गाजियाबाद केस में कोरियन एप या गेम न मिलने पर जांच का आया नया मोड़
दिल्ली से सटे गाजियाबाद (उत्तर प्रदेश) की भारत सिटी सोसाइटी में तीन नाबालिग बहनों की आत्महत्या के मामले में पुलिस की जांच आगे बढ़ रही है। अधिकारियों के अनुसार, घटनास्थल से मिले सुसाइड नोट, डायरी और डिजिटल गतिविधियों की गहन पड़ताल की जा रही है।
जांच में सोशल मीडिया पहचान, पारिवारिक आर्थिक तंगी और मोबाइल फोन से जुड़े पहलू सामने आए हैं। पुलिस की साइबर और फॉरेंसिक टीमें अब बेचे गए मोबाइल फोन रिकवर कर पूरे घटनाक्रम की कड़ियां जोड़ने में जुटी हैं।

गाजियाबाद केस में डिजिटल पहचान और आर्थिक दबाव की जांच तेज
भारत सिटी सोसाइटी में तीन बहनों की आत्महत्या के बाद पुलिस का फोकस अब उनके डिजिटल व्यवहार और पारिवारिक परिस्थितियों पर है। पुलिस सूत्रों के अनुसार, किशोरियां सोशल मीडिया पर अलग पहचान बना चुकी थीं और उन्होंने अपने असली नाम छोड़कर कोरियन नाम रख लिए थे।
पुलिस को डायरी और सुसाइड नोट में लिखा मिला—
“हम कोरियन से प्यार करते हैं… जितना उन्हें चाहते थे, उतना घरवालों को भी नहीं. इंडियन आदमी से शादी कभी नहीं. कोरियन हमारी जान थी.”
मोबाइल फोन, सोशल मीडिया अकाउंट और सदमे की कड़ी
सूत्रों के मुताबिक, बहनों का एक सीक्रेट सोशल मीडिया अकाउंट था, जिसके फॉलोअर्स काफी ज्यादा थे। करीब 10 दिन पहले पिता चेतन कुमार को इसकी जानकारी हुई तो उन्होंने अकाउंट डिलीट कर दिया और फोन भी छीन लिया। इसके बाद तीनों बहनें गहरे सदमे में चली गईं।पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि सोशल मीडिया प्रोफाइल पिक्चर (DP) हटने पर वे खाना तक नहीं खाती थीं।
आर्थिक तंगी और पिता चेतन कुमार पर कर्ज
पिता चेतन कुमार की आर्थिक स्थिति बेहद खराब बताई गई है। शेयर ट्रेडिंग में नुकसान के बाद उन पर करीब 2 करोड़ रुपये का कर्ज था। घर का बिजली बिल (प्रीपेड रिचार्ज) भरने के लिए उन्होंने बेटियों का मोबाइल फोन तक बेच दिया था।सूत्रों के अनुसार, एक मोबाइल फोन तीन माह पहले और दूसरा 10 दिन पहले बेटियों से छीनकर बेचा गया था।
पुलिस की साइबर और फॉरेंसिक जांच
फॉरेंसिक टीम को उस कमरे से मां का मोबाइल फोन मिला, जहां से बहनों ने छलांग लगाई थी। शुरुआती जांच में पुलिस की साइबर टीम को मोबाइल में कोई कोरियन एप या गेम नहीं मिला है।अधिकारियों का कहना है कि बेचे गए दोनों मोबाइल फोन का आईएमईआई नंबर सर्विलांस टीम ट्रेस कर रही है। साथ ही, मौके पर मिले मोबाइल फोन को फॉरेंसिक जांच के लिए लैब भेजा जाएगा।
पिता का बयान और टास्क गेम का दावा
पत्रकारों से बातचीत में चेतन कुमार ने कहा कि बेटियां तीन साल से टास्क गेम खेल रही थीं और कोरिया जाने की जिद करती थीं। हालांकि, पुलिस की शुरुआती जांच में ऑनलाइन टास्क गेम की पुष्टि सामने नहीं आई है।
आगे क्या कार्रवाई
पुलिस का कहना है कि डिजिटल कनेक्शन और कोरियन दोस्तों से संपर्क के सवालों के जवाब मोबाइल रिकवरी के बाद स्पष्ट हो सकते हैं। जांच जारी है और सभी पहलुओं की पुष्टि की जा रही है।


