राप्ती सेतु पर हुए हादसे में झुलसे ठेला चालक की इलाज के दौरान हुई मौत
इटवा थाना क्षेत्र अंतर्गत राप्ती सेतु पर 4 मार्च की रात बाइक और ठेले की टक्कर में लगी आग से झुलसे ठेला चालक की इलाज के दौरान मौत हो गई। हादसे में गंभीर रूप से घायल व्यक्ति को लखनऊ मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया था, जहां शनिवार रात उसकी मृत्यु हो गई।
घटना के बाद क्षेत्र में शोक का माहौल है। मृतक अपने परिवार का मुख्य कमाने वाला था और उसके चार छोटे बच्चे हैं। पुलिस के अनुसार मामले की जानकारी है और तहरीर मिलने पर आगे की विधिक कार्रवाई की जाएगी।

राप्ती सेतु पर बाइक-ठेला टक्कर के बाद बाइक में लगी आग
इटवा थाना क्षेत्र अंतर्गत राप्ती सेतु पर 4 मार्च की रात करीब 10:30 बजे एक गंभीर हादसा हुआ था। जानकारी के अनुसार शाहपुर के वार्ड नंबर 3 अंबेडकर नगर निवासी ठेला चालक मानिकराम उर्फ महिनकू (43) रोज की तरह डुमरियागंज से सामान बेचकर घर लौट रहे थे।
बताया गया कि जैसे ही वह राप्ती सेतु पार करने वाले थे, पीछे से आ रही एक बाइक ने उनके ठेले में टक्कर मार दी। टक्कर के दौरान निकली चिंगारी से बाइक में आग लग गई। आग की चपेट में आने से ठेला चालक मानिकराम और बाइक चालक बब्लू निषाद (44) निवासी वार्ड नंबर 9 सुभाष नगर, शाहपुर गंभीर रूप से झुलस गए।
फायर ब्रिगेड ने आग बुझाई, घायलों को अस्पताल भेजा गया
घटना की सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड टीम मौके पर पहुंची और जल रही बाइक की आग पर काबू पाया। वहीं स्थानीय लोगों की मदद से 108 एम्बुलेंस के जरिए दोनों घायलों को सीएचसी बेवा पहुंचाया गया।
डॉक्टरों ने हालत गंभीर देखते हुए दोनों को अलग-अलग अस्पतालों में रेफर कर दिया। बाइक चालक बब्लू निषाद को जिला अस्पताल भेजा गया, जहां उनकी हालत स्थिर बताई जा रही है। वहीं ठेला चालक मानिकराम की हालत गंभीर होने पर पहले बस्ती रेफर किया गया और बाद में उन्हें लखनऊ मेडिकल कॉलेज भेजा गया।
लखनऊ मेडिकल कॉलेज में इलाज के दौरान हुई मौत
लखनऊ मेडिकल कॉलेज में मानिकराम का इलाज चल रहा था। लेकिन शनिवार रात करीब 11 बजे इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। मौत की खबर मिलते ही परिवार में कोहराम मच गया और पूरे इलाके में शोक की लहर फैल गई।
चार छोटे बच्चों के सिर से उठा पिता का साया
मानिकराम के चार छोटे बच्चे हैं। इनमें सबसे बड़ा बेटा करीब 12 वर्ष का है, दूसरा बेटा गोविंद 10 वर्ष, बेटी अंतिमा 8 वर्ष और सबसे छोटा बेटा मोहन मात्र 2 वर्ष का है। पिता की मौत से परिवार पर आर्थिक संकट गहरा गया है।
अंतिम दर्शन के इंतजार में रोते रहे मासूम बच्चे
रविवार दोपहर करीब 2 बजे तक मृतक का शव घर नहीं पहुंचा था। घर पर मौजूद छोटे-छोटे बच्चे आंखों में आंसू लिए पिता के अंतिम दर्शन का इंतजार करते रहे। यह दृश्य देखकर आसपास के लोग भी भावुक हो गए और परिवार को ढांढस बंधाते नजर आए।
पत्नी राधा पति की मौत की खबर सुनकर बेसुध हो गईं। परिवार के सामने अब जीविका की बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है।
ठेले पर कुल्फी-फालूदा बेचकर चलाते थे परिवार
स्थानीय लोगों के अनुसार मानिकराम गांव-गांव घूमकर ठेले पर कुल्फी, फालूदा और भूजा बेचकर किसी तरह अपने परिवार का पालन-पोषण करते थे। उनकी मौत के बाद अब पत्नी राधा पर चार बच्चों और घर की पूरी जिम्मेदारी आ गई है।
पुलिस ने कहा — तहरीर मिलने पर होगी कार्रवाई
इस संबंध में इटवा थाने के इंस्पेक्टर रविन्द्र सिंह ने बताया,
“मामला संज्ञान में है। अभी तक कोई तहरीर नहीं मिली है। तहरीर मिलने पर विधिक कार्रवाई की जाएगी।”


