शिक्षकों की गैरहाजिरी पर हाईकोर्ट सख्त, यूपी सरकार को दिए बड़े निर्देश
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश के प्राइमरी स्कूलों में शिक्षकों की उपस्थिति को लेकर सख्ती दिखाई है। न्यायमूर्ति पी.के. गिरी की पीठ ने बांदा की अध्यापिका इंदिरा देवी की याचिका पर सुनवाई करते हुए प्रदेश के मुख्य सचिव, एसीएस बेसिक व अन्य अधिकारियों को स्कूलों में अध्यापकों की उपस्थिति सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। कोर्ट ने कहा कि बच्चों के मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा कानून 2009 के तहत शिक्षा पाने के मौलिक अधिकारों का हनन नहीं होना चाहिए। कोर्ट ने डिजिटल अटेंडेंस और जिला-स्तरीय टास्क फोर्स की व्यवस्था लागू करने को कहा है। अगली सुनवाई 30 अक्टूबर को होगी।

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दिखाई सख्ती: यूपी के प्राइमरी स्कूलों में शिक्षकों की उपस्थिति होगी डिजिटल
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश के प्राइमरी स्कूलों में शिक्षकों की अनुपस्थिति पर कड़ा रुख अपनाया है। न्यायमूर्ति पी.के. गिरी की पीठ ने बांदा जनपद की शिक्षिका इंदिरा देवी की याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को निर्देश दिया कि शिक्षकों की उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए डिजिटल अटेंडेंस सिस्टम लागू किया जाए।
बच्चों के मौलिक अधिकारों के हनन पर चिंता
कोर्ट ने कहा कि बच्चों के लिए शिक्षा पाना उनका मौलिक अधिकार है, और अध्यापकों की गैरहाजिरी इस अधिकार का उल्लंघन है। अदालत ने टिप्पणी की—
“गुरु ब्रह्मा, गुरु विष्णु, गुरु देवो महेश्वरः, गुरु साक्षात् परब्रह्म तस्मै श्रीगुरुवे नमः।”
कोर्ट ने यह उद्धरण देते हुए कहा कि शिक्षक समाज के निर्माणकर्ता हैं, उनकी अनुपस्थिति बच्चों के भविष्य को प्रभावित करती है।
डिजिटल अटेंडेंस और टास्क फोर्स के आदेश
हाईकोर्ट ने प्रदेश के मुख्य सचिव, एसीएस बेसिक और संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि प्राइमरी स्कूलों में शिक्षकों की डिजिटल अटेंडेंस की व्यवस्था करें। साथ ही, जिला और ब्लॉक स्तर पर टास्क फोर्स गठित की जाए ताकि उपस्थिति की निगरानी की जा सके।
बांदा से जुड़ा मामला
मामले में याची शिक्षिका इंदिरा देवी कंपोजिट स्कूल तिंदवारी, बांदा में तैनात हैं। आरोप है कि 30 अगस्त 2025 को डीएम के निरीक्षण के दौरान वह स्कूल में अनुपस्थित थीं। बीएसए बांदा ने इस पर कार्रवाई की थी, जिसे शिक्षिका ने कोर्ट में चुनौती दी।
सरकार की तैयारी और चुनौतियाँ
यूपी सरकार ने पहले भी बेसिक स्कूलों में डिजिटल अटेंडेंस शुरू करने की योजना बनाई थी, लेकिन शिक्षक संघों के विरोध के चलते इसे रोक दिया गया था। अब हाईकोर्ट के निर्देश के बाद यह प्रक्रिया दोबारा शुरू हो सकती है। हालांकि, शिक्षकों के सामने पहले से ही टीईटी अनिवार्यता जैसी चुनौतियाँ हैं, जिनके बीच डिजिटल अटेंडेंस एक नई जिम्मेदारी के रूप में जुड़ सकती है।
शिक्षा की गुणवत्ता पर प्रभाव
कोर्ट ने कहा कि शिक्षकों की गैरमौजूदगी से बच्चों की उपस्थिति और सीखने की गुणवत्ता दोनों पर नकारात्मक असर पड़ता है। गरीब बच्चे निजी ट्यूशन का खर्च नहीं उठा सकते, इसलिए सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की उपस्थिति अनिवार्य है।
हाईकोर्ट इस मामले की अगली सुनवाई 30 अक्टूबर को करेगी।


