रेलवे की फॉर्मल ड्रेस बदली, अंग्रेजों के जमाने की पोशाक हटाई गई
भारतीय रेलवे में औपचारिक पोशाक से जुड़े एक अहम फैसले की घोषणा की गई है। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने शुक्रवार को दिल्ली में आयोजित 70वें अति विशिष्ट रेल सेवा पुरस्कार समारोह में रेलवे अधिकारियों और कर्मचारियों को संबोधित किया।
इस दौरान उन्होंने अंग्रेजी शासनकाल से चली आ रही बंद गले की काली पोशाक को रेलवे की औपचारिक ड्रेस सूची से हटाने का ऐलान किया। यह निर्णय औपनिवेशिक सोच को समाप्त करने, कार्यसंस्कृति में बदलाव और भविष्य की सुधार योजनाओं से जुड़ा बताया गया है।

रेलवे की औपचारिक पोशाक में बदलाव की घोषणा
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने भारतीय रेलवे में लंबे समय से चली आ रही औपनिवेशिक परंपराओं को समाप्त करने का आह्वान किया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अंग्रेजों के दौर में शुरू की गई बंद गले की काली पोशाक अब रेलवे की औपचारिक ड्रेस नहीं रहेगी।
पुरस्कार समारोह में हुआ ऐलान
यह घोषणा शुक्रवार को दिल्ली में आयोजित 70वें अति विशिष्ट रेल सेवा पुरस्कार समारोह के दौरान की गई। इस कार्यक्रम में रेलवे के सौ अधिकारियों को उनके विशिष्ट कार्यों के लिए सम्मानित किया गया।
औपनिवेशिक सोच को हटाने पर जोर
रेल मंत्री ने कहा, “औपनिवेशिक मानसिकता को खोज-खोजकर पूरी तरह हटाना होगा। चाहे वह काम करने का तरीका हो या पहनावा।” उन्होंने बताया कि यह पोशाक निरीक्षण, परेड और वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में पहनी जाती थी, हालांकि यह ग्रुप-डी, ट्रैकमैन और तकनीकी स्टाफ पर लागू नहीं थी।
2026 के लिए सुधारों का रोडमैप
रेल मंत्री ने वर्ष 2026 के लिए छह बड़े संकल्प सामने रखते हुए “52 हफ्ते, 52 सुधार” का लक्ष्य बताया। इसमें सेवा, उत्पादन, निर्माण, अनुरक्षण और यात्री सुविधाओं में सुधार शामिल हैं।
नवाचार, तकनीक और सुरक्षा पर फोकस
उन्होंने बताया कि रेलवे में तकनीक, नवाचार और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को खुले मन से अपनाने के लिए नई तकनीकी नीति बनाई जा रही है। अगले वर्ष 12 नए इनोवेशन अवार्ड दिए जाएंगे और इनोवेशन पोर्टल लॉन्च किया जाएगा। साथ ही, ट्रैक मेंटेनेंस, सुरक्षा, प्रशिक्षण और प्रतिभा विकास को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी।


