नेपाल के युवाओं ने ऑनलाइन वोटिंग से बदली राजनीति – जानिए पूरा मामला
नेपाल में सोशल प्लेटफार्म पर प्रतिबंध ने महज 48 घंटे में ओली सरकार की सत्ता को हिला दिया। प्रतिबंध के खिलाफ शांतिपूर्ण प्रदर्शन पुलिस गोलीबारी के बाद हिंसक हो गए, जिसमें 51 युवाओं की मौत और 500 से अधिक घायल हुए। जनाक्रोश के चलते प्रधानमंत्री ओली व गृहमंत्री रमेश लेखक ने इस्तीफा दे दिया। राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल ने सुप्रीम कोर्ट की पहली महिला न्यायाधीश सुशीला कार्की को अंतरिम प्रधानमंत्री नियुक्त किया। कार्की ने शपथ लेते ही संसद भंग कर दी और छह माह के भीतर चुनाव कराने की घोषणा की। भारत व अमेरिका ने बदलाव का स्वागत किया।

नेपाल में सत्ता पलटी, सोशल मीडिया प्रतिबंध बना कारण
काठमांडू। नेपाल में सोशल मीडिया पर प्रतिबंध का फैसला ओली सरकार को भारी पड़ गया। केवल दो दिन के भीतर भड़की जनभावनाओं ने राजनीतिक परिदृश्य पूरी तरह बदल दिया।
गोलीकांड के बाद भड़का आंदोलन
सोमवार को युवा शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे थे, लेकिन पुलिस की गोलीबारी में 51 युवाओं की मौत और 500 से अधिक लोग घायल हो गए। घटना के बाद आंदोलन हिंसक हो गया और नेपाल के हर जिले से विरोध प्रदर्शन जुड़ता चला गया। हालात काबू से बाहर होते ही गृहमंत्री रमेश लेखक और अगले ही दिन प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने इस्तीफा दे दिया।
पहली महिला अंतरिम प्रधानमंत्री बनीं सुशीला कार्की
राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल ने शुक्रवार देर रात सुप्रीम कोर्ट की पहली महिला जज सुशीला कार्की को अंतरिम प्रधानमंत्री पद की शपथ दिलाई। कार्की ने शपथ लेते ही संसद भंग करने की सिफारिश की, जिसे राष्ट्रपति ने मंजूरी दी। कांग्रेस, एमाले और माओवादी दलों ने संसद भंग को असंवैधानिक बताया, जबकि राष्ट्रिय स्वतन्त्र पार्टी (रास्वपा) ने इसे जनभावना के अनुरूप करार दिया।
सोशल मीडिया ने ही दिलाई गद्दी
जिस प्लेटफार्म पर प्रतिबंध लगाया गया, वही बदलाव का कारण बना। युवाओं ने डिस्कार्ट एप के जरिये ऑनलाइन वोटिंग कराई, जिसमें सुशीला कार्की को 78% समर्थन मिला। अन्य उम्मीदवारों में काठमांडू मेयर बालेन शाह को 20% और ऊर्जा निदेशक घिसिंग को मात्र 2% वोट मिले।
छह माह का चुनौतीपूर्ण कार्यकाल
नेपाल मामलों की विशेषज्ञ यशोदा श्रीवास्तव का कहना है कि कार्की का छह माह का कार्यकाल चुनौतियों से भरा होगा। युवाओं का विश्वास बनाए रखना, विपक्षी दलों को साधना और अंतरराष्ट्रीय समर्थन पाना बड़ी जिम्मेदारी होगी। भारत और अमेरिका ने परिवर्तन का स्वागत कर मदद का आश्वासन दिया है, लेकिन चीन को साथ लाना उनके लिए अहम होगा क्योंकि शिक्षा व संचार में चीन का निवेश बड़ा है। पर्यटन को पुनर्जीवित करना भी उनकी सबसे बड़ी चुनौती होगी।
रिपोर्ट : नीलू दुबे


