उत्तर प्रदेश: योगी सरकार ने बीएड अभ्यर्थियों के लिए खोला प्राइमरी टीचिंग का रास्ता
उत्तर प्रदेश सरकार ने दीपावली से पहले बीएड डिग्री धारकों को बड़ा तोहफा दिया है। राज्य के शिक्षा विभाग ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के पालन में Professional Development Programme for Elementary Teachers (PDPET) ब्रिज कोर्स को मंजूरी दे दी है। यह छह महीने का कोर्स NIOS द्वारा संचालित किया जाएगा, जिसकी आवेदन प्रक्रिया 1 नवंबर से शुरू होगी। इस कोर्स को पूरा करने के बाद बीएड डिग्रीधारी अब बीटीसी/डीएलएड के समकक्ष माने जाएंगे और कक्षा 1 से 5 तक पढ़ाने के पात्र होंगे। प्रशिक्षण दिसंबर 2025 से मई 2026 तक चलेगा।

योगी सरकार का बड़ा फैसला: बीएड डिग्रीधारकों के लिए शुरू होगा PDEPT ब्रिज कोर्स
उत्तर प्रदेश सरकार ने दीपावली से पहले बीएड डिग्रीधारकों को राहत देने वाला बड़ा निर्णय लिया है। राज्य के शिक्षा विभाग ने Professional Development Programme for Elementary Teachers (PDPET) यानी छह महीने के ब्रिज कोर्स को मंजूरी दे दी है। यह निर्णय लंबे समय से चल रहे विवाद को समाप्त करेगा और हजारों अभ्यर्थियों के लिए रोजगार के नए अवसर खोलेगा।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद तैयार हुआ ब्रिज कोर्स
पिछले वर्ष सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया था कि बीएड डिग्रीधारी प्राथमिक कक्षाओं (कक्षा 1 से 5) में पढ़ाने के पात्र नहीं होंगे। केवल बीटीसी या डीएलएड धारक ही ऐसा कर सकेंगे। इस फैसले से बीएड उम्मीदवार अपात्र हो गए थे, जिससे प्रदेश में व्यापक असंतोष था। अब योगी सरकार के इस निर्णय से उन्हें फिर से पात्रता का अवसर मिलेगा।
आवेदन प्रक्रिया और अवधि
NIOS (नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ ओपन स्कूलिंग) इस ब्रिज कोर्स का संचालन करेगा। PDEPT कोर्स के लिए आवेदन प्रक्रिया 1 नवंबर 2025 से शुरू होगी। इच्छुक उम्मीदवार dledbr.nios.ac.in वेबसाइट पर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। छह महीने के इस ऑनलाइन कोर्स की ट्रेनिंग दिसंबर 2025 से मई 2026 तक चलेगी।
क्या सिखाया जाएगा कोर्स में
यह कोर्स प्राथमिक शिक्षा से संबंधित टीचिंग मैथड, कक्षा प्रबंधन, बाल मनोविज्ञान और शिक्षण कौशल पर आधारित है। इसे पूरा करने के बाद बीएड डिग्रीधारी उम्मीदवारों को बीटीसी/डीएलएड के बराबर मान्यता मिलेगी।
अभ्यर्थियों में उत्साह
सरकार के इस कदम से बीएड अभ्यर्थियों में खुशी की लहर है। कई वर्षों से लंबित यह मामला अब हल हो गया है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह निर्णय न केवल रोजगार के अवसर बढ़ाएगा बल्कि प्राथमिक शिक्षा की गुणवत्ता में भी सुधार लाएगा।


