दिवाली की रात दहेज की बलि चढ़ी नवविवाहिता, बस्ती के बडौगी गांव में हड़कंप
बस्ती जिले के सोनहा थाना क्षेत्र के बडौगी गांव में दिवाली की रात नवविवाहिता आलिया खातून की संदिग्ध मौत ने गांव को दहला दिया। शादी के 11 महीने बाद ही उसका शव फांसी के फंदे पर लटका मिला। मायके पक्ष ने पति मजहर अली व ससुरालवालों पर दहेज हत्या का आरोप लगाते हुए कहा कि नकद व बाइक की मांग पूरी न होने पर उसे प्रताड़ित किया जाता था। पुलिस ने पहले आत्महत्या मानने की कोशिश की, पर FIR दर्ज होने के बाद 304B, 498A व 34 धाराओं में मुकदमा दर्ज हुआ।

दिवाली की रात दहेज की भेंट चढ़ी नवविवाहिता, बस्ती के बडौगी गांव में मातम
बस्ती। जब देश दीपों की रौशनी में जश्न मना रहा था, तब बस्ती जिले के सोनहा थाना क्षेत्र के बडौगी गांव में एक परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। नवविवाहिता आलिया खातून (पत्नी मजहर अली) का शव दिवाली की रात फांसी के फंदे पर लटका मिला।
शादी के 11 महीने बाद संदिग्ध मौत
आलिया का निकाह पिछले वर्ष नवंबर में मजहर अली से हुआ था। मायके पक्ष के अनुसार, विवाह के कुछ ही महीनों बाद ससुराल वालों ने नकद राशि, बाइक और अन्य सामान की मांग शुरू कर दी थी। मांग पूरी न होने पर आलिया को मानसिक व शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया जाता था।
मायके पक्ष का आरोप: हत्या को आत्महत्या बताया गया
मृतका के भाई वसीम ने पुलिस को बताया, “बहन को मारकर फंदे पर लटका दिया गया।” उन्होंने पति मजहर अली सहित चार लोगों पर दहेज हत्या का आरोप लगाते हुए सोनहा थाने में एफआईआर दर्ज कराई। पुलिस ने आईपीसी की धारा 304B, 498A और 34 के तहत मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की है।
पुलिस की भूमिका पर उठे सवाल
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि पुलिस ने पहले मामले को आत्महत्या बताकर लीपापोती की कोशिश की। हंगामे के बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया। थाना प्रभारी ने कहा कि “आरोपी की तलाश जारी है, निष्पक्ष जांच होगी।”
गांव में शोक और विरोध प्रदर्शन
आलिया की मौत से पूरे गांव में मातम और आक्रोश फैल गया। ग्रामीण महिलाओं ने दहेज प्रथा के खिलाफ नारे लगाए और न्याय की मांग की। मृतका के परिवार ने कहा कि जब तक आरोपी गिरफ्तार नहीं होंगे, वे अंतिम संस्कार नहीं करेंगे।
दहेज हत्या के बढ़ते मामले चिंता का विषय
एनसीआरबी के आंकड़ों के अनुसार, उत्तर प्रदेश में हर साल सैकड़ों महिलाएं दहेज की बलि चढ़ती हैं। ग्रामीण इलाकों जैसे बस्ती में यह समस्या और गंभीर रूप ले रही है। आलिया की मौत एक बार फिर समाज के उस काले सच को उजागर करती है कि रोशनी के त्योहार में भी अंधेरा अब भी कायम है।


