केजीएमयू दुष्कर्म व धर्मांतरण मामला: गिरफ्तारी के बाद भी हालात असामान्य
केजीएमयू से जुड़े दुष्कर्म और धर्मांतरण मामले में आरोपी जूनियर रेजिडेंट डॉक्टर रमीज मलिक को पुलिस ने शुक्रवार को लखनऊ में गिरफ्तार कर लिया। आरोपी पर शादी का झांसा देकर शारीरिक शोषण, जबरन गर्भपात और उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म परिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज है।
इस गिरफ्तारी के बावजूद केजीएमयू में हालात सामान्य नहीं हो सके हैं। कुलपति कार्यालय में हुए हंगामे और तोड़फोड़ के मामले में एफआईआर दर्ज न होने से शिक्षक, कर्मचारी और रेजिडेंट डॉक्टरों में आक्रोश है और आंदोलन की तैयारी शुरू हो गई है।

आरोपी डॉक्टर रमीज मलिक की गिरफ्तारी
केजीएमयू से जुड़े गंभीर आरोपों वाले मामले में पुलिस ने जूनियर रेजिडेंट डॉक्टर रमीज मलिक को शुक्रवार को गिरफ्तार कर लिया। पीड़िता की तहरीर पर चौक पुलिस ने रमीज के खिलाफ शादी का झांसा देकर शारीरिक संबंध बनाने, महिला की सहमति के बिना गर्भपात कराने, प्रतिष्ठा को क्षति पहुंचाने की धमकी देने और उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म परिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम, 2021 की धाराओं में मुकदमा दर्ज किया था। आरोपी पर 50 हजार रुपये का इनाम भी घोषित किया गया था।
पुलिस को कैसे मिली आरोपी की जानकारी
डीसीपी पश्चिम विश्वजीत श्रीवास्तव ने बताया कि पुलिस को सूचना मिली थी कि आरोपी ठाकुरगंज स्थित अपने किराए के मकान पर सामान लेने आया है और इसके बाद कोर्ट में सरेंडर के इरादे से वकील से मिलने जाने वाला है। इसी सूचना के आधार पर पुलिस टीम ने दिन में सिटी स्टेशन के पास से उसे गिरफ्तार कर लिया।
अन्य महिला डॉक्टर के आरोप और परिजनों की भूमिका
जांच के दौरान महिला डॉक्टर के बयान भी दर्ज किए गए, जिन्होंने शादी का झांसा देकर यौन शोषण और जबरन गर्भपात कराने का आरोप लगाया। महिला डॉक्टर का यह भी कहना है कि आरोपी ने धर्म परिवर्तन कराकर निकाह किया, जिसमें उसके माता-पिता भी शामिल थे। पुलिस ने इस मामले में आरोपी के पिता सलीमुद्दीन और मां खतीजा को 5 जनवरी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था।
केजीएमयू में हंगामा, एफआईआर न होने पर नाराजगी
आरोपी की गिरफ्तारी के बावजूद केजीएमयू का माहौल तनावपूर्ण बना हुआ है। कुलपति कार्यालय में हुए हंगामे और तोड़फोड़ के मामले में केजीएमयू प्रशासन की ओर से प्रॉक्टर प्रो. आरएएस कुशवाहा द्वारा दी गई तहरीर पर अब तक एफआईआर दर्ज नहीं हुई है। इसी को लेकर केजीएमयू शिक्षक संघ, कर्मचारी एसोसिएशन, नर्सिंग एसोसिएशन और रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन ने सोमवार को संयुक्त बैठक बुलाने का फैसला किया है।
राज्य महिला आयोग की मौजूदगी में हुआ था बवाल
धर्मांतरण के प्रयास के मामले में शुक्रवार को राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष अपर्णा यादव के केजीएमयू पहुंचने के दौरान वहां नारेबाजी और हंगामा हुआ था। इस दौरान कुलपति कार्यालय में तोड़फोड़ हुई, दरवाजे की सिटकनी और सामान क्षतिग्रस्त हुआ तथा कुलपति का सीयूजी नंबर वाला मोबाइल फोन भी गुम हो गया।
सरकारी कामकाज बाधित होने के आरोप
केजीएमयू शिक्षक संघ के अध्यक्ष प्रो. केके सिंह के अनुसार, हंगामे के समय शिक्षकों के प्रमोशन साक्षात्कार और एमबीबीएस की परीक्षाएं चल रही थीं, जो प्रभावित हुईं। दो महिला शिक्षकों को करीब दो घंटे तक बंधक बनाए जाने और कुलपति कार्यालय पर लगभग तीन घंटे तक उपद्रवियों के कब्जे का आरोप भी लगाया गया है।
परिसर में सुरक्षा बढ़ी, असंतोष बरकरार
हंगामे के बाद शनिवार को पूरे केजीएमयू परिसर में पुलिस बल तैनात रहा और कुलपति कार्यालय के आसपास सुरक्षा कड़ी कर दी गई। वहीं, पैथोलॉजी विभाग की महिला रेजिडेंट डॉक्टर के आरोपों और हालिया घटनाओं के बाद विभाग के डॉक्टर किसी अनहोनी की आशंका के चलते अपने केबिन में नहीं बैठ रहे हैं। सोमवार की बैठक के बाद केजीएमयू में आंदोलन की दिशा तय की जाएगी।


