एलन मस्क ने H-1B विवाद पर दिसंबर में दी थी चेतावनी– “मैं ऐसी जंग छेड़ दूंगा ….”

अमेरिकी टेक दिग्गज एलन मस्क ने H-1B वीजा विवाद पर दिसंबर में कड़ा रुख अपनाते हुए इसे अमेरिका की टेक इंडस्ट्री और अपनी कंपनियों के लिए बेहद अहम बताया। मस्क ने दिसंबर 2024 में कहा था कि “मैं इस मुद्दे पर ऐसी जंग छेड़ दूंगा जिसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती।” उन्होंने याद दिलाया था कि वे खुद H-1B वीजा पर अमेरिका आए थे और टेस्ला, स्पेसएक्स जैसी कंपनियां खड़ी कीं। मस्क का कहना था कि विदेशी प्रतिभा के बिना अमेरिका की टेक्नोलॉजी प्रगति संभव नहीं। हालांकि ट्रंप प्रशासन द्वारा भारी फीस लगाने से भारतीय कामगार सबसे ज्यादा प्रभावित हो सकते हैं।

एलन मस्क ने H-1B विवाद पर दिसंबर में दी थी चेतावनी– “मैं ऐसी जंग छेड़ दूंगा ….”

एलन मस्क ने H-1B वीजा विवाद पर जताई थी कड़ी नाराज़गी

अमेरिकी टेक दिग्गज एलन मस्क ने H-1B वीजा सिस्टम को लेकर कड़ा रुख अपनाया था। दिसंबर 2024 में दिए बयान में मस्क ने कहा था कि “मैं इस मुद्दे पर ऐसी जंग छेड़ दूंगा जिसकी कल्पना भी नहीं कर सकते।” उन्होंने स्पष्ट किया कि H-1B वीजा न केवल टेस्ला और स्पेसएक्स जैसी उनकी कंपनियों के लिए जरूरी है, बल्कि पूरी अमेरिकी टेक इंडस्ट्री की रीढ़ है।

एलन मस्क ने H-1B विवाद पर दिसंबर में दी थी चेतावनी– “मैं ऐसी जंग छेड़ दूंगा ….”

मस्क का व्यक्तिगत अनुभव और समर्थन

मस्क ने याद दिलाया था कि वे खुद H-1B वीजा पर अमेरिका आए थे और आगे चलकर टेस्ला, स्पेसएक्स और सैकड़ों इनोवेटिव कंपनियों की नींव रखी। उनका कहना है कि विदेशी टैलेंट ने अमेरिका को टेक्नोलॉजी और इनोवेशन के क्षेत्र में मजबूत बनाया। यही कारण है कि वे इस प्रोग्राम का प्रबल समर्थन करते हैं।

भारतीय कामगारों पर असर

हाल ही में ट्रंप प्रशासन द्वारा H-1B वीजा पर भारी फीस लगाए जाने से विवाद गहराया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इसका सबसे ज्यादा असर भारतीय पेशेवरों पर पड़ेगा, क्योंकि बड़ी संख्या में भारतीय आईटी और टेक प्रोफेशनल्स H-1B वीजा के जरिए अमेरिका में काम कर रहे हैं।

सिस्टम में सुधार की जरूरत

मस्क ने यह भी माना था कि H-1B सिस्टम “broken” है और इसमें सुधार की आवश्यकता है। उन्होंने सुझाव दिया था कि न्यूनतम वेतन बढ़ाया जाए और वीजा बनाए रखने के लिए वार्षिक शुल्क लगाया जाए, ताकि अमेरिकी श्रमिकों की भर्ती को प्राथमिकता मिले।

टेक इंडस्ट्री की निर्भरता

अमेजन, कॉग्निजेंट और इंफोसिस जैसी बड़ी कंपनियां भी H-1B वीजा प्रोग्राम के जरिए विदेशी कुशल कामगारों को अपनी टीम में शामिल करती हैं। नेशनल फाउंडेशन फॉर अमेरिकन पॉलिसी की एक रिपोर्ट के अनुसार, 2024 में टेस्ला H-1B वीजा देने वाली कंपनियों की लिस्ट में 16वें स्थान पर थी।

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