सर्पदंश से बचाव पर सिद्धार्थनगर में 50 चिकित्सकों को दिया गया प्रशिक्षण

राहत आयुक्त कार्यालय और जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण सिद्धार्थनगर के संयुक्त तत्वावधान में सर्पदंश न्यूनीकरण कार्यक्रम के अंतर्गत एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन एएनएमटीसी सेंटर, सीएमओ कैंपस सिद्धार्थनगर में किया गया। कार्यशाला में जिले के 50 चिकित्साधिकारियों ने भाग लिया। राहत आयुक्त भानु चंद्र गोस्वामी ने सर्पदंश के वैज्ञानिक व व्यवहारिक प्रशिक्षण पर जोर दिया। सर्पदंश कंसल्टेंट काव्या शर्मा ने तकनीकी रूपरेखा तैयार की। प्रशिक्षण में विशेषज्ञ डॉ. ए.एस.के. भारती, डॉ. विजय प्रताप सिंह, डॉ. राजेश और डॉ. संतोष राय ने सर्पदंश की पहचान, उपचार और जागरूकता पर विस्तृत जानकारी दी।

सर्पदंश से बचाव पर सिद्धार्थनगर में 50 चिकित्सकों को दिया गया प्रशिक्षण

सर्पदंश न्यूनीकरण हेतु सिद्धार्थनगर में चिकित्साधिकारियों का प्रशिक्षण आयोजित

सिद्धार्थनगर। राहत आयुक्त कार्यालय एवं जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण सिद्धार्थनगर के संयुक्त तत्वावधान में सर्पदंश न्यूनीकरण कार्यक्रम के अंतर्गत एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन एएनएमटीसी सेंटर, सीएमओ कैंपस में किया गया। इस प्रशिक्षण में जिले के 50 चिकित्साधिकारियों ने सहभागिता की।

सर्पदंश के वैज्ञानिक प्रबंधन पर जोर

राहत आयुक्त भानु चंद्र गोस्वामी ने सर्पदंश के बढ़ते मामलों को देखते हुए चिकित्सकों को वैज्ञानिक और व्यवहारिक प्रशिक्षण की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि त्वरित उपचार और सही पहचान ही सर्पदंश से होने वाली मौतों को रोक सकती है।

विशेषज्ञों ने दिए व्यवहारिक सुझाव

राज्य स्तर के प्रबंधक शांतनु द्विवेदी ने कार्यक्रम का समन्वय किया, जबकि कंसल्टेंट काव्या शर्मा ने प्रशिक्षण की तकनीकी रूपरेखा तैयार की।
मुख्य वक्ता डॉ. ए.एस.के. भारती ने कहा कि चिकित्सकों को सर्पदंश के मामलों में त्वरित निर्णय लेकर उपचार शुरू करना चाहिए। मास्टर ट्रेनर्स डॉ. विजय प्रताप सिंह, डॉ. राजेश, और डॉ. संतोष राय ने विषैले और गैर-विषैले सर्पों की पहचान के व्यावहारिक तरीके बताए।

समुदाय में जागरूकता भी जरूरी

विशेषज्ञों ने कहा कि चिकित्सकों की भूमिका केवल इलाज तक सीमित नहीं, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता फैलाना भी उतना ही आवश्यक है।
आपदा विशेषज्ञ पुष्पांजलि सिंह ने कार्यक्रम का संचालन किया, जबकि महामारी रोग विशेषज्ञ समीर कुमार सिंह ने भूमिका प्रस्तुत की।
कार्यक्रम की निगरानी मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. रजत कुमार चौरसिया ने जनपद स्तर पर तथा शासन स्तर पर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से की।

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