जब संकट में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने विपक्ष को भी कर दिया था एकजुट
भारतीय जनता पार्टी ने सात बार सांसद पंकज चौधरी को उत्तर प्रदेश का नया प्रदेश अध्यक्ष बनाया है। 14 दिसंबर को उनके नाम की आधिकारिक घोषणा हुई।सिद्धार्थनगर के पूर्व भाजपा जिलाध्यक्ष नरेंद्र मणि त्रिपाठी ने पंकज चौधरी की सांगठनिक क्षमता का उदाहरण साझा किया। उन्होंने बताया कि 2010 में जिला पंचायत अध्यक्ष चुनाव के दौरान पंकज चौधरी ने लोकतांत्रिक प्रक्रिया के उल्लंघन के विरोध में धुर विरोधी नेताओं को एक मंच पर खड़ा कर दिया था। उस विरोध सभा में सूर्य प्रताप शाही और माता प्रसाद पांडेय शामिल हुए थे।

पंकज चौधरी बने यूपी भाजपा के नए प्रदेश अध्यक्ष
भारतीय जनता पार्टी ने संगठन को नई दिशा देने के उद्देश्य से सात बार के सांसद पंकज चौधरी को उत्तर प्रदेश भाजपा का नया प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किया है। 14 दिसंबर को उनके नाम की औपचारिक घोषणा के साथ ही यह स्पष्ट हो गया कि पार्टी नेतृत्व ने संगठनात्मक अनुभव और नेतृत्व क्षमता को प्राथमिकता दी है।
निर्विरोध चयन से पहले ही तय हो गई थी तस्वीर
शनिवार को प्रदेश अध्यक्ष पद के लिए पंकज चौधरी ने पांच सेट में नामांकन दाखिल किया। किसी अन्य दावेदार के सामने न आने से उनका चयन उसी समय लगभग तय माना जा रहा था। यह फैसला पार्टी के भीतर उनके मजबूत संगठनात्मक प्रभाव को दर्शाता है।
सिद्धार्थनगर से जुड़ा पुराना संगठनात्मक उदाहरण
सिद्धार्थनगर के पूर्व भाजपा जिलाध्यक्ष नरेंद्र मणि त्रिपाठी ने बताया कि, पंकज चौधरी की असली पहचान केवल चुनावी जीत नहीं, बल्कि संकट के समय संगठन को एकजुट करने की क्षमता रही है। उन्होंने 2010 की एक घटना का उल्लेख करते हुए बताया कि जिला पंचायत अध्यक्ष चुनाव के दौरान लोकतांत्रिक प्रक्रिया के उल्लंघन का मामला सामने आया था। उस समय वह पार्टी के जिलाध्यक्ष का पद संभाल रहे थे उस समय प्रदेश अध्यक्ष सूर्यप्रताप शाही थे। यह वह समय था जब संतकबीरनगर से आकर पूर्व सांसद स्व. भालचंद्र यादव अपने दोनों बेटों के लिए बुद्ध की धरती पर राजनीतिक जमीन तैयार करने के लिए डेरा डाले बैठे थे। बड़े बेटे प्रमोद यादव को जिला पंचायत अध्यक्ष तो छोटे सुबोध को विधानसभा चुनाव में उतारने की मंशा थी। उस समय प्रदेश में बसपा की सरकार थी और भालचंद्र बसपा के कद्दावर नेताओं में गिने जाते थे।
पर्चा दाखिले से पहले अगवा किया प्रस्तावक समर्थक
नरेंद्र मणि बताते हैं कि 2010 के जिला पंचायत अध्यक्ष पद के लिए सईद भ्रमर के बाद सिद्धार्थनगर की दूसरी जिला पंचायत अध्यक्ष भाजपा की तरफ से साधना चौधरी फिर मैदान में थीं। उन्होंने बताया कि जिला पंचायत के गठन उपरांत सिद्धार्थनगर के पहले जिला पंचायत अध्यक्ष 1995 में सईद भ्रमर तो दूसरी साधना चौधरी थीं जिनका निर्वाचन 2000 में हुआ था। 2010 में पार्टी ने फिर साधना को मौका दिया था, लेकिन वह नामांकन जमा करती कि उससे पहले लग्जरी वाहनों के जरिये साधना के प्रस्तावक समर्थक अगवा कर लिए गये। आरोप भालचंद्र पर लगा, लेकिन बसपा की सरकार थी तो कोई कार्रवाई नहीं हुई। पर्चा दाखिल न कर पाने के कारण भालचंद्र के बड़े बेटे प्रमोद निर्विरोध निर्वाचित हो गये।
जब विरोधी दल भी एक मंच पर आए
सिद्धार्थनगर के ब्यूरो प्रमुख रहे वरिष्ठ पत्रकार यशोदा श्रीवास्तव बताते हैं कि साधना चौधरी पंकज चौधरी की बड़ी बहन हैं। जब बहन के प्रस्तावक व समर्थक के अगवा हो जाने की खबर पंकज चौधरी को मिली वह अकेले सिद्धार्थनगर पहुंच गये। 2010 में वह सांसद नहीं थे, लेकिन पहले सांसद रह चुके थे। 2009 में उन्हें स्व. हर्षवर्धन से हार जाना पड़ा था। पंकज चौधरी के सिद्धार्थनगर पहुंचते ही महराजगंज से बड़ी तादाद में उनके समर्थक पहुंच गए। लोकतांत्रिक प्रक्रिया के विपरीत समर्थक व प्रस्तावक के अगवा होने की सूचना उन्होंने तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष सूर्य प्रताप शाही को दी और खुद जिले में रहकर विपक्षी नेताओं से हालात पर चर्चा कर सभी को अपने पक्ष में एक जुट कर लिया। दूसरे दिन मुख्यालय के सांड़ी तिराहे पर वृहद विरोध सभा हुई जिसमें मौजूदा कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही व मौजूदा समय में नेता प्रतिपक्ष व सपा के कद्दावर नेता माता प्रसाद पांडेय एक साथ विरोध मंच पर खड़े हुए। दो धुर विरोधियों को एक मंच पर खड़ा कर पंकज चौधरी ने उसी समय अपनी क्षमता प्रमाणित कर दी थी। विरोध मंच के साथ बसपा को छोड़ सभी राजनीतिक दलों के नेता शामिल हुए और प्रदर्शन के बाद कलेक्टर को संयुक्त ज्ञापन दिया गया। पार्टी के दबाव में प्रशासन ने एक तरफा रवैया अपनाए रखा। लेकिन पंकज चौधरी ने समूचे विपक्ष को एक साथ खड़ा कर अपनी चौधराहट दिखाई थी। हालांकि 2012 में अविश्वास लाकर प्रमोद यादव से जिला पंचायत की कुर्सी छीन ली गई और पांव जमाने के लिए अथक प्रयास कर रहे भालचंद्र को दोनों बेटों के साथ बुद्ध की धरा से वापस जाना पड़ा।

संगठन के लिए क्यों अहम है यह नियुक्ति
राजनीतिक जानकारों के अनुसार, ऐसे अनुभवों के कारण ही पार्टी ने पंकज चौधरी को प्रदेश अध्यक्ष जैसी बड़ी जिम्मेदारी सौंपी है। यह नियुक्ति आगामी राजनीतिक रणनीतियों और संगठनात्मक मजबूती के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
(लेखन संकलन के लिए विशेष आभार वरिष्ठ पत्रकार नीलोत्पल दुबे)


