होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित निकले भारत के LPG टैंकर
मध्य पूर्व में बढ़ते सैन्य तनाव के बीच शनिवार को भारतीय झंडे वाले दो एलपीजी टैंकर सुरक्षित रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य पार कर गए। सरकारी सूत्रों के अनुसार एलपीजी टैंकर ‘शिवालिक’ और ‘नंदा देवी’ को भारतीय नौसेना के मार्गदर्शन में सुरक्षित रास्ता मिला।
यह घटनाक्रम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन के बीच हालिया बातचीत के बाद सामने आया। भारत की ऊर्जा आपूर्ति और एलपीजी सप्लाई चेन के लिहाज से इस सुरक्षित पारगमन को अहम माना जा रहा है।

भारतीय नौसेना की सुरक्षा में पार हुआ होर्मुज जलडमरूमध्य
सरकारी सूत्रों के अनुसार एलपीजी टैंकर ‘शिवालिक’ को भारतीय नौसेना के सुरक्षा मार्गदर्शन में होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित निकाला गया। यह जहाज अब खुले समुद्र में पहुंच चुका है और उम्मीद है कि अगले दो दिनों में किसी भारतीय बंदरगाह पर पहुंचेगा। संभावित गंतव्यों में मुंबई या कांडला बंदरगाह शामिल बताए जा रहे हैं।
रणनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील माने जाने वाले इस समुद्री मार्ग से जहाजों को सुरक्षित निकालने के लिए नेवल एसेट्स लगातार निगरानी और मार्गदर्शन कर रहे हैं।
46,000 मीट्रिक टन एलपीजी लेकर आ रहा ‘नंदा देवी’
दूसरा एलपीजी टैंकर ‘नंदा देवी’ भी इस अहम समुद्री मार्ग से सफलतापूर्वक बाहर निकल चुका है। सरकारी सूत्रों के अनुसार यह जहाज 46,000 मीट्रिक टन से अधिक लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (LPG) लेकर भारत की ओर बढ़ रहा है।
ऊर्जा आपूर्ति के लिहाज से यह कार्गो महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि देश की एलपीजी सप्लाई चेन के लिए यह अतिरिक्त स्टॉक उपलब्ध कराएगा।

पीएम नरेंद्र मोदी और ईरानी राष्ट्रपति के बीच बातचीत के बाद फैसला
इस घटनाक्रम से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन के बीच क्षेत्रीय स्थिति और ऊर्जा आपूर्ति को लेकर उच्चस्तरीय बातचीत हुई थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस चर्चा की पुष्टि करते हुए कहा:
“ईरान के राष्ट्रपति डॉ. मसूद पेजेशकियान से बातचीत की, जिसमें क्षेत्र की गंभीर स्थिति पर चर्चा हुई। तनाव बढ़ने, आम नागरिकों की जान जाने और नागरिक बुनियादी ढांचे को हुए नुकसान पर गहरी चिंता व्यक्त की। भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और संरक्षा, साथ ही सामान और ऊर्जा के निर्बाध आवागमन की आवश्यकता, भारत की सर्वोच्च प्राथमिकताएं बनी हुई हैं। शांति और स्थिरता के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को दोहराया और बातचीत तथा कूटनीति का आग्रह किया।”
इसके अतिरिक्त विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भी ईरानी विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची के साथ चर्चा की थी।
भारत-ईरान के साझा हितों का जिक्र
भारत में ईरान के राजदूत मोहम्मद फताली ने संकेत दिया कि भारतीय जहाजों को सुरक्षित मार्ग दिया जा सकता है। उन्होंने कहा, “हां, क्योंकि भारत हमारा दोस्त है। आप इसे दो-तीन घंटों के भीतर देख लेंगे। हमारा मानना है कि इस क्षेत्र में ईरान और भारत के हित एक जैसे हैं।”
उन्होंने आगे कहा, “भारत में राजदूत के तौर पर मैं यह कहना चाहूंगा कि इस स्थिति में युद्ध के बाद भारत सरकार ने अलग-अलग क्षेत्रों में हमारी मदद की।”
अन्य भारतीय जहाजों को भी सुरक्षित निकालने की कोशिश
सूत्रों के अनुसार वर्तमान में लगभग 24 भारतीय जहाज होर्मुज जलडमरूमध्य के पश्चिमी हिस्से में फंसे हुए बताए जा रहे हैं। भारत सरकार लगातार ईरान के संपर्क में है ताकि इन जहाजों को भी सुरक्षित मार्ग उपलब्ध कराया जा सके।
इस बीच सऊदी अरब से कच्चा तेल लेकर आने वाला एक टैंकर भी शनिवार को भारत पहुंचने की उम्मीद है, जिसने सफलतापूर्वक होर्मुज जलडमरूमध्य पार कर लिया है।


