कथक नृत्य से महराजगंज की बालिका को मिली राज्यस्तरीय पहचान

महराजगंज जनपद की 10 वर्षीय कलाकार सांची अग्रवाल ने 20 जनवरी को प्रयागराज में आयोजित माघ मेला 2026 के दौरान संस्कृति विभाग के कला संगम कार्यक्रम में कथक प्रस्तुति दी। कार्यक्रम का आयोजन उत्तर प्रदेश संस्कृति विभाग की ओर से सेक्टर तीन में किया गया, जिसमें प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से कलाकार शामिल हुए।

कम उम्र में शास्त्रीय नृत्य की प्रस्तुति ने महराजगंज जिले की सांस्कृतिक पहचान को राज्यस्तरीय मंच पर पहुंचाया। बाल कलाकार की प्रस्तुति को दर्शकों और अतिथियों से व्यापक सराहना मिली।

सांची अग्रवाल कथक

माघ मेला 2026 में कथक के माध्यम से रावण की शिवभक्ति का चित्रण

प्रयागराज में माघ मेला 2026 के तहत आयोजित कला संगम कार्यक्रम में महराजगंज जनपद की सांची अग्रवाल ने कथक नृत्य के माध्यम से रावण की शिवभक्ति को मंच पर प्रस्तुत किया। यह प्रस्तुति त्रेता युग की उस धार्मिक अवधारणा पर केंद्रित रही, जिसमें रावण को एक महान शिवभक्त के रूप में देखा जाता है।

उत्तर प्रदेश संस्कृति विभाग का आयोजन

कार्यक्रम का आयोजन उत्तर प्रदेश संस्कृति विभाग द्वारा 20 जनवरी को मेला क्षेत्र के सेक्टर तीन में किया गया था। इसमें प्रदेश के विभिन्न अंचलों से आए कलाकारों ने पारंपरिक कला और संस्कृति से जुड़ी प्रस्तुतियां दीं। सांची इस मंच पर सबसे कम उम्र की प्रतिभागी रहीं।

एकल और समूह दोनों प्रस्तुतियों में सहभागिता

सांची ने लखनऊ संस्कृति विभाग की टीम के साथ मिलकर अवधी नृत्य प्रस्तुत किया। इसके बाद उन्होंने अकेले मंच संभालते हुए शिव तांडव पर आधारित कथक नृत्य किया, जिसे दर्शकों ने गंभीरता और भावनात्मक जुड़ाव के साथ देखा।

सिसवां बाजार की बालिका की बहुआयामी प्रतिभा

महराजगंज जिले के सिसवां बाजार नगर निकाय क्षेत्र की निवासी सांची अग्रवाल, इंजीनियर स्तुति अग्रवाल की पुत्री हैं। उन्हें संस्कृत मंत्रों का अच्छा ज्ञान है और वे सैकड़ों मंत्र कंठस्थ कर चुकी हैं। इसके साथ ही वह ताइक्वांडो में ब्लैक बेल्ट धारक हैं और मुक्केबाजी में भी सक्रिय हैं।

राष्ट्रीय स्तर पर पहचान

सांची को उनकी बहुआयामी प्रतिभा के लिए वर्ष 2025 का राष्ट्रीय बाल पुरस्कार नई दिल्ली में प्रदान किया जा चुका है। वह देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र दामोदर दास मोदी से भी मुलाकात कर चुकी हैं।

प्रतिभा संरक्षण के लिए पारिवारिक निर्णय

सांची की कला साधना को मजबूत आधार देने के लिए उनकी मां स्तुति अग्रवाल ने इंजीनियरिंग की नौकरी से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ली। उनका कहना है कि बालिका की परवरिश और उसकी क्षमताओं के पूर्ण विकास के लिए यह निर्णय लिया गया।

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