मनरेगा का नाम बदला: अब ‘पूज्य बापू ग्रामीण रोजगार योजना’, 125 दिन का मिलेगा काम

केंद्र सरकार ने ग्रामीण रोजगार से जुड़ी प्रमुख योजना मनरेगा (MGNREGA) का नाम बदलकर ‘पूज्य बापू ग्रामीण रोजगार योजना’ करने वाला बिल मंजूर कर लिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में नाम बदलने के साथ काम के दिनों को 100 से बढ़ाकर 125 करने का फैसला भी लिया गया। सरकार का कहना है कि यह बदलाव ग्रामीण रोजगार बढ़ाने और महात्मा गांधी की ग्राम स्वराज अवधारणा को मजबूत करने के उद्देश्य से किया गया है। बिल को अब संसद में पेश किया जाएगा। विशेषज्ञों के अनुसार, काम के दिनों में वृद्धि से आय बढ़ेगी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था में सकारात्मक प्रभाव दिखेगा।

MGNREGA

मनरेगा (MGNREGA) का नाम बदलने का फैसला, सरकार ने काम के दिन बढ़ाए

केंद्र सरकार ने देश की सबसे बड़ी ग्रामीण रोजगार योजना मनरेगा (MGNREGA) को नया रूप देने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में शुक्रवार को हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल बैठक में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम का नाम बदलकर ‘पूज्य बापू ग्रामीण रोजगार योजना’ करने वाला बिल मंजूर किया गया। यह कदम लंबे समय से चल रही चर्चाओं के बाद सामने आया है, जिसमें सरकार ग्रामीण विकास मॉडल को महात्मा गांधी की विचारधारा से जोड़ना चाहती है।

सरकार ने क्यों किया बदला मनरेगा का नाम ?

सूत्रों के अनुसार, योजना का नया नाम गांधी के ग्राम स्वराज और ग्रामीण स्वावलंबन की अवधारणा को दर्शाता है। हालांकि योजना की संरचना, फंडिंग और कार्यप्रणाली ज्यादातर पूर्ववत ही रहेंगी। बदलाव केवल नाम बदलने और काम के दिनों की संख्या बढ़ाने के रूप में लागू होंगे।

125 दिन की रोजगार गारंटी: ग्रामीण परिवारों के लिए बड़ी राहत

कैबिनेट ने MGNREGA के तहत काम के दिन 100 से बढ़ाकर 125 करने का फैसला लिया है। महंगाई, बेरोजगारी और ग्रामीण आय में गिरावट को देखते हुए यह बड़ा कदम माना जा रहा है। सरकार का मानना है कि अतिरिक्त 25 दिन का रोजगार परिवारों को आर्थिक मजबूती देगा और ग्रामीण पलायन में भी कमी आएगी।

योजना का इतिहास और वर्तमान स्थिति

मनरेगा वर्ष 2005 में यूपीए-1 सरकार के दौरान लागू की गई थी। शुरुआत में इसका नाम नेशनल रूरल एम्प्लॉयमेंट गारंटी एक्ट था, जिसे 2009 में महात्मा गांधी के नाम पर रखा गया। आज इस स्कीम के तहत 15 करोड़ से अधिक लोग काम कर रहे हैं, जिनमें लगभग एक-तिहाई महिलाएँ शामिल हैं।

ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर संभावित असर

विशेषज्ञों का कहना है कि काम के दिनों की बढ़ोतरी से ग्रामीण क्षेत्रों में नकदी प्रवाह बढ़ेगा, जिससे स्थानीय बाजार, मजदूरी चक्र और छोटे व्यवसायों को सीधा लाभ होगा। योजना के नए रूप, नए नाम और नई रोजगार अवधि से ग्रामीण अर्थव्यवस्था में सकारात्मक परिवर्तन की उम्मीद की जा रही है।

अंत में, सरकार का मानना है कि मनरेगा (MGNREGA) में बदलाव ग्रामीण रोजगार को नई दिशा देगा और महात्मा गांधी की ग्रामीण विकास दृष्टि को मजबूत करेगा।

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