ईरान में आर्थिक संकट पर भड़का जनआंदोलन, हालात लगातार तनावपूर्ण
ईरान में आर्थिक संकट के बीच शुरू हुआ जनआक्रोश अब सत्ता और सड़कों के सीधे टकराव में बदलता दिख रहा है। लगातार छठे दिन जारी प्रदर्शनों ने देश के कई हिस्सों में सामान्य जनजीवन को प्रभावित किया है, जबकि सुरक्षा बलों के साथ झड़पों की घटनाएं सामने आई हैं। बाजार बंद होने से शुरू हुआ यह आंदोलन अब दर्जनों शहरों और प्रांतों तक फैल चुका है। कमजोर होती मुद्रा, बढ़ती महंगाई और बेरोज़गारी ने लोगों की नाराज़गी को हवा दी है। स्थिति तब और संवेदनशील हो गई जब शीर्ष नेतृत्व ने प्रदर्शनकारियों के प्रति सख्त रुख के संकेत दिए और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इस संकट पर प्रतिक्रियाएं आने लगीं।

आर्थिक संकट से भड़का जनआक्रोश
ईरान में मौजूदा विरोध प्रदर्शनों की जड़ देश की कमजोर अर्थव्यवस्था मानी जा रही है। रियाल के तेज़ी से गिरते मूल्य ने आम नागरिकों की क्रयशक्ति को प्रभावित किया है। कई शहरों में कारोबारियों ने बाजार बंद कर विरोध दर्ज कराया, जिसके बाद आंदोलन ने व्यापक रूप ले लिया।
कई शहरों में झड़पें और गिरफ्तारियां
प्रदर्शन अब दर्जनों शहरों तक फैल चुके हैं। कुछ इलाकों में हिंसक झड़पों, तोड़फोड़ और बल प्रयोग की खबरें हैं। मानवाधिकार संगठनों और स्थानीय एजेंसियों के अनुसार, अब तक कई लोगों की मौत हुई है और बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी हिरासत में लिए गए हैं। मृतकों की संख्या को लेकर अलग-अलग आंकड़े सामने आ रहे हैं।
शीर्ष नेतृत्व का सख्त संदेश
देश के सर्वोच्च नेता ने सार्वजनिक रूप से कहा है कि अधिकारियों को शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों से संवाद करना चाहिए, लेकिन हिंसा करने वालों के खिलाफ सख्ती जरूरी है। इस बयान को सुरक्षा एजेंसियों को अधिक कठोर कदम उठाने की छूट के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।
अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रियाएं तेज
ईरान की स्थिति पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी प्रतिक्रिया हुई है। अमेरिका से चेतावनी भरे बयान सामने आए हैं, जिनमें प्रदर्शनकारियों को निशाना बनाए जाने पर दखल की बात कही गई है। वहीं, ईरान के पूर्व शाही परिवार से जुड़े लोगों ने भी आंदोलन के समर्थन में बयान दिए हैं।
आगे क्या?
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर आर्थिक हालात में तत्काल सुधार के संकेत नहीं मिले और संवाद की प्रक्रिया ठोस रूप नहीं ले पाई, तो यह संकट और गहराने की आशंका है। आने वाले दिनों में सरकार का रुख और सुरक्षा बलों की रणनीति तय करेगी कि हालात शांत होते हैं या टकराव और बढ़ता है।


