राहुल गांधी के भाषण पर राजनाथ सिंह और अमित शाह ने जताई आपत्ति

लोकसभा में बजट सत्र के दौरान सोमवार को नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के भाषण का एक हिस्सा कार्यवाही से हटा दिया गया। यह घटनाक्रम राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव के दौरान संसद भवन, नई दिल्ली में हुआ, जब लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सदन के नियमों का हवाला दिया।

विवाद अप्रकाशित सामग्री के उल्लेख और उसके प्रामाणिक होने को लेकर उठा, जिस पर सत्ता पक्ष ने कड़ी आपत्ति दर्ज की। इसके बाद सदन में हंगामा हुआ और कार्यवाही को दिन भर के लिए स्थगित करना पड़ा। पूरे घटनाक्रम में नियम, संसदीय मर्यादा और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े प्रश्न सामने आए।

राहुल गांधी भाषण

सदन की कार्यवाही आगे बढ़ते ही विवाद का दायरा व्यापक होता चला गया। नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने स्पष्ट किया कि वह किसी अप्रकाशित पुस्तक को सीधे उद्धृत नहीं कर रहे, बल्कि एक पत्रिका में प्रकाशित लेख के अंश पढ़ रहे हैं। उनका कहना था कि यह लेख पूर्व सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे के संस्मरण से संबंधित है और इसमें भारत-चीन सीमा से जुड़े संदर्भ मौजूद हैं।

सत्ता पक्ष की आपत्ति और नियमों का हवाला

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सदन में कहा, “राहुल गांधी पहले ये बताएं कि वो किताब प्रकाशित हुई है या नहीं हुई है, अगर हुई है तो वो तब इसका उल्लेख करें, अगर नहीं हुई है तो उसका उल्लेख करने का कोई औचित्य नहीं है।”

गृह मंत्री अमित शाह ने भी कहा कि यदि यह पत्रिका का लेख है तो उसे पुस्तक के रूप में प्रस्तुत नहीं किया जाना चाहिए और सदन को गुमराह नहीं किया जाना चाहिए।

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने हस्तक्षेप करते हुए कहा कि सदन में कही जाने वाली हर बात प्रामाणिक होनी चाहिए ताकि संसद की मर्यादा बनी रहे। उन्होंने नियम 349(i) का उल्लेख करते हुए अप्रकाशित सामग्री, पुस्तकों या अख़बारों की कटिंग पढ़ने पर आपत्ति जताई।

विपक्ष का विरोध और कार्यवाही स्थगन

इन आपत्तियों के बीच विपक्षी सांसदों ने विरोध शुरू कर दिया। हंगामे के कारण दोपहर डेढ़ बजे से शुरू हुई कार्यवाही लगभग 45 मिनट तक बाधित रही और बाद में इसे पहले 3 बजे, फिर 4 बजे तक के लिए स्थगित किया गया। अंततः लोकसभा की कार्यवाही मंगलवार तक के लिए स्थगित कर दी गई।

सदन के बाहर बयान

कार्यवाही स्थगित होने के बाद राहुल गांधी ने संसद परिसर के बाहर कहा, “मैं ये नहीं कह रहा हूं कि ये मैंने लिखा है. पूर्व आर्मी चीफ नरवणे ने ये किताब लिखी है… मैं उसी आर्टिकल को कोट कर रहा हूं, लेकिन मुझे बोलने नहीं दिया जा रहा है।”उन्होंने यह भी कहा, “यह 100 फ़ीसदी प्रामाणिक है।”

वहीं, भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने नियमों और संविधान के अनुच्छेद 19 का हवाला देते हुए राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर सावधानी बरतने की बात कही। केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि एक बार अध्यक्ष की रूलिंग आने के बाद उसी विषय पर बार-बार बोलना सदन के संचालन में बाधा पैदा करता है।

पूरे घटनाक्रम ने संसद में नियम, अभिव्यक्ति की सीमा और संसदीय परंपराओं को लेकर एक बार फिर बहस को केंद्र में ला दिया है।

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