनऊ। प्रदेश के नागरिकों को राजस्व संबंधी कामों में सुविधा देने के लिए गुरुवार को सरोजनीनगर तहसील से राजस्व परिषद अध्यक्ष अनिल कुमार ने ‘लेखपाल डैशबोर्ड’ का शुभारंभ किया। इस डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से अब आय, जाति, निवास प्रमाण पत्र, दाखिल-खारिज, वरासत, भूमि अभिलेख संशोधन व प्रमाणपत्र सत्यापन जैसे कार्य ऑनलाइन होंगे। 22 हजार लेखपाल होंगे ऑनलाइन सिस्टम से जुड़ाव प्रदेश के लगभग 22 हजार लेखपाल अब इस डैशबोर्ड के जरिए नागरिकों के लिए प्रमाण पत्र और राजस्व संबंधी सेवाएं उपलब्ध कराएंगे। इससे काम तय समय सीमा में निस्तारित होंगे और पारदर्शिता भी बढ़ेगी। दूसरे चरण में और सुविधाएं कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार, डैशबोर्ड के दूसरे चरण में गरीब सवर्ण प्रमाण पत्र, अविवादित वरासत, गांव और भूखंड का नक्शा, स्वामित्व परिवर्तन के बाद नए मालिक का नाम दर्ज कराने जैसी सुविधाएं भी शामिल की जाएंगी। पारदर्शिता और निगरानी में सुधार अनिल कुमार ने बताया कि डैशबोर्ड से सिंगल लॉगइन सिस्टम के जरिए लेखपालों के सभी काम एक प्लेटफॉर्म पर दिखेंगे। इससे न केवल नागरिकों को सुविधा मिलेगी बल्कि अधिकारियों को कार्य की निगरानी और समीक्षा आसान हो जाएगी। मुख्यमंत्री की डिजिटल पहल का हिस्सा उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के निर्देशानुसार, राजस्व परिषद सभी सेवाओं को डिजिटल करने के लिए प्रतिबद्ध है। इसमें एनआईसी की तकनीकी टीम और तहसील स्तर के अधिकारियों का महत्वपूर्ण योगदान रहा। यह पहल केवल तकनीकी सुधार नहीं, बल्कि राजस्व परिवार के हजारों कर्मचारियों की मेहनत और सहयोग का परिणाम है।

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