क्या FSSAI ने ORSL को बेचने की अनुमति दी? जानिए सच
भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) और ORSL ड्रिंक को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। 14 अक्टूबर को FSSAI ने सभी गैर-मानक ORS ड्रिंक्स पर बैन लगाया था, लेकिन दिल्ली हाईकोर्ट ने इस आदेश पर अस्थायी रोक लगा दी। इसी बीच बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. शिवरंजनी संतोष ने आरोप लगाया कि FSSAI ने ORSL कंपनी को पुराने हाई-शुगर स्टॉक बेचने की इजाजत दी है। हालांकि, FSSAI ने इसे “गलत दावा” बताते हुए खंडन किया और कहा कि कोर्ट के आदेश के कारण ही उत्पाद बाजार में बिक रहे हैं। असली ORS केवल WHO फॉर्मूले के अनुसार बनता है, जबकि कई ड्रिंक इससे भिन्न हैं।

FSSAI और ORSL विवाद: सोशल मीडिया पर गलत दावों की पड़ताल
सोशल मीडिया पर इस समय FSSAI और ORSL नामक ड्रिंक को लेकर गहरी बहस जारी है। कई पोस्ट्स में दावा किया गया कि भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने ORSL को बाजार में बेचने की अनुमति दे दी है। लेकिन, प्राधिकरण ने इस दावे का सख्त खंडन करते हुए इसे “Misrepresentation of Facts” बताया है।
14 अक्टूबर के आदेश और हाईकोर्ट की रोक
14 अक्टूबर 2025 को FSSAI ने स्पष्ट आदेश जारी किया था कि जो भी पेय विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के असली ORS फॉर्मूले पर आधारित नहीं हैं, वे अपने लेबल या नाम में “ORS” शब्द का इस्तेमाल नहीं कर सकते। यह फैसला इसलिए लिया गया था ताकि ग्राहक भ्रमित न हों और दस्त से पीड़ित बच्चों को असली ORS की जगह गलत उत्पाद न मिलें।
हालांकि, जॉनसन एंड जॉनसन की यूनिट JNTL (जो ORSL बनाती है) ने दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर की। कोर्ट ने सुनवाई के बाद FSSAI के आदेश पर अंतरिम रोक (Stay Order) लगा दी, जिसके चलते ORSL जैसे उत्पाद अभी बाजार में बिक रहे हैं।
डॉ. शिवरंजनी संतोष का आरोप और FSSAI का जवाब
हैदराबाद की बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. शिवरंजनी संतोष ने सोशल मीडिया पर आरोप लगाया कि FSSAI ने ORSL बनाने वाली कंपनी को अपने पुराने हाई-शुगर स्टॉक को बेचने की “सहमति” दी है। उन्होंने इसे “राष्ट्रीय शर्म” बताते हुए कहा कि बच्चों के लिए यह उत्पाद खतरनाक है।
FSSAI ने अपने आधिकारिक पोस्ट में स्पष्ट किया कि उसने किसी भी कंपनी को ऐसा कोई अनुमति पत्र या सहमति नहीं दी है। प्राधिकरण ने कहा कि यह मामला फिलहाल कोर्ट में विचाराधीन है, और किसी को गलत जानकारी नहीं फैलानी चाहिए।
असली ORS और नकली ड्रिंक्स में फर्क
FSSAI और डॉक्टरों के अनुसार, असली ORS (Oral Rehydration Solution) WHO के फार्मूले के तहत तैयार किया जाता है, जिसमें नमक, सोडियम, पोटेशियम और सीमित मात्रा में डेक्सट्रोज़ होता है। यह शरीर में तरल पदार्थ की कमी को पूरा करता है।
जबकि ORSL जैसे कई ड्रिंक्स में 10 गुना तक अधिक शुगर होती है और जरूरी इलेक्ट्रोलाइट्स बहुत कम होते हैं, जिससे दस्त से पीड़ित बच्चों को नुकसान पहुंच सकता है। भारत में पांच साल से कम उम्र के बच्चों की मौत का एक प्रमुख कारण डायरिया है, इसलिए यह विवाद केवल कानूनी नहीं बल्कि स्वास्थ्य सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मुद्दा है।
आगे क्या?
FSSAI ने कहा है कि वह ORSL जैसे सभी गैर-मानक उत्पादों को बाजार से हटाने के लिए प्रतिबद्ध है। कोर्ट के अंतिम आदेश के बाद ही तय होगा कि इन ड्रिंक्स का भविष्य क्या होगा। फिलहाल उपभोक्ताओं को सलाह दी गई है कि वे असली ORS और समान नाम वाले उत्पादों में फर्क समझें और डॉक्टर की सलाह से ही इस्तेमाल करें।


