100 रुपये से अधिक सामान पर शुल्क से सीमा क्षेत्रों में असर, विरोध तेज
नेपाल की बालेन शाह सरकार के नए कस्टम शुल्क फैसले को लेकर रविवार को काठमांडू में विरोध प्रदर्शन हुआ। मधेश क्षेत्र से आए युवाओं ने 100 रुपये से अधिक सामान पर शुल्क लगाने के नियम के खिलाफ सड़क पर उतरकर विरोध जताया।
इस फैसले का असर सीमावर्ती जिलों के लोगों पर सीधे पड़ रहा है, जहां दैनिक जरूरतों के लिए भारत-नेपाल आवाजाही आम है। बढ़ते विरोध के बीच सत्ता और विपक्ष दोनों के सांसदों ने गृहमंत्री से मिलकर नीति पर पुनर्विचार की मांग उठाई है।

काठमांडू में विरोध, मधेश से पहुंचे युवाओं का प्रदर्शन
रविवार को काठमांडू के माइतीघर क्षेत्र में बड़ी संख्या में मधेशी युवा एकत्र हुए और कस्टम शुल्क नियम के खिलाफ प्रदर्शन किया। रूपनदेही, लुंबिनी, सिरहा, भैरहवां, सिद्धार्थनगर और नेपालगंज जैसे सीमावर्ती इलाकों से पहुंचे प्रदर्शनकारियों ने इस नीति को तत्काल वापस लेने की मांग की। उनका कहना है कि यह निर्णय सीधे तौर पर उनके रोजमर्रा के जीवन को प्रभावित कर रहा है।
100 रुपये से अधिक सामान पर शुल्क का प्रावधान
नेपाल सरकार ने हाल ही में यह नियम लागू किया है कि भारत से 100 रुपये से अधिक मूल्य का सामान लाने पर अनिवार्य कस्टम शुल्क देना होगा। यह बदलाव खास तौर पर उन लोगों को प्रभावित कर रहा है, जो सीमावर्ती क्षेत्रों में रहते हैं और दैनिक जरूरतों के लिए नियमित रूप से सीमा पार करते हैं। पहले ये सामान भारतीय बाजार से कम कीमत पर उपलब्ध हो जाता था।
सांसदों ने गृहमंत्री से की मुलाकात
मधेसी सांसदों ने इस मुद्दे को लेकर नेपाल के गृहमंत्री से मुलाकात की। सिरहा-4 से सांसद तपेश्वर यादव ने नेपाल-भारत के पारंपरिक सामाजिक और सांस्कृतिक संबंधों का हवाला देते हुए कहा कि कठोर नीति इन रिश्तों को प्रभावित कर सकती है। वहीं सिरहा-2 के सांसद शिवशंकर ने कहा कि तस्करी नियंत्रण जरूरी है, लेकिन सभी नागरिकों पर एक समान नियम लागू करना व्यावहारिक नहीं है।
सरकार ने फैसले का किया बचाव
सरकार ने अपने निर्णय का बचाव करते हुए कहा है कि यह कदम अवैध तस्करी, मादक पदार्थों के कारोबार और मनी लॉन्ड्रिंग को रोकने के लिए उठाया गया है। गृहमंत्री के अनुसार, सीमा क्षेत्रों में लंबे समय से इन गतिविधियों को लेकर चिंता बनी हुई थी, जिसके चलते यह सख्त कदम उठाना जरूरी समझा गया।
बढ़ता दबाव और संभावित असर
नेपाल मामलों के जानकार वरिष्ठ पत्रकार यशोदा श्रीवास्तव के अनुसार, यह मुद्दा अब राजनीतिक और सामाजिक रूप से संवेदनशील होता जा रहा है। उनका कहना है कि यदि सरकार ने जल्द संतुलित समाधान नहीं निकाला, तो मधेश क्षेत्र में असंतोष और बढ़ सकता है और इसका व्यापक प्रभाव देखने को मिल सकता है।
(इस रिपोर्ट के संकलन में महराजगंज से नीलोत्पल दुबे का महत्वपूर्ण सहयोग रहा।)


