अरावली पहाड़ी की नई परिभाषा क्यों बनी विवाद की वजह ?

सुप्रीम कोर्ट की नई परिभाषा पर aravali hills news: देशभर में बहस तेज

सुप्रीम कोर्ट ने अरावली पहाड़ियों के लिए एक समान परिभाषा को मंजूरी देते हुए स्पष्ट किया है कि आसपास की जमीन से 100 मीटर या उससे अधिक ऊंची भू-आकृति ही अरावली पहाड़ी मानी जाएगी। साथ ही, 500 मीटर के दायरे में मौजूद दो या अधिक पहाड़ियां मिलकर अरावली रेंज कहलाएंगी। यह परिभाषा केंद्र सरकार की समिति की सिफारिशों पर आधारित है।

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क्या बदला है नई परिभाषा में

अदालत के फैसले के बाद पहली बार पूरे क्षेत्र में एक वस्तुनिष्ठ मानक लागू होगा। सरकार का कहना है कि इससे नियमों में एकरूपता आएगी और खनन नियंत्रण मजबूत होगा। पर्यावरण मंत्रालय ने साफ किया है कि संरक्षित वन, पर्यावरण संवेदनशील क्षेत्र और आर्द्रभूमि जैसे ‘अभेद्य’ इलाकों में खनन पर पूरी तरह रोक रहेगी।

पर्यावरणविदों की चिंता: संरक्षण से बाहर होंगी छोटी पहाड़ियां

पर्यावरण विशेषज्ञों का तर्क है कि ऊंचाई आधारित मानक से कई छोटी, झाड़ियों से ढंकी पहाड़ियां संरक्षण से बाहर हो सकती हैं, जो पारिस्थितिकी के लिए जरूरी हैं। उनका कहना है कि अरावली सिर्फ चट्टानों की ऊंचाई नहीं, बल्कि भूजल रीचार्ज, जैव विविधता और जलवायु संतुलन की रीढ़ है।

सरकार का पक्ष: सुरक्षा घटेगी नहीं, नियम होंगे सख्त

केंद्र सरकार ने आशंकाओं को खारिज करते हुए कहा है कि नई व्यवस्था का उद्देश्य सुरक्षा कम करना नहीं, बल्कि वैज्ञानिक और स्पष्ट परिभाषा के साथ निगरानी को मजबूत करना है। पर्यावरण मंत्री ने बताया कि लगभग 1.47 लाख वर्ग किलोमीटर में फैली अरावली शृंखला का केवल सीमित हिस्सा ही सख्त अध्ययन और अनुमति के बाद किसी गतिविधि के लिए खुल सकता है।

विपक्ष और जनआंदोलन की प्रतिक्रिया

विपक्षी दलों ने फैसले पर चिंता जताते हुए इसे पर्यावरण के लिए जोखिम बताया है। कई राज्यों में प्रदर्शन शुरू हो गए हैं और #SaveAravalli अभियान फिर तेज हो गया है। राजनीतिक नेताओं ने अरावली को दिल्ली-एनसीआर और उत्तर भारत की जीवनरेखा बताते हुए व्यापक संरक्षण की मांग की है।

अरावली का महत्व: थार से लेकर दिल्ली तक प्रभाव

अरावली भारत की सबसे प्राचीन पर्वत शृंखलाओं में से एक है, जो थार रेगिस्तान के फैलाव को रोकने, धूल के कणों को बाधित करने और उत्तर भारत की जलवायु को संतुलित रखने में अहम भूमिका निभाती है। विशेषज्ञों के अनुसार aravali hills और aravali hills news से जुड़ी यह बहस सिर्फ राजस्थान, हरियाणा या दिल्ली तक सीमित नहीं, बल्कि पूरे उत्तर भारत के पर्यावरण संतुलन से जुड़ी है।

आगे क्या: कानूनी और नीतिगत राह

प्रदर्शन कर रहे समूहों ने अदालत में कानूनी विकल्प तलाशने के संकेत दिए हैं। वहीं सरकार का कहना है कि किसी भी नए खनन पट्टे पर मौजूदा कानूनों के तहत कड़ी जांच होगी। आने वाले दिनों में यह तय होगा कि नई परिभाषा संरक्षण और विकास के बीच संतुलन कैसे बनाती है। aravali hills news पर देश की नजर बनी हुई है।

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